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ट्रेनी डॉक्टर से दरिंदगी, अस्पताल पर हमला और रेप-मर्डर की उलझी पहेली... CBI तलाश रही है इन सवालों के जवाब

इस मामले को सीबीआई के हवाले किए जाने से पहले कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय नाम के मुल्ज़िम को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन अब ये सवाल सामने आया है कि संजय रॉय करीब महीने भर से वारदात का शिकार बनीं डॉक्टर का पीछा कर रहा था.

इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है
aajtak.in
  • कोलकाता,
  • 17 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

Kolkata Junior Doctor Murder Rape Case: क्या आरजी कर रेप और मर्डर केस का आरोपी संजय रॉय वारदात की शिकार डॉक्टर का महीने भर से पीछा कर रहा था? क्या इस मामले में कोई और भी है जो संजय रॉय के साथ इस भयानक गुनाह में शामिल है? केस के सबूत मिटाए जाने की बातों के बीच सीबीआई को फिलहाल इन सवालों के जवाब की तलाश है. क्योंकि उसे लगता है कि इन सवालों की तह तक पहुंचे बगैर इस सनसनीखेज और खौफनाक मामले की तफ्तीश पूरी नहीं हो सकती.

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CBI के सामने बड़े सवाल?
क्या ट्रेनी डॉक्टर के साथ रेप और कत्ल का आरोपी संजय रॉय करीब महीने भर से डॉक्टर का पीछा कर रहा था? 
क्या उसने इस वारदात को अंजाम देने के लिए पूरी तैयारी की थी और मौका देख कर 8 अगस्त को ही उसने हमला कर दिया? 
क्या इस वारदात में संजय के साथ और भी लोग ट्रेनी डॉक्टर के रेप और उसके कत्ल में शामिल थे? 

कई दिनों से डॉक्टर का पीछा कर रहा था संजय?
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई रेप और मर्डर के मामले में सीबीआई की जांच इन्हीं सवालों के इर्द-गिर्द घूम रही है. हालांकि इस मामले को सीबीआई के हवाले किए जाने से पहले कोलकाता पुलिस ने संजय रॉय नाम के मुल्ज़िम को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन अब ये सवाल सामने आया है कि संजय रॉय करीब महीने भर से वारदात का शिकार बनीं डॉक्टर का पीछा कर रहा था. 

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वारदात में शामिल हो सकते हैं और भी लोग
ऐसे में सीबीआई आरजी कर मेडिकल कॉलेज से लेकर आस-पास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल कर देख रही है, ताकि ये पता चल सके कि क्या वाकई संजय रॉय उस डॉक्टर का पीछा करता था या नहीं? इसके अलावा एक सवाल अब भी जस का तस है कि इस वारदात को संजय ने अकेले अंजाम दिया या फिर उसके साथ कोई और भी था? सीबीआई को इस सवाल का जवाब भी जानना है. 

फॉरेंसिक जांच में मिले सबूत
असल में पीड़ित डॉक्टर की लाश से फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को आशंका है कि इस वारदात में एक से ज्यादा लोग हो सकते हैं. इसके अलावा रेप के दौरान उस ट्रेनी डॉक्टर पर जिस तरह जुल्म ढाया गया और उसके शरीर को जितना नोचा खसोटा गया, वो भी किसी एक आदमी का काम नहीं लगता. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर इस वारदात में कोई और भी शामिल है तो वो कौन है.

चार डॉक्टरों से पूछताछ
इस बीच सीबीआई ने गुरुवार को चार डॉक्टरों से पूछताछ की. इनमें चेस्ट मेडिसीन डिपार्टमेंट के एचओ डॉ. अरुणाभ दत्ता चौधरी, अस्पताल के पूर्व अधिकारी डॉ. संजय वशिष्ठ और फॉरेंसिक मेडिसीन की डॉ. पॉली समद्दार शामिल हैं. जाहिर है सीबीआई इस मामले के हरेक पहलू को खंगाल कर देखना चाहती थी. सवाल अस्पताल प्रशासन पर भी है और पुलिस पर भी. 

