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धर्मांतरण केस में 7 राज्यों में जांच करेगी यूपी ATS की टीम

यूपी एटीएस की टीम धर्मांतरण केस में आईडीसी से मिले दस्तावेजों के आधार पर 7 राज्यों में जांच करेगी. इस्लामिक सेंटर में धर्मांतरण करने वाले हर व्यक्ति के ब्यौरे का सत्यापन कराया जाएगा.

धर्मांतरण केस आरोपी हैं दोनों मौलाना. धर्मांतरण केस आरोपी हैं दोनों मौलाना.
संतोष शर्मा
  • लखनऊ,
  • 26 जून 2021,
  • अपडेटेड 12:51 AM IST
  • धर्मांतरण मामले में कई राज्यों में होगी जांच
  • धर्मांतरण केस में उमर और कासमी हुए थे गिरफ्तार
  • IDC में पड़ताल के बाद 81 पन्नों का ब्यौरा

धर्मांतरण केस में उत्तर प्रदेश एंटी टेरर स्क्वाड (ATS) टीम इस्लामिक दावा सेंटर (आईडीसी) से मिले दस्तावेजों के आधार पर 7 राज्यों में जांच करेगी. मणिपुर, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, केरल, झारखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में एटीएस की टीम धर्मांतरण कनेक्शन खंगालेगी.

इस्लामिक दावा सेंटर में धर्मांतरण करने वाले हर व्यक्ति के ब्यौरे को सत्यापित कराया जाएगा, साथ ही विस्तृत पड़ताल की जाएगी. धर्मांतरण केस में सोमवार को इस्लामिक दावा सेंटर से जुड़े मोहम्मद उमर गौतम और मुफ्ती जहांगीर कासमी को गिरफ्तार किया गया था.

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पड़ताल में 81 पन्नों का ब्यौरा

आईडीसी में हुई पड़ताल के बाद 81 पन्नों का ब्यौरा सामने आया था. इनमें बीते डेढ़ साल में कराए गए धर्मांतरण के सारे मामले दर्ज हैं. इसी को आधार बनाकर एटीएस जांच करेगी. मुफ्ती काजी जहांगीर के जरिए 7 जनवरी 2020 से 12 मई 2021 तक 33 लोगों का धर्मांतरण करा दिया गया था.

धर्मांतरण करने वालों में 18 महिलाएं और 15 पुरुष शामिल थे. दिल्ली से 14, यूपी से 9, बिहार से 3, एमपी से 2 और गुजरात, असम, महाराष्ट्र, झारखंड, केरल जैसे राज्यों से 1-1 शख्स ने धर्म परिवर्तन किया. हैरान कर देने वाली बात ये है कि जिन लोगों की डिटेल्स सामने आई है, उनमें से पढ़े लिखे लोग ज्यादा हैं.

UP: धर्मांतरण करने वालों की डिटेल आई सामने, लिस्ट में डॉक्टर, इंजीनियर और पीएचडी होल्डर तक शामिल 

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बीटेक, एमबीए पास लोगों ने भी किया धर्मांतरण
लिस्ट के मुताबिक धर्म बदलने वालों में सरकारी नौकरी वाले, बीटेक की पढ़ाई कंप्लीट करने वाले, शिक्षक, सॉफ्टवेयर इंजीनयर जैसे दिग्गज प्रोफेशन वाले लोग शामिल हैं. इनमें एमबीबीएस, एम फॉर्मा करने वाले लोग भी शामिल हैं.

मनीलॉन्ड्रिंग का केस दर्ज
धर्मांतरण केस में वित्तिय अनियमितता सामने आने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत केस दर्ज किया है. इस केस में भी मुफ्ती काजी जहांगीर कासमी और मोहम्मद उमर गौतम को आरोपी बनाया गया है. यूपी पुलिस का दावा है कि इन्हें विदेशी फंडिंग मिलती थी.


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