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CRPF को मिलीं 40000 हल्की बुलेटप्रूफ़ जैकेट्स, अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी आतंकियों की स्टील बुलेट

मेक इन इंडिया के तहत सीआरपीएफ ने एसएमपीपी (SMPP) कंपनी से चालीस हजार की संख्या में बुलेट प्रूफ जैकेट लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके मिलने के बाद जम्मू कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाके और नॉर्थ ईस्ट में सीआरपीएफ की ऑपरेशनल क्षमता में इजाफा होगा.

अब आतंकियों की स्टील बुलेट हमारे जवानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी अब आतंकियों की स्टील बुलेट हमारे जवानों का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी
जितेंद्र बहादुर सिंह
  • नई दिल्ली,
  • 23 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 8:41 PM IST

लंबे इंतजार के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीआरपीएफ (CRPF) को 40000 बुलेट प्रूफ जैकेट (Bullet Proof Vest) दे दिए हैं. चरणबद्ध तरीके से सीआरपीएफ को बुलेट प्रूफ जैकेट मिलना शुरू हो गई हैं. पिछले कई सालों से सीआरपीएफ को उच्च स्तरीय मानक BIS-5 और BIS-6 के बुलेट प्रूफ जैकेट की आवश्यकता थी, जो वजन में हल्के हों और जवानों को ड्यूटी के दौरान उसे पहनने में किसी भी तरीके की दिक्कत ना हो. 

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SMPP से खरीदी जा रही हैं बुलेट प्रूफ जैकेट
यही वजह है की मेक इन इंडिया के तहत सीआरपीएफ ने एसएमपीपी (SMPP) कंपनी से चालीस हजार की संख्या में बुलेट प्रूफ जैकेट लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके मिलने के बाद जम्मू कश्मीर, नक्सल प्रभावित इलाके और नॉर्थ ईस्ट में सीआरपीएफ की ऑपरेशनल क्षमता में इजाफा होगा.

बोरान कार्बाईड सिरामिक से हुआ निर्माण
यह बुलेट प्रूफ जैकेट ऐसी होंगी जो अमेरिका के NIJ मानक से काफी सख्त होंगी. सीआरपीएफ को दी जाने वाली इस बुलेट प्रूफ जैकेट की टेस्टिंग नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के लैब में की गई है. इस जैकेट की सबसे खास बात यह है कि यह बोरान कार्बाईड सिरामिक के सख्त रसायनिक पदार्थ से बनी है, जो वजन में बहुत ही हल्का होता है.

भारतीय मानक पर तैयार हुई हैं बुलेट प्रूफ जैकेट
मेक इन इंडिया के तहत सभी बुलेट प्रूफ जैकेट इंडियन स्टैंडर्ड के आधार पर भारत में तैयार की गई हैं. इस बुलेट प्रूफ जैकेट को ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी बीआईएस (BIS) के मानकों अनुसार तैयार किया किया गया है. भारत में इससे पहले बुलेट प्रूफ जैकेट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस (JIS) अमेरिका के स्टैंडर्ड पर तैयार होती थी. जिनमें बुलेट प्रूफ़ जैकेट की क्षमता 1 लेवल से लेकर 4 लेबल तक रहती थी. पर भारत में जिस मानक की बुलेट प्रूफ जैकेट अब तैयार होंगी, उनका स्टैंडर्ड 1 लेवल से लेकर 6 लेवल तक होगा. यानी यह बुलेट प्रूफ जैकेट खतरनाक स्टील बुलेट को भी झेल पाने में सक्षम है.

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आतंकी बरसा रहे थे स्टील बुलेट
जम्मू कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन को अंजाम देने वाले सुरक्षा बल पिछले कुछ सालों में ऐसी घटनाओं का शिकार हुए, जिसमें ये जानकारी आई थी कि आतंकी एके-47 राइफल से स्टील बुलेट सुरक्षाबलों पर बरसा रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा बलों के पास मौजूद बुलेट प्रूफ जैकेट नाकाफी थी और बुलेट प्रूफ जैकेट को भेदकर आतंकियों की गोली सुरक्षा बलों के जवानों को लग रही थीं. 