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बढ़ता ही जा रहा है जांच का दायरा
सवाल ये है कि अगर मामला कत्ल का था, तो अस्पताल की ओर से घरवालों को इसे सुसाइड का मामला क्यों बताया गया? जबकि अस्पताल में डॉक्टर का क़त्ल हो गया और पुलिस ने इस मामले की जांच अनैचुरल डेथ मान कर शुरू की, ऐसा क्यों? सवाल ये भी है कि क्या वारदात के बाद जानबूझ कर इस मामले में सबूत मिटाने की कोशिश हुई? ज़ाहिर है सीबीआई की तफ्तीश का दायरा फिलहाल बढ़ता ही जा रहा है.

प्राइवेट पार्ट में गहरे जख्म
आपको बता दें कि अखिल भारतीय सरकारी डॉक्टर संघ के अतिरिक्त महासचिव डॉ. सुवर्ण गोस्वामी ने इस वारदात का शिकार बनी ट्रेनी डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि ये केस रेप का नहीं बल्कि गैंग रेप का है. उनके मुताबिक, रिपोर्ट में साफ-साफ लिखा है कि जूनियर डाक्टर के प्राइवेट पार्ट पर कई जख्म मिले हैं. 

रेप या गैंगरेप?
डॉ. सुवर्ण गोस्वामी के हिसाब से प्राइवेट पार्ट से ज्यादा लिक्विड का पाया जाना इस बात का सबूत है कि जूनियर डाक्टर के साथ एक से ज्यादा लोगों ने रेप किया है. यानी मामला गैंगरेप का है. उन्होंने बताया कि औसतन एक शख्स का जो सीमंस होता है पांच ग्राम के आसपास होता है. हालंकि मामला रेप का है या गैंगरेप का इसकी तसदीक तभी हो सकती है जब डीएनए रिपोर्ट आएगी. डीएनए के जरिए ही ये पता चलेगा जूनियर डाक्टर के प्राइवेट पार्ट से मिले सीमंस किसी एक के हैं या एक से ज्यादा लोगों के.

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सबूतों को मिटाने की साजिश
डॉ. सुवर्ण गोस्वामी ने जूनियर डाक्टर के शरीर पर मिले जख्मों का भी हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह और जिस फोर्स के साथ जूनियर डाक्टर पर हमला किया गया वो भी किसी एक अकेले का काम नहीं लगता. इस बीच केस सीबीआई को सौंपे जाने के बाद अब आंदोलन कर रहे डाक्टरों ने ये इलजाम लगाया है कि कोलकाता पुलिस ने जरूरी सबूतों को मिटाने की साजिश रची थी. उनका इलजाम है कि अस्पताल की जिस तीसरी मंजिल के सेमिनार हॉल में जूनियर डाक्टर को मारा गया उस फ्लोर तक को पुलिस ने सील नहीं किया. बल्कि उसी फ्लोर और उसी सेमिनार हॉल के बराबर में तोड़-फोड़ और मरम्मत का काम शुरू कर दिया.

पुलिस ने सील नहीं किया था मौका-ए-वारदात 
आरजी कर अस्पताल की तीसरी मंजिल पर वो सेमिनार हॉल है, जहां नौ अगस्त की सुबह चेस्ट डिपार्टमेंट की ट्रेनी जूनियर डॉक्टर की लाश मिली थी. जो तस्वीरें सामने आईं हैं, उनसे साफ होता है कि कोलकाता पुलिस ने उस सेमिनार हॉल को सील तक नहीं किया. जबकि ऐसे केस में ये बेहद जरूरी होता है. सेमिनार हॉल में गद्दे, टेबल, बेंच, मशीन के साथ-साथ लकड़ी और प्लास्टिक की लाल कुर्सियां भी उन तस्वीरों में देखी जा सकती हैं. 

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हाई कोर्ट का फरमान
उधर, कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने केस अपने हाथ लेकर तफ्तीश शुरू कर दी है. आरोपी संजय रॉय को कोलकाता पुलिस ने कस्टडी से निकाल कर सीबीआई को सौंप दिया है. यही नहीं, इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को इस मामले में कड़ी फटकार लगाई है. साथ ही अदालत ने आरजी कर अस्पताल को फिलहाल बंद कर दिए जाने का फरमान भी सुनाया है.  

(कोलकाता से सूर्याग्नि रॉय के साथ राजेश साहा का इनपुट)

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