
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव की मौत का मामला हत्या और आत्महत्या के बीच उलझ गया है. इस मामले मेंपुलिस ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल के तीन डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. इस केस की विस्तृत जांच चल रही है.
पुलिस उपायुक्त अभिषेक भारती ने बताया कि मृतक की बहन डॉ. अदिति श्रीवास्तव की शिकायत पर रविवार देर रात एसआरएन अस्पताल के डॉ. शिवम गुप्ता, डॉ. सचिन यादव और डॉ. अनामिका के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया है.
एसीपी कोतवाली मनोज कुमार सिंह ने ने पहले बताया कि ऑर्थोपेडिक्स के दूसरे वर्ष के एमएस छात्र डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव (28) शनिवार रात मोतीलाल नेहरू मेडिकल से संबद्ध एसआरएन अस्पताल में अपनी कार में संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए थे. वो उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले थे.
डीसीपी ने सोमवार को बताया कि मृतक कार्तिकेय श्रीवास्तव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी नहीं आई है. इसके आने के बाद मौत के असली कारणों का पता चल सकेगा. उनकी बहन ने आरोप लगाया है कि उनका भाई जूनियर रेजिडेंट था. उसका सीनियर शिवम गुप्ता उसका शारीरिक और मानसिक शोषण करता था.
पीड़ित डॉक्टर ने इस बारे में कई बार एसोसिएट प्रोफेसर (ऑर्थोपेडिक्स) सचिन यादव से शिकायत की थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की थी. यहां तक कि कार्तिकेय श्रीवास्तव के पैर में दिक्कत होने के बावजूद सचिन यादव ने उन्हें 36 से 48 घंटे तक खड़ा रखा था.
इसके अलावा अनामिका नाम की एक लड़की, जो वर्तमान में जूनियर रेजिडेंट (नेत्र रोग) है, एक साल से कार्तिकेय की दोस्त थी. उसने अचानक उनसे बात करना बंद कर दिया था. इसमें कहा गया है कि जब कार्तिकेय ने अनामिका से इस बारे में बात की तो उसने बताया कि वह किसी और के साथ है.
इसके बाद डॉ. कार्तिकेय श्रीवास्तव ने कभी अनामिका को फोन नहीं किया, लेकिन वो समय-समय पर उन्हें कॉल करती रहती थी. शिकायतकर्ता ने कहा कि उसे संदेह है कि अनामिका के दोस्त ने कार्तिकेय को उससे छुटकारा पाने के लिए मार डाला होगा. डीसीपी ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है.