स्टील बुलेट को झेल पाने में सक्षम है BR जैकेट
CRPF ने अब इसके लिए अपनी खास तैयारी शुरू की है. जानकारी के मुताबिक आने वाले दिनों में कश्मीर घाटी में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रहे सीआरपीएफ के जवान को अब नई बुलेट प्रूफ जैकेट दी जा रही हैं, जिसे आतंकियों के पास मौजूद स्टील बुलेट छेद नहीं पाएंगी. हाल के दिनों में स्टील बुलेट का इस्तेमाल खासतौर पर जैश-ए-मोहम्मद संगठन से जुड़े आतंकी कर रहे थे. 

बहुत ख़ास है ये नई बुलेट प्रूफ जैकेट
नए तरीके से बनाई गई इस बुलेट प्रूफ जैकेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें ऊपर की तरफ बोरान कार्बाइड सिरामिक की प्लेट लगाई गई है जिसे स्ट्राइक शील्ड कहते हैं. अंदर की ओर इसमें अल्ट्रा पॉलीएथिलीन पॉलिमर की प्लेट लगाई गयी है. इसको हार्ड स्टील कोर बुलेट भी नहीं भेद सकती. अगर कोई सैनिक इस बुलेट प्रूफ जैकेट को पहने हुए है और दुश्मन उस पर गोली चलाता है, तो यह जैकेट सैनिक की सुरक्षा करने में सक्षम है. यह बुलेट प्रूफ जैकेट अन्य देशों की जैकेटों की अपेक्षा में हल्की, मजबूत और सख्त हैं.

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सबसे एडवांस तकनीक से बनी है ये बुलेट प्रूफ जैकेट 
सीआरपीएफ के मुताबिक पहले की जैकेट का वजन 12 से 15 किलो तक होता था, जो काफी ज्यादा था. पर अब जैकेट बहुत हल्की और मजबूत क्वालिटी की होंगी. इनका वजन करीब 7 से 9 किलो का होगा. पुरानी जैकेट में लोहे की प्लेट का इस्तेमाल किया जाता था. पर अब दुनिया की सबसे एडवांस बोरान कार्बाइड सिरामिक प्लेट का इस्तेमाल किया जा रहा है. जिसको केवल डायमंड से ही काटा जा सकता है. 

नई जैकेट में है साइड प्रोटेक्शन
जानकारी के मुताबिक, पहले जैकेट को उतारने में काफी दिक्कत होती थी. अब कोई भी जवान इस जैकेट को 10 सेकंड में उतार सकता है और 30 सेकंड में पहन सकता है. पहले जैकेट्स में साइड प्रोटेक्शन नहीं होता था. पर अब जो नई जैकेट सीआरपीएफ को दी गई है. उसमें साइड प्रोटेक्शन होगा. यानी बगल से अगर गोली निकलती है तो जवान के ऊपर किसी भी तरीके का फर्क नहीं पड़ेगा. 

जैकेट के लिए 90 फीसदी सामान भारतीय
सीआरपीएफ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पहले की जैकेट को बनाने का 90% सामान विदेशों से खरीदा जाता था, पर मोदी सरकार के आने के बाद जो जैकेट बन रही है उसका 90% सामान मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनता है और यहीं इस्तेमाल किया जाता है.

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आसान हुए बुलेट प्रूफ जैकेट लेने के नियम
आपको बता दें कि भारत में करीब 20 लाख आर्मी, अर्धसैनिक बल और राज्यों का पुलिस बल है. जिनको विषम परिस्थितियों में बुलेट प्रूफ जैकेट की आवश्यकता पड़ती है. अब भारतीय मानकों के आधार पर बनने वाली बुलेट प्रूफ जैकेट को खरीदने में ज्यादा देरी नहीं होगी. दरअसल, इससे पहले जब बुलेट प्रूफ जैकेट भारत में खरीदनी होती थी तो उसके लिए पहले अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जस्टिस के मानक से अनुशंसा लेनी पड़ती थी. पर अब जबकि भारत में ही बुलेट प्रूफ जैकेट का मानक तैयार हो चुका है, तो बुलेट प्रूफ जैकेट के प्रोक्योरमेंट में कोई देरी नहीं होगी.

 

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