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कोयंबटूर रेप केस पर बोले वायुसेना प्रमुख- पीड़ित महिला अधिकारी का नहीं हुआ टू फिंगर टेस्ट

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि भारतीय वायुसेना का कानून ऐसी किसी भी घटना को लेकर बहुत सख्त है. उन्होंने पीड़ित महिला अधिकारी के टू फिंगर टेस्ट की बात को पूरी तरह से गलत बताया.

एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने हाल ही में वायुसेना प्रमुख का पद संभाला है एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने हाल ही में वायुसेना प्रमुख का पद संभाला है
अभिषेक भल्ला
  • नई दिल्ली,
  • 05 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 9:09 PM IST
  • ट्रेनिंग के दौरान रेप किए जाने का है आरोप
  • महिला अधिकारी ने 19 सितंबर को दर्ज कराई FIR
  • टू फिंगर टेस्ट को लेकर चर्चाओं में आया मामला

भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा है कि कोयंबटूर रेप केस के मामले में पीड़िता का टू फिंगर टेस्ट नहीं किया गया था. हम नियमों से अच्छी तरह वाकिफ हैं. इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी. भारतीय वायुसेना की एक महिला अधिकारी ने अपने सहयोगी पर कोयंबटूर वायुसेना संस्थान में ट्रेनिंग के दौरान उसके साथ रेप करने का आरोप लगाया था, इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया था. 

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एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कहा कि भारतीय वायुसेना का कानून ऐसी किसी भी घटना को लेकर बहुत सख्त है. उन्होंने पीड़ित महिला अधिकारी के टू फिंगर टेस्ट की बात को पूरी तरह से गलत बताया. उन्होंने कहा कि कोई टू फिंगर टेस्ट नहीं किया गया था. हम नियमों से अच्छी तरह वाकिफ हैं.

इस मामले में वायुसेना की पीड़ित महिला अधिकारी ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में कहा कि उसका टू-फिंगर रेप टेस्ट भी कराया गया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित कर दिया है. एफआईआर के अनुसार, चूंकि पीड़िता के दोस्त ने कथित अपराध के बाद वीडियो भी रिकॉर्ड किया था. बाद में पीड़िता ने उस कमरे में कुछ बदलाव की बात कही थी, जिसमें घटना घटी थी. इसी के आधार पर पीड़िता ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ किए जाने को लेकर चिंता जताई थी.

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पीड़ित महिला अधिकारी ने बताया कि उसे लगातार गुमराह किया गया और अप्रत्यक्ष रूप से धमकियां भी दी गई और एफआईआर के फैसले पर फिर से सोचने के लिए मजबूर किया गया. यही वजह थी कि उसने घटना की शिकायत देर से दर्ज कराई. पीड़िता के मुताबिक जब उसके इंसाफ की आस टूट गई तो उसने 19 सितंबर की रात तक ऑनलाइन FIR दर्ज कराने का फैसला किया.

पीड़िता का साफ आरोप है कि डॉक्टरों ने उससे निजी सवाल पूछे और उसका टू-फिंगर टेस्ट किया. टू-फिंगर टेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट बहुत पहले ही बैन लगा चुका है. इस अमानवीय व्यवहार के बाद पीड़ित अधिकारी ने एफआईआर कराने की ठानी और 19 सितंबर की रात को केस दर्ज कराया.

कोयंबटूर पुलिस ने पीड़िता के दोस्त द्वारा मुहैया कराए गए वीडियो को मजिस्ट्रेट के हवाले कर दिया है. वायुसेना की ओर से अदालत में तर्क दिया गया है कि केवल वे ही वायुसेना अधिनियम के तहत आरोपी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अमितेश हरमस्क पर मुकदमा चला सकते हैं. दूसरी ओर, कोयंबटूर पुलिस का कहना है कि जब पीड़िता को भारतीय वायुसेना से कोई सहयोग नहीं मिला, तब पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया था.

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