
दिल्ली से सटे यूपी के नोएडा में यौन उत्पीड़न का एक अलग तरह का मामला सामने आने के बाद 'डिजिटल रेप' शब्द सुर्खियों में आ गया है. इस अपराध को 2013 के आपराधिक कानून संशोधन (Criminal Law amendment 2013) के माध्यम से भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) में शामिल किया गया, जिसे निर्भया अधिनियम (Nirbhaya Act) भी कहा जाता है. चलिए जानते हैं कि आखिर क्या होता है 'डिजिटल रेप का मतलब?
डिजिटल रेप का मतलब
नोएडा पुलिस ने बताया कि डिजिटल रेप का मतलब यह नहीं कि किसी लड़की या लड़के का शोषण इंटरनेट के माध्यम से किया जाए. यह शब्द दो शब्द डिजिट और रेप से बना है. अंग्रेजी के डिजिट का मतलब जहां अंक होता है, वहीं अंग्रेजी शब्दकोश के मुताबिक उंगली, अंगूठा, पैर की उंगली, इन शरीर के अंगों को भी डिजिट से संबोधित किया जाता है. जानकारों के मुताबिक डिजिटल रेप से जुड़ी घटनाओं में महिला के प्राइवेट पार्ट में फिंगर्स का इस्तेमाल किया जाता है. यानी ऐसा यौन उत्पीड़न जो डिजिट से किया गया हो, तब उसे 'डिजिटल रेप' कहा जाता है. इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि किसी महिला के यौन उत्पीड़न के लिए हाथ या पैर की उंगलियों का उपयोग किया गया हो. सीधे तौर पर कहें तो यौन उत्पीड़न के लिए हाथ या पैर की उंगलियों का उपयोग करने की शारीरिक क्रिया. यौन उत्पीड़न के इस पहलू को साल 2013 के आपराधिक कानून संशोधन के माध्यम से बलात्कार की परिभाषा में शामिल किया गया था, जिसने इस अपराध को संशोधित और विस्तारित किया.
साल 2013 के बाद बलात्कार का मतलब अब केवल सहवास तक ही सीमित नहीं है. बल्कि अब एक महिला के मुंह, मूत्रमार्ग, योनि या गुदा में किसी भी हद तक प्रवेश भी रेप की श्रेणी में शामिल है. निर्भया एक्ट का खंड-बी विशेष रूप से कहता है कि किसी भी हद तक प्रवेश, किसी भी वस्तु या शरीर का कोई हिस्सा, जो लिंग नहीं है, वो भी अब बलात्कार की परिभाषा के भीतर है.
आईपीसी की धारा 375
एक व्यक्ति को "बलात्कार" करने का आरोपी कहा जाता है यदि वह-
(ए) एक महिला की योनि, मुंह, मूत्रमार्ग या गुदा में किसी भी हद तक अपने लिंग का प्रवेश करता है या उससे या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है; या
(बी) किसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में किसी भी वस्तु या शरीर का कोई हिस्सा, जो लिंग नहीं है, प्रवेश करता है या उसे अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर करता है; या
(सी) एक महिला के शरीर के किसी भी हिस्से में हेरफेर करता है ताकि ऐसी महिला की योनि, मूत्रमार्ग, गुदा या शरीर के किसी भी हिस्से में प्रवेश हो सके या उससे या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए मजबूर हो; या
(डी) एक महिला की योनि, गुदा, मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या उससे या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है,
निम्नलिखित सात विवरणों में से किसी के अंतर्गत आने वाली परिस्थितियों में:
पहला- उसकी मर्जी के खिलाफ
दूसरा- उसकी मर्जी के बिना
तीसरा- उसकी सहमति से, जब उसकी सहमति उसे या किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसमें वह रुचि रखती है, मृत्यु या चोट के भय में डालकर प्राप्त की गई है.
चौथा- उसकी सहमति से, जब पुरुष जानता है कि वह उसका पति नहीं है और उसकी सहमति दी गई है क्योंकि वह मानती है कि वह एक और पुरुष है जिससे वह है या खुद को कानूनी रूप से विवाहित मानती है.
