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बहराइच में SP का बड़ा एक्शन, इस वजह से चौकी प्रभारी समेत 7 पुलिसकर्मी किए निलंबित

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एसपी राम नयन सिंह ने अनुशासनहीनता, लापरवाही और लोगों को परेशान करने के आरोप में एक पुलिस चौकी के प्रभारी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई मोतीपुर थाने के जालिम नगर पुलिस चौकी पर हुई घटना के बाद हुई है.

बहराइच के अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए. बहराइच के अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए.
aajtak.in
  • बहराइच,
  • 12 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 5:06 PM IST

उत्तर प्रदेश के बहराइच में पुलिस अधीक्षक (एसपी) राम नयन सिंह ने अनुशासनहीनता, लापरवाही और लोगों को परेशान करने के आरोप में एक पुलिस चौकी के प्रभारी समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई मोतीपुर थाने के जालिम नगर पुलिस चौकी पर हुई घटना के बाद हुई है. ये पुलिस चौकी बहराइच-लखीमपुर जिले की सीमा पर स्थित है.

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जानकारी के मुताबिक, 2 और 3 जनवरी की रात को एक ट्रक ने पुलिस चौकी को टक्कर मार दी, जिससे वो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई. इसके बाद शुक्रवार को पुलिस महानिरीक्षक (देवी पाटन संभाग) अमित पाठक और बहराइच एसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया. इस दौरान पुलिस चौकी पर पुलिसकर्मियों के व्यवहार के संबंध में कुछ अनियमितताएं सामने आईं.

प्रारंभिक जांच में पुलिसकर्मियों का आचरण संदिग्ध प्रतीत हुआ, जिसके बाद एसपी ने तत्काल कार्रवाई कर दी. इसके परिणामस्वरूप, पुलिस चौकी प्रभारी दिनेश बहादुर सहित सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया. अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गा प्रसाद तिवारी ने कहा कि जांच के दौरान पता चला है कि जालिम नगर चौकी के पुलिसकर्मियों ने ट्रक चालक को परेशान किया था.

एएसपी ने बताया कि पुलिस का काम जनता की सहायता करना है. उन्हें गुमराह करना और परेशानी पैदा करना नहीं है. हर जांच एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत की जाती है, लेकिन इस मामले में एसओपी की अनदेखी की गई. ट्रक मालिक और चालक को अनावश्यक रूप से परेशान किया गया. इस वजह ये कार्रवाई की गई है. इस मामले की आगे की जांच चल रही है.
 
बताते चलें कि पिछले साल अक्टूबर में बहराइच में हुई हिंसा के बाद एसपी ने 29 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया था. सभी पुलिसकर्मी हरदी और रामगांव पुलिस स्टेशन में तैनात थे. बहराइच की तत्कालीन एसपी वृंदा शुक्ला ने बताया था कि जिन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया गया, उनमें से अधिकांश उस क्षेत्र के थे, जहां पर मूर्ति विसर्जन के दौरान हिंसा फैली थी. 

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बहराइच की तत्कालीन पुलिस अधीक्षक इस बारे में एक बयान भी जारी कराया था. इसके मुताबिक, हरदी पुलिस स्टेशन से 14 और रामगांव पुलिस स्टेशन से 15 पुलिसकर्मियों को पुलिस लाइन में स्थानांतरित किया गया. ये नियमित तबादले थे. सिपाहियों का एक थाने में दो साल का कार्यकाल होता है. वो अवधि समाप्त हो गई थी, इसलिए उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया था.

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