
सिविल सेवा परीक्षा में धोखाधड़ी और ओबीसी-दिव्यांगता कोटे का गलत लाभ उठाने की आरोपी पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की पीठ 15 जनवरी को याचिका पर सुनवाई करेगी.
पूजा खेडकर ने 23 दिसंबर 2024 के दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया गया था. कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला बनता है. व्यवस्था में हेरफेर करने की बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए जांच की जरूरत है.
ऐसे में अग्रिम जमानत से इस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. हाई कोर्ट ने कहा था, "अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है. गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण रद्द किया जाता है." 12 अगस्त, 2024 को जब हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया था, तब पूजा की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी.
कोर्ट ने कहा था कि यूपीएससी सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा है. यह मामला संवैधानिक निकाय के साथ-साथ समाज के साथ धोखाधड़ी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है. पूजा खेडकर पर आरक्षण लाभ प्राप्त करने के लिए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी प्रस्तुत करने का आरोप है.
उन्होंने अपने खिलाफ सभी आरोपों का खंडन किया था. दिल्ली पुलिस के वकील और यूपीएससी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया था. पूजा खेडकर के वकील ने तर्क दिया कि वह जांच में शामिल होने और सहयोग करने के लिए तैयार है. उनके हिरासत की जरूरत नहीं है.
दिल्ली पुलिस ने कहा कि दूसरों की संलिप्तता का पता लगाने के लिए उनसे हिरासत में पूछताछ आवश्यक है. यूपीएससी ने भी उनकी याचिका का विरोध करते हुए कहा कि पूजा ने धोखाधड़ी की है. इसके बारे में गहराई से पता लगाने के लिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करना आवश्यक है.