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'वो मुझे मार सकते थे...', नोएडा में दिन-दहाड़े लूटपाट का शिकार बनीं HR मैनेजर की आपबीती

पीड़िता के मुताबिक जब वह सुबह ऑफिस जा रही थीं तभी पर्थला चौक के पास उनकी कार जाम में फंस गई थी. इसी दौरान दो आरोपी आए और उनसे बदतमीजी करने लगे. हैरान करने वाली बात ये है कि जब पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि जिस जगह यह वारदात हुई थी वहां लगे सीसीटीवी काम नहीं कर रहे थे.

प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 मई 2024,
  • अपडेटेड 1:19 PM IST

नोएडा की एक महिला को उस समय खौफनाक अनुभव का सामना करना पड़ा, जब वह अपने दफ्तर जा रही थीं और इसी दौरान दो अज्ञात लोगों ने उसकी कार रोक ली. एक कंपनी में महाप्रबंधक (एचआर) के पद पर तैनात वांछा गर्ग पिछले हफ्ते ग्रेटर नोएडा से अपने फिल्म सिटी दफ्तर के लिए निकली थीं. वांछा पर्थला चौक के पास सुबह 10 बजे के आसपास ट्रैफिक जाम में फंस गईं और इसी दौरान दो लोग अचानक आये और वांछा की कार की खिड़कियों को पीटना शुरू कर दिया और दावा किया कि एक बच्चा उसकी कार के पिछले पहिये के नीचे फंस गया है.

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इस दौरान दोनों लोगों ने उनसे अपनी कार की खिड़की नीचे करने को कहा. वांछा बताती हैं, “मैंने उसे नज़रअंदाज़ करने की कोशिश की क्योंकि मुझे यकीन था कि मैंने किसी को टक्कर नहीं मारी है, लेकिन एक आरोपी लगातार चिल्लाते रहा कि बच्चा फंसा हुआ. वो मुझसे लगातार गाड़ी रोकने को कह रहे थे. मैं हैरान थी कि कैसे कोई मेरी कार के पहिए के नीचे फंसे बच्चे होने का दावा कैसे कर सकता है?” 

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पीड़िता की आपबीती

इस दौरान दो लोगों में से एक ने उनकी कार को सुरक्षित रूप से ले जाने और "फँसे" बच्चे को निकालने में मदद करने की पेशकश की. वांछा ने बताया कि मैं बहुत घबरा गई कि कैसे एक बच्चा मेरी कार के नीचे आ गया था. डर के मारे मैंने कार की खिड़की का सीसा थोड़ा नीचे कर दिया और उसने तुरंत हाथ अंदर डाल दिया. मैं हैरान रह गई, मैंने उन्हें हाथ हटाने के लिए बोला और खिड़की बंद करने लगी इसी दौरान आरोपी ने हाथ में दर्द होने का नाटक किया तो मैंने तुरंत सीसा नीचे किया और इसी दौरान उसने तेजी से कार के दरवाजे का लॉक खोल दिया. 

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इसके बाद दूसरा आरोपी कार का दरवाजा पीटने लगा. वांछा ने बताया, 'यह सब उसके साथी से मेरा ध्यान भटकाने के लिए किया गया था. जब मैं अभी भी घबराहट से कांप रहाी थी तभी मैंने देखा कि दोनों अपोजिट साइट में भाग रहे हैं और फिर फरार हो गए. तभी मुझे एहसास हुआ कि उन्होंने मेरा फोन, एक गोल्डन आईफोन 14 प्रो चुरा लिया है, जो मेरी बगल वाली सीट पर मेरे लंच बास्केट के अंदर था. यह सब पांच मिनट के अंदर में हुआ.'

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सीसीटीवी थे बंद

हैरान करने वाली बात ये है कि जब पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया तो पता चला कि जिस जगह यह वारदात हुई थी वहां लगे सीसीटीवी काम नहीं कर रहे थे. घटना के एक दिन बाद, गर्ग ने अपने आईफोन का पता लगाने के लिए फाइंडमाई फीचर का इस्तेमाल किया तो पता चला  कि यह मेरठ में था और मैं इस बारे में पुलिस को बताया तो उन्होंने उसे दोबारा चालू होने तक इंतजार करने को कहा.

वांछा कहता ही कि सिर्फ मेरा फोन चुराने के बजाय, वे मेरा अपहरण करने या यहां तक कि मुझे मार भी सकते थे क्योंकि उन्हें कानून व्यवस्था का कोई खौफ नहीं था. 

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