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CrPC Section 73: किसी भी व्यक्ति को निर्देशित हो सकता है वारंट, ये है प्रावधान

सीआरपीसी (CrPC) की धारा 73 (Section 73) में यह बताया गया है कि वारंट (Warrant) वारंट किसी भी व्यक्ति को निर्देशित (Directed) हो सकेंगे. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 73 इस बारे में क्या कहती है?

वारंट के संबंध में प्रावधान करती है सीआरपीसी की धारा 73 वारंट के संबंध में प्रावधान करती है सीआरपीसी की धारा 73
परवेज़ सागर
  • नई दिल्ली,
  • 28 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 10:38 AM IST
  • किसी भी व्यक्ति को निर्देशित हो सकेंगे वारंट, ये बताती है धारा 73
  • 1974 में लागू की गई थी सीआरपीसी
  • CrPC में कई बार हुए है संशोधन

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) में कोर्ट (Court) और पुलिस प्रशासन (Police administration) के काम करने की प्रक्रिया (Process) और उससे जुड़े प्रावधान मौजूद हैं. इसी तरह से सीआरपीसी (CrPC) की धारा 73 (Section 73) में यह बताया गया है कि वारंट (Warrant) वारंट किसी भी व्यक्ति को निदिष्ट (Directed) हो सकेंगे. आइए जानते हैं कि सीआरपीसी की धारा 73 इस बारे में क्या कहती है?

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सीआरपीसी की धारा 73 (CrPC Section 73)

दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की धारा 73 (Section 73) में अनुसार- 

(1) मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (Chief Judicial Magistrate) या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) किसी निकल भागे सिद्धदोष, उद्घोषित अपराधी या किसी ऐसे व्यक्ति की जो किसी अजमानतीय अपराध (Non-bailable offense) के लिए अभियुक्त (Accused) है और गिरफ्तारी (Arresting) से बच रहा है, गिरफ्तारी करने के लिए वारंट (Warrant) अपनी स्थानीय अधिकारिता (Local jurisdiction) के अंदर के किसी भी व्यक्ति को निदिष्ट कर सकता है.

(2) ऐसा व्यक्ति वारंट की प्राप्ति (Receipt of warrant) को लिखित रूप में अभिस्वीकार (Acknowledgment) करेगा और यदि वह व्यक्ति, जिसकी गिरफ्तारी के लिए वह वारंट जारी किया गया है, उसके भारसाधन के अधीन (Under charge) किसी भूमि या अन्य संपत्ति में है या प्रवेश करता है, तो वह उस वारंट का निष्पादन (Execution of warrant) करेगा.

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(3) जब वह व्यक्ति गिरफ्तार (Arrest) कर लिया जाता है, जिसके विरुद्ध ऐसा वारंट जारी किया गया है, तब वह वारंट सहित निकटतम पुलिस अधिकारी (Nearest police officer) के हवाले कर दिया जाएगा, जो, यदि CrPC की धारा 71 के अधीन प्रतिभूति (Surety) नहीं ली गई है तो, उसे उस मामले में अधिकारिता (Jurisdiction) रखने वाले मजिस्ट्रेट (Magistrate) के समक्ष भिजवाएगा.

इसे भी पढ़ें--- CrPC Section 72: वारंट किसके लिए होगा निर्देशित, ये बताती है सीआरपीसी की धारा 72 

क्या है सीआरपीसी (CrPC)

सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है. जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है. इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है. CrPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं. जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है. सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है.

1974 में लागू हुई थी CrPC

सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था. इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CrPC) देश में लागू हो गई थी. तब से अब तक CrPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है.
 

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