
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) यानी सीआरपीसी (CrPC) किसी भी केस में पुलिस को पीड़ित (Victim) और आरोपी (Accused) के संबंध में दिशा निर्देश देती है. पुलिस CrPC के अनुरूप ही कार्रवाई को अंजाम देती है. इस सिलसिले में हम सीआरपीसी की धारा 4 के बारे में आपको बता चुके हैं. अब हम बात करेंगे CrPC की धारा 5 (Section 5) के बारे में.
सीआरपीसी की धारा 5 (CrPC Section 5)
दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 5 (Section 5) कहती है कि इससे प्रतिकूल किसी विनिर्दिष्ट उपबंध के अभाव में इस संहिता की कोई बात तत्समय प्रवृत्त किसी विशेष या स्थानीय विधि पर, या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त किसी विशेष अधिकारिता या शक्ति या उस विधि द्वारा विहित किसी विशेष प्रक्रिया पर प्रभाव नहीं डालेगी।
इसे आम भाषा में कहें तो इस धारा का मतलब ये है कि अगर कहीं कोई स्पेशल लॉ या लोकल लॉ बना हुआ है, तो सीआरपीसी उसे प्रभावित नहीं करेगी. वैसे इस तरह के प्रावधान ज्यादातर एक्ट में होते हैं. सभी में यह दिशा निर्देश होते हैं.
इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 4: जानिए, क्या होती है सीआरपीसी की धारा 4, क्या है प्रावधान?
क्या होती है सीआरपीसी (CrPC)
सीआरपीसी (CRPC) का अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. दंड प्रिक्रिया संहिता यानी CrPC में 37 अध्याय हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं आती हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.
1974 में लागू हुई थी CrPC
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन भी किए गए है.