
पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के संदेशखाली में मंगलवार को लोगों के एक समूह ने चार महिलाओं की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया. उन महिलाओं पर स्थानीय विधायक समेत कई टीएमसी नेताओं के साथ धक्का-मुक्की करने के इल्जाम है.
प्रदर्शनकारियों ने भाजपा से जुड़ी उन चार आरोपी महिलाओं की रिहाई की मांग करते हुए बागडीपारा इलाके में प्रदर्शन किया. इलाके की कुछ महिलाओं ने दावा किया कि उन्होंने हाथों में लाठियां लेकर रात भर जागरण किया. गौरतलब है कि चार महिलाओं की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताते हुए संदेशखाली में लोगों के एक समूह ने सोमवार को बरहमाजूर इलाके में टायरों में आग लगाकर एक सड़क को जाम कर दिया था.
प्रदर्शन में शामिल एक पार्टी के नेताओं की छवि खराब करने के लिए प्रसारित किए गए कथित वीडियो के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया गया. स्थानीय महिलाओं ने यह आरोप भी लगाया कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की है. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गिरफ्तार महिलाओं को सोमवार को एक स्थानीय अदालत ने चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।
रविवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने संदेशखाली में भगवा पार्टी के नेताओं की छवि खराब करने के लिए कथित वीडियो के प्रसार के खिलाफ प्रदर्शन किया और कथित तौर पर क्षेत्र में महिलाओं द्वारा दर्ज यौन शोषण की शिकायतों पर गलत सूचना फैलाने के लिए स्थानीय टीएमसी विधायक सुकुमार महता को घेर लिया था. उन्होंने महिलाओं पर अत्याचार के बारे में गलत सूचना प्रसारित करने में शामिल होने के आरोप में संदेशखाली में एक स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ता की पिटाई भी की.
पीटीआई के मुताबिक, घटना के संबंध में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद पुलिस ने विधायक के साथ मारपीट करने में कथित संलिप्तता के लिए चार महिलाओं को गिरफ्तार किया था.
हाल ही में संदेशखाली से कथित वीडियो की एक श्रृंखला सामने आई थी, जहां टीएमसी नेताओं पर यौन उत्पीड़न और जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया था. इस तरह के पहले क्लिप में संदेशखाली के एक भाजपा नेता को यह कहते हुए सुना गया था कि महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी के इशारे पर मंचित किया गया था, जो पूरी साजिश के पीछे थे.
एक अन्य वीडियो में देखा गया कि महिलाओं के एक वर्ग ने, जिन्होंने पहले बलात्कार की शिकायत दर्ज की थी, दावा किया कि उनसे भाजपा नेताओं द्वारा एक कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और उन्हें पुलिस स्टेशन जाने के लिए मजबूर किया गया.
पहले वीडियो में नजर आ रहे भाजपा नेता को तीसरे क्लिप में यह कहते हुए भी सुना गया कि स्थानीय टीएमसी नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए 70 से अधिक महिलाओं को 2,000 रुपये मिले थे. हालांकि पीटीआई ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं की है.