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ऑपरेशन मैडमजी! हनीट्रेप का खेल, पाक सेना का जासूस निकला MES कर्मचारी

इस पूरी कार्रवाई को लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) के विशिष्ट इनपुट के आधार अंजाम दिया गया. फेसबुक पर हनीट्रेप का शिकार बना कर्मचारी लगभग पिछले डेढ़-दो साल से पाकिस्तानी एमआई यूनिट के संपर्क में था. इस काम के लिए महेश कुमार को पैसा भी मिलता था.

महेश को इस काम ले लिए पैसे भी मिलते थे महेश को इस काम ले लिए पैसे भी मिलते थे
कमलजीत संधू
  • रेवाड़ी,
  • 17 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 5:18 PM IST
  • फेसबुक पर हसीना के जाल में फंसा MES कर्मचारी
  • PAK सेना के लोगों को सूचनाएं देता था महेश
  • एमआई के इनपुट पर पकड़ा गया कर्मचारी

हरियाणा पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रेवाड़ी से मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (MES) के एक कर्मचारी महेश कुमार को पाकिस्तानी सेना के लिए जासूसी करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया. ये पूरा मामला हनीट्रैप का है, जिसे फेसबुक पर एक हसीना ने अपने जाल में फंसाया. उसी के माध्यम से आरोपी कर्मचारी पाकिस्तानी मिलिट्री इंटेलिजेंस के संपर्क में आया और भारतीय सेना की सूचनाएं लीक करने लगा.

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इस पूरी कार्रवाई को लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस (एमआई) के विशिष्ट इनपुट के आधार अंजाम दिया गया. फेसबुक पर हनीट्रैप का शिकार बना कर्मचारी लगभग पिछले डेढ़-दो साल से पाकिस्तानी एमआई यूनिट के संपर्क में था. इस काम के लिए महेश कुमार को पैसा भी मिलता था. 

दरअसल, जून के महीने में लखनऊ एमआई को एक इनपुट मिला था कि राजस्थान के जयपुर में तैनात एक मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) के कर्मचारी महेश कुमार के मोबाइल नंबर से पाकिस्तानी एमआई से जुड़ी एक युवा महिला को संवेदनशील सैन्य जानकारी साझा की जा रही है. सब काम पैसे के लिए किया जा रहा था. लखनऊ एमआई को पता चला कि महेश कुमार उस पाकिस्तानी हसीना को 'मैडमजी' कहकर संबोधित करता है.

इसके बाद संदिग्ध की पहचान करने और इनपुट की पुष्टि करने के लिए एमआई यूनिट ने 'ऑपरेशन मैडमजी' लॉन्च किया था. जांच में पता चला कि 28 वर्षीय महेश कुमार रेवाड़ी का रहने वाला है. वह एमईएस जयपुर (राजस्थान) में एक सफाई कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था. वो कम से कम तीन पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआईओ) के संपर्क में था, जो फेसबुक अकाउंट चलाते हैं.

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जब एमआई ने इस मामले का खुलासा किया तो पता चला कि महेश कुमार को अपने पाक हैंडलर्स से कम से कम 5000 रुपये के दो भुगतान प्राप्त हुए थे. ये दोनों भुगतान केरल में किसी संपर्क के माध्यम से कराए गए थे.

सितंबर के पहले सप्ताह में महेश कुमार हरियाणा के रेवाड़ी में अपने घर रहने के लिए आया था. एमआई यूनिट ने बिना समय गंवाए इस मामले को एसटीएफ हरियाणा के साथ साझा किया और दोनों एजेंसियों की एक संयुक्त टीम ने इस पर काम शुरू कर दिया. 13/14 सितंबर की रात महेश कुमार को पकड़ने और पूछताछ के लिए एक तेज ऑपरेशन की योजना बनाई गई. 

