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किसान आंदोलन: यूपी और दिल्ली पुलिस अधिकारियों के बीच कॉर्डिनेशन मीटिंग, लॉ एंड ऑर्डर पर हुई चर्चा

दिल्ली में 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा ने राजधानी के सुरक्षा चक्र को तोड़ दिया. आंदोलनकारियों ने जमकर अपनी मनमानी की. हालातों पर सुरक्षाबलों ने बड़े ही संयम के साथ नियंत्रण पाया, लेकिन अब अधिकारी किसी प्रकार की चूक नहीं होने देना चाहते हैं, जिसके चलते आज यूपी और दिल्ली के अधिकारियों के बीच कॉर्डिनेशन मीटिंग का आयोजन किया गया. 

डीएम, एसएसपी ने की दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेशन मीटिंग डीएम, एसएसपी ने की दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के साथ कॉर्डिनेशन मीटिंग
अरविंद ओझा
  • नई दिल्ली,
  • 01 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 6:23 PM IST
  • शांति, सुरक्षा के साथ यातायात को लेकर हुई चर्चा 
  • यूपी और दिल्ली के अधिकरियों के बीच बैठक 

किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली में शांति एवं कानून व्यवस्था को लेकर आज कॉर्डिनेशन मीटिंग का आयोजन किया गया. इस मीटिंग में जिलाधिकारी के अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी, दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर आलोक कुमार, एडीशनल कमिश्नर के साथ तमाम अधिकारी मौजूद रहे. शाहदरा बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर पर कॉर्डिनेशन मीटिंग की गई. इस मीटिंग में कानून व्यवस्था के साथ ही सुरक्षा, यातायात व्यवस्था के संबंध में भी चर्चा हुई. 

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बैठक में अधिकारियों ने बल दिया कि किसी भी परिस्थिति के दौरान आपस में कॉर्डिनेशन इस तरह से स्थापित किया जाये, जिससे किसी भी हालात से निपटा जा सके. बैठक में संबंधित क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी के अलावा दिल्ली पुलिस के संबंधित एडिशनल डीसीपी और एसएचओ मौजूद रहे. बता दें कि 26 जनवरी को दिल्ली में निकाली गई ट्रैक्टर परेड के दौरान किसानों और पुलिस के बीच जमकर टकराव हुआ था. किसानों की बड़ी संख्या बॉर्डर से होकर गुजरी, जिसके चलते बॉर्डर पर हालात बिगड़े रहे. 

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बता दें कि 26 जनवरी को किसान आंदोलन उस समय उग्र हुआ, जब दिल्ली में किसानों की ओर से ट्रैक्टर परेड निकाली गई. इस ट्रैक्टर परेड के लिये दिल्ली पुलिस ने शर्तों के साथ अनुमति दी थी, लेकिन आंदोलनकारी अपने रूट से हटकर दूसरे रूट पर जाने की जिद पर अड़ गये. इस दौरान हालात बेकाबू हो गये. कई जगह पुलिस और किसानों के बीच जमकर टकराव हुआ. पुलिस को हालातों पर काबू पाने के लिये कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. वहीं कुछ आंदोलनकारियों ने लाल किले पर पहुंचकर उस जगह अपना धार्मिक झंडा फहरा दिया, जहां 15 अगस्त को देश के प्रधानमंत्री तिरंगा फहराते हैं. 

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