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पालघर लिंचिंग केस में 3 पुलिसवाले बर्खास्त, भीड़ ने 2 साधुओं की कर दी थी हत्या

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों को पीट-पीट कर हत्या कर देने के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है.

पालघर मामले में तीन पुलिसकर्मी बर्खास्त (फाइल फोटो-PTI) पालघर मामले में तीन पुलिसकर्मी बर्खास्त (फाइल फोटो-PTI)
aajtak.in
  • मुंबई,
  • 31 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:49 AM IST
  • दो साधुओं और ड्राइवर की कर दी थी हत्या
  • बच्चा चोर की शक में भीड़ ने किया था अटैक
  • इस केस में तीन चार्जशीट की गई है दायर

महाराष्ट्र के पालघर में दो साधुओं समेत तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर देने के मामले में तीन पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है. एक सीनियर पुलिस अफसर ने रविवार को बताया कि इन पुलिसकर्मियों में सहायक पुलिस निरीक्षक (एएसआई) आनंदराव काले भी शामिल हैं, जो 16 अप्रैल को हुई घटना के समय पालघर के कासा पुलिस थाने के प्रभारी थे.

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पुलिस अफसर ने बताया कि काले के अलावा सहायक पुलिस निरीक्षक (एएसआई) रवि सांलुके और कॉन्सटेबल नरेश धोडी को भी सेवा से बर्खास्त किया गया है. अधिकारी ने बताया कि कोंकण रेंज के पुलिस महानिरीक्षक ने शनिवार को जारी एक आदेश में तीनों पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया.

पुलिस अफसर ने बताया कि घटना के बाद ये तीनों पुलिसकर्मी भी अन्य पांच पुलिसकर्मियों के साथ निलंबित कर दिए गए थे. पालघर के गढ़चिंचले गांव में 16 अप्रैल 2020 को दो साधुओं और उनके ड्राइवर की भीड़ ने बच्चा चोर होने के संदेह में पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. तीनों लोग सूरत जा रहे थे.

इस केस में तीन चार्जशीट दायर किए हैं. घटना के बाद जब बवाल बढ़ा तो राज्य सरकार ने काले और 5 अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था. काले घटना के समय पालघर के कासा पुलिस थाने के प्रभारी थे. इसके अलावा, भीड़ के हमले के इस मामले में 35 से अधिक पुलिस कांस्टेबल और अन्य रैंकों के कर्मियों का तबादला कर दिया गया था.

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पुलिस ने बताया कि इस मामले में करीब 154 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 11 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया था. मामले की जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंपी गई थी जिसने अदालत में तीन चार्जशीट दाखिल किए हैं. सरकार ने पालघर जिला पुलिस प्रमुख गौरव सिंह को भी अवकाश पर भेज दिया था.

भीड़ की हिंसा का शिकार होने वाले पीड़ितों की पहचाना महाराज कल्पवृक्षगिरि, सुशील गिरी महाराज और उनका ड्राइवर नीलेश तेलगड़े के रूप में की गई थी. इस मामले के अभियुक्तों पर हत्या, सशस्त्र दंगा करने और लोक सेवकों को को उनकी ड्यूटी करने से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल सहित अन्य आरोप लगाए गए थे. बाद में इस मामले को महाराष्ट्र आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) को सौंप दिया गया था.


 

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