लेकिन इससे पहले कि लखनऊ एमआई अपना ऑपरेशन पूरा करती और अपनी टीम को रेवाड़ी भेजती, अचानक महेश कुमार हरियाणा से बाहर चला गया. इसके बाद एसटीएफ हरियाणा को इनपुट मिला कि महेश कुमार के बुधवार को फिर से रेवाड़ी आने की संभावना है. इसलिए गुरुवार या शुक्रवार को संयुक्त रूप से एक नई योजना पर काम शुरू किया गया. इसके बाद जयपुर एमआई यूनिट भी जांच में शामिल किया गया.

बुधवार को महेश कुमार रेवाड़ी पहुंच गया. मगर एसटीएफ की टीम को पता चला कि दोपहर तक वह हरियाणा छोड़ने वाला है. इसलिए बिना देर किए एसटीएफ की टीम ने बुधवार की दोपहर उसे रेवाड़ी से मोबाइल डिवाइस के साथ गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के बाद उससे एमआई लखनऊ, एसटीएफ हरियाणा और एमआई जयपुर की टीमों ने संयुक्त रूप से पूछताछ की.

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पूछताछ के दौरान महेश कुमार ने बताया कि जुलाई 2018 में 'हरलीन गिल' के नामक पीआईओ के फेसबुक अकाउंट पर उसी ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी. इसके बाद वे दोनों फेसबुक फ्रेंड बन गए. दोनों फेसबुक मैसेंजर पर टेक्स्ट और ऑडियो / वीडियो चैट करने लगे. वो फेसबुक अकाउंट एक युवा महिला चलाती थी. जो जालंधर में प्रधान लेखा नियंत्रक (PCDA) कार्यालय में काम करने का दावा करती थी. हालांकि बाद में PIO का फेसबुक अकाउंट 'हरलीन गिल' के नाम से निष्क्रिय हो गया.

बाद में, महेश कुमार को वर्ष 2019 में 'हरमन कौर' के नाम से उसी PIO की फ्रेंड-रिक्वेस्ट मिली. उसने फेसबुक मैसेंजर पर फिर से बातचीत शुरू कर दी और फिर मामला व्हाट्सएप तक पहुंच गया. जांच में पता चला कि महेश कुमार PIO के कम से कम दो व्हाट्सएप नंबरों के संपर्क में था. वे व्हाट्सएप पर चैट के अलावा ऑडियो-वीडियो मैसेज और चैट भी करते थे.

महेश कुमार ने पूछताछ में कबूल किया है कि उसने जयपुर स्थित आर्मी ब्रिगेड के ORBAT (ऑर्डर ऑफ बैटल, फील्ड फार्मिंग) , जयपुर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों का विवरण, PCDA जयपुर का स्थान, MES शिकायत रिकॉर्ड का विवरण और COVID-19 से जुड़ी जानकारी दुश्मनों के साथ साझा की थी. 
यही नहीं, महेश ने छावनी और एमईएस कर्मचारियों के पोस्टिंग ऑर्डर, विभिन्न उद्देश्यों के लिए जयपुर एमईएस कार्यालय में आने वाले सेवा कर्मियों के साथ बातचीत करके कई अहम जानकारियां जमा की थी. महेश ने 2019 में वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) साझा करके पीआईओ के लिए एक व्हाट्सएप नंबर भी सक्रिय कराया था. हालांकि उसका दावा है कि उसने वो नंबर कुछ दिनों बाद ही वापस ले लिया था.

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पीआईओ ने महेश कुमार को जयपुर और बीकानेर में सेवारतकर्मियों के संपर्क सूत्र भेजने, बाहर जाने वाली इकाइयों के विवरण, जयपुर में कोटे की स्थिति, जयपुर छावनी में कोविड-19 से संबंधित अन्य कर्मचारियों का विवरण भेजने के लिए कहा था. उसे अधिक लुभाने के लिए पीआईओ हसीना ने एक बार महेश कुमार को दिल्ली भेज देने का आश्वासन भी दिया था. 

महेश कुमार ने अपने पंजाब नेशनल बैंक खाते के विवरण को पीआईओ के साथ साझा किया था. सितंबर 2019 और जनवरी 2020 में उपहार के रूप में उसके बैंक खाते में 5000 रुपये आए थे. हालांकि इस बात का शक है कि इसके अलावा भी उसे कोई मौकों पर पैसे मिले थे.

 

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