वहीं उन्होंने दूसरा सुसाइड नोट पटना के बेउर थानाध्यक्ष को संबोधित करते हुए लिखा था. पुलिस को लिखे सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा कि मैं बीते 16 साल से डिप्रेशन से पीड़ित था और काफी इलाज करवाने के बाद भी इससे छुटकारा नहीं पा सका. उन्होंने आगे लिखा कि कॉलोनी के ही संतोष सिन्हा की वजह से उनका अवसाद चरम पर पहुंच गया इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं.
चंद्रा साल 1975 में बतौर दारोगा बिहार पुलिस में भर्ती हुए थे और अपने काम की बदौलत डीएसपी के पद तक पहुंचे थे. उन्होंने खगौल, आलमगंज, मोकामा में भी ड्यूटी की थी और उस दौरान 62 अपराधियों का एनकाउंटर किया था.
बता दें कि चंद्रा ड्यूटी के दौरान दो बार गोली लगने के बाद भी बच गए थे और उन्हें बेहद बहादुर अफसर माना जाता था. वो मुंगेर के हवेली खड़गपुर में तैनात थे और स्पेशल टास्क फोर्स के डीएसपी के तौर पर भी काम किया था. के चंद्रा साल 2012 में नौकरी से रिटायर हुए थे.
के चंद्रा अपने पास हमेशा दो पिस्टल रखा करते थे जिसमें कि एक पुलिस विभाग की वहीं दूसरी उनका निजी लाइसेंस पर ली गई पिस्टल थी. चंद्रा अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और एक बेटी छोड़ गए हैं, उनका बड़ा बेटा मुंबई के एक बैंक में अधिकारी है जबकि दूसरा बेटा पटना हाई कोर्ट में वकील है. वहीं उनकी बेटी की भी शादी हो चुकी है.