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सुशांत सिंह राजपूत केसः 14 जून की कहानी, मुंबई पुलिस की जुबानी

इस मामले की जांच का सारा दारोमदार 14 जून की कहानी पर है. ये कहानी हू-ब-हू सामने आ गई तो समझ लीजिए कि सच सामने आ गया. हालांकि मुंबई पुलिस ने 14 जून की कहानी पहले ही लिख रखी थी. अब सीबीआई मुंबई पुलिस की उस कहानी की हर लाइन को फिर से परखेगी.

सीबीआई की एसआईटी इस मामले की जांच के लिए मुंबई में है सीबीआई की एसआईटी इस मामले की जांच के लिए मुंबई में है
aajtak.in/परवेज़ सागर
  • मुंबई,
  • 21 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 8:33 PM IST
  • मुंबई में इस केस की जांच कर रही है सीबीआई
  • गुरुवार की रात मुंबई पहुंची थी सीबीआई टीम
  • एसआईटी टीम ने दर्ज किए हैं कई बयान

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का मामला अब सीबीआई के हवाले है. देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक एसआईटी बनाई है. जिसमें तेजतर्रार और काबिल अफसरों को शामिल किया गया है. अब इस मामले की जांच का सारा दारोमदार 14 जून की कहानी पर है. ये कहानी हू-ब-हू सामने आ गई तो समझ लीजिए कि सच सामने आ गया. हालांकि मुंबई पुलिस ने 14 जून की कहानी पहले ही लिख रखी थी. अब सीबीआई मुंबई पुलिस की उस कहानी की हर लाइन को फिर से परखेगी. आइए जानते हैं कि आखिर मुंबई पुलिस के हवाले से 14 जून की कहानी क्या है.

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सीबीआई की एसआईटी अपनी जांच के दौरान मुंबई पुलिस की उस जांच रिपोर्ट को भी क्रॉस चेक करेगी, जिसमें 14 जून की घटना का पूरा जिक्र किया गया है. सुशांत के कमरे से लेकर बेड और पंखे के बीच का फासला, मौत के वक्त सुशांत के पहने कपड़े और सुशांत के शरीर पर जख्म जैसी सारी चीजों की सीबीआई फिर से जांच करेगी.

इससे पहले मुंबई पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में 14 जून की जो कहानी सुनाई है, वो ये है-

अंदर से बंद था कमरे का दरवाज़ा

घर के जिस कमरे में सुशांत सिंह राजपूत की मौत हुई, उस कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था. इस बात के गवाह सुशांत के घर में मौजूद उनके तीनों मुलाजिम और दोस्त हैं. दरवाजे और ताले की तकनीकी जांच में पाया गया कि दरवाजे के लॉक या दरवाजे के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है. दरवाजा अंदर से ही बंद था.

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सुशांत और पंखे के बीच एक इंच का फासला

जिस कमरे में सुशांत की मौत हुई, उस कमरे में लगे सीलिंग फैन मोटर और कमरे में मौजूद बेड के बीच का कुल फासला 5 फीट 11 इंच था. जबकि सुशांत की हाइट 5 फीट 10 इंच थी. यानी बेड पर खड़े होने के बाद सुशांत और पंखे के बीच सिर्फ 1 इंच का फर्क रह जाता है. जब कमरे का दरवाजा खुला तो सुशांत की लाश बेड के दूसरी तरफ यानी बेड के किनारे हवा में झूल रही थी. यानी सुशांत की लाश न तो बेड पर थी और ना ही उसके पैर बेड की तरफ थे. बेड के दूसरी तरफ जहां सुशांत की लाश झूल रही थी, वहां से पंखे की दूरी और ऊंचाई 8 फीट 1 इंच थी.

पुलिस के मुताबिक पंखे और बेड के बीच जितनी ऊंचाई थी, उस ऊंचाई पर सुशांत अपने दोनों हाथ उठा कर आसानी से पंखे पर गांठ बना सकते थे. चूंकि बेड और पंखे के बीच का फासला और सुशांत की हाइट दोनों में महज एक इंच का फर्क था. इसीलिए फंदा गले में डालने के बाद सुशांत बेड की दूसरी तरफ दोनों पैर फेंक कर हवा में झूल गया. पुलिस के मुताबिक मौका-ए-वारदात से जो तस्वीरें ली गई हैं और एक्सपर्ट्स ने कमरे का जो मुआयना किया है, उसमें साफ है कि सीलिंग फैन बेड के बीचों बीच नहीं लगा हुआ था. इसीलिए पंखे के नीचे बेड के दूसरी तरफ काफी गैप था.

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शरीर पर नहीं थे चोट के निशान

सुशांत सिंह राजपूत के जिस्म पर चोट का एक भी निशान नहीं मिला है. ना ही किसी तरह की खरोंच के निशान मिले हैं. अगर कमरे में हाथापाई हुई होती, तो ऐसे निशान जरूर मिलते. सुशांत के दोनों हाथों की ऊंगलियों के सारे नाखून भी बिल्कुल साफ मिले. अगर कोई झगड़ा या हाथपाई हुई होती. तो नाखून अपने अंदर कुछ सबूत जरूर छुपा लेते.

सही सलामत थे सुशांत के कपड़े

मौत के वक्त सुशांत सिंह राजपूत ने शॉर्ट और टी-शर्ट पहनी हुई थी. कपड़ों की बारीकी से जांच करने के बाद सामने आया है कि उन कपड़ों पर भी किसी तरह के कोई निशान या ऐसी चीजें नहीं थी, जिनसे पता चलता कि आखिरी वक्त में सुशांत की किसी से हाथापाई हुई थी. लिहाजा मौका-ए-वारदात का सीन सुसाइड की तरफ इशारा करता है. मगर सवाल वही है कि सुशांत ने आत्महत्या क्यों और किसकी वजह से की.

 

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