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कोर्ट में दिखा वानखेड़े के वकील का तल्ख अंदाज- कुछ भी बुला लो लेकिन दाऊद...

समीर वानखेड़े के पिता को डिफेंड करते हुए वे कह गए कि आप मुझे किसी भी नाम से बुला सकते हैं लेकिन दाऊद....अब ये बयान भी इसलिए आया क्योंकि आज कोर्ट में नवाब मलिक की टीम की तरफ से कई ऐसे दस्तावेज दिखा दिए गए जिनके दम पर कहा जाने लगा कि समीर वानखेड़े एक मुस्लिम हैं और उन्होंने खुद को अनुसूचित जाति का बता नौकरी पाई है. 

समीर वानखेड़े के वकील का तल्ख अंदाज समीर वानखेड़े के वकील का तल्ख अंदाज
विद्या
  • मुंबई,
  • 18 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 9:06 PM IST
  • कोर्ट में दिखा वानखेड़े के वकील का तल्ख अंदाज
  • बोले- कुछ भी बुला लो लेकिन दाऊद.....

समीर वानखेड़े बनाम नवाब मलिक वाले मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं. आज जब बॉम्बे हाई कोर्ट में सुनवाई हुई तो दोनों तरफ से वकीलों ने ना सिर्फ कई दस्तावेज सामने रख दिए, बल्कि कई मौकों पर तल्ख टिप्पणी भी की. ऐसा ही बयान समीर वानखेड़े के वकील अरशद शेख ने दिया.

कोर्ट में दिखा वानखेड़े के वकील का तल्ख अंदाज

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समीर वानखेड़े के पिता को डिफेंड करते हुए वे कह गए कि आप मुझे किसी भी नाम से बुला सकते हैं लेकिन दाऊद.... अब ये बयान भी इसलिए आया क्योंकि आज कोर्ट में नवाब मलिक की टीम की तरफ से कई ऐसे दस्तावेज दिखा दिए गए जिनके दम पर कहा जाने लगा कि समीर वानखेड़े एक मुस्लिम हैं और उन्होंने खुद को अनुसूचित जाति का बताकर नौकरी पाई है. 

अब जिन दस्तावेजों को मलिक की लीगल टीम ने रखा है, उनमें से एक तो वो है जहां पर समीर वानखेड़े के पिता के नाम को बदला गया है. ये दस्तावेज बीएमसी से लिया गया है. दूसरा दस्तावेज स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र है और तीसरा सेंट जोसेफ हाई स्कूल का एडमिशन फॉर्म. अब इन्हीं दस्तावेजों के दम पर समीर वानखेड़े का नाम समीर दाऊद वानखेड़े बताया जा रहा है.

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लेकिन वानखेड़े की लीगल टीम ने इन दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. तर्क दिया गया है कि समीर वानखेड़े के पिता ने काफी पहले ही बेटे का नाम बदल दिया था. वहीं ये भी कहा गया कि समीर के पिता का नाम ज्ञानदेव है और उन्हें किसी भी सूरत में दाऊद कहकर संबोधित नहीं किया जाए. वानखेड़े के वकील ने पुलिस पर भी सवाल खड़े कर दिए.

वानखेड़े की टीम ने उठाए सवाल

उनके मुताबिक जिन सर्टिफिकेट को पुलिस को सौंपा गया था, वो नवाब मलिक तक कैसे पहुंच गए? वहीं इस बहस के बीच जस्टिस जामदर ने भी तंज कसते हुए कह दिया कि वैसे तो स्कूल हर पांच साल में पुराने रिकॉर्ड खत्म कर देते हैं, लेकिन यहां इतने सालों तक इन्हें संभालकर रखा गया. वहीं क्योंकि नवाब मलिक की टीम ने आरोप लगाया कि नौकरी पाने के लिए वानखेड़े ने खुद को अनुसूचित जाति का बताया, इस पर भी उनके वकील ने मजाकिया जवाब दिया.

उन्होंने बोला कि पांचवी क्लास में समीर वानखेड़े को पता था कि वे एक IRS अधिकारी बनने वाले हैं और उन्हें Mahar सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ेगी. अब अभी के लिए कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है और 22 नवबंर को फैसला सुनाया जाएगा. अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी और दस्तावेज कोर्ट में जमा नहीं करवाएगा.

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