पांचवां- उसकी सम्मति से जब ऐसी सम्मति देते समय, मानसिक अस्वस्थता या नशे के कारण या उसके द्वारा व्यक्तिगत रूप से या किसी अन्य मूढ़तापूर्ण या हानिकारक पदार्थ के प्रशासन के कारण, वह उस की प्रकृति और परिणामों को समझने में असमर्थ है. जिस पर वह सहमति देती है.
छठा- उसकी सहमति से या उसके बिना, जब वह अठारह वर्ष से कम आयु की हो.
सातवीं- जब वह सहमति संप्रेषित करने में असमर्थ हो.
पॉक्सो एक्ट के प्रावधान
नोएडा से जो डिजिटल रेप का मामला सामने आया है, उसमें आरोपियों के खिलाफ पीड़िता के शरीर में उसकी उंगलियां डालने और 'उसके शरीर में हेरफेर' करने का आरोप लगाया गया है. दरअसल, POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट के तहत भी 'पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट' की इसी तरह की परिभाषा दी गई है.
पॉक्सो (POCSO) की धारा 3 में 'पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट' को ऐसे परिभाषित किया गया है-
एक व्यक्ति को पेनेट्रेटिव सेक्शुअल असॉल्ट करने का आरोपी कहा जाता है यदि-
(ए) वह अपना लिंग, किसी भी हद तक योनि, मुंह, मूत्रमार्ग या बच्चे की गुदा में प्रवेश करता है या बच्चे को अपने या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है; या
(बी) वह किसी भी हद तक, किसी भी वस्तु या शरीर का कोई हिस्सा, जो लिंग नहीं है, बच्चे की योनि, मूत्रमार्ग या गुदा में डालता है या बच्चे को उसके या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहता है; या
(सी) वह बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में हेरफेर करता है ताकि योनि, मूत्रमार्ग, गुदा या बच्चे के शरीर के किसी भी हिस्से में प्रवेश हो सके या बच्चे को उसके या किसी अन्य व्यक्ति के साथ ऐसा करने के लिए कहें; या
(डी) वह बच्चे के लिंग, योनि, गुदा, मूत्रमार्ग पर अपना मुंह लगाता है या बच्चे के साथ ऐसे व्यक्ति या किसी अन्य व्यक्ति से ऐसा करवाता है.
पॉक्सो अधिनियम की धारा 3 के तहत ऐसे मामले में दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को न्यूनतम 7 वर्ष कारावास और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा दिए जाने का प्रावधान है. इसके अलावा, पॉक्सो अधिनियम धारा 5 के तहत 'गंभीर यौन हमले' के लिए न्यूनतम 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की कठोर सजा का प्रावधान है, जिसमें एक बच्चे पर या 12 साल से कम उम्र के बच्चे पर हमले के बार-बार या कई कृत्य शामिल हैं.
पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 के तहत एक बच्चे के निजी अंगों को छूने के कार्य को यौन हमले का अपराध माना जाता है, जिसमें न्यूनतम 3 साल की सजा का प्रावधान है.
क्या था नोएडा का केस?
यूपी के नोएडा में डिजिटल रेप का जो मामला सामने आया है, उसमें आरोप है कि पीड़िता का यौन उत्पीड़न तब शुरू हुआ, जब वह केवल 10 वर्ष की थी और रविवार, 15 मई को आरोपी की गिरफ्तारी तक उसका शोषण जारी था. मामले का आरोपी एक 81 वर्षीय कलाकार है. जिसके खिलाफ नोएडा पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार के मामले में सजा), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 506 (आपराधिक धमकी) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5 और 6 के तहत यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज किया गया है. इस मामले में पीड़िता आरोपी के लिव इन पार्टनर के एक कर्मचारी की बेटी बताई जाती है, जिसे बेहतर शिक्षा के लिए साल 2015 में उस दंपति के साथ रहने के लिए भेजा गया था.