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Nirbhaya rape murder case: ऐसे सज़ा को टालने की कोशिश करते रहे निर्भया के गुनहगार

निर्भया कांड के दोषियों को सजा दिए जाने में थोड़ी देर भले हो रही है. मगर उन्हें अंजाम तक पहुंचना ही है. लिहाज़ा शम्मा बुझने से पहले जी भर के फड़फड़ा लेना चाहती है. मौत टल जाए इसके लिए दोषी अक्षय, विनय, पवन और मुकेश हर मुमकिन हथकंडे अपना रहे हैं.

पूरे देश को निर्भयाकांड के दोषी 4 दरिंदों की फांसी का इंतजार है पूरे देश को निर्भयाकांड के दोषी 4 दरिंदों की फांसी का इंतजार है
aajtak.in/परवेज़ सागर
  • नई दिल्ली,
  • 23 जनवरी 2020,
  • अपडेटेड 3:39 PM IST

  • सजा-ए-मौत से बचने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं दोषी
  • एक बाद एक नई याचिकाएं अदालत में दाखिल की
  • 1 फरवरी 2020 की सुबह 6 बजे होनी हैं फांसी
  • नया ब्लैक वॉरंट हो चुका है जारी

निर्भया कांड के चारों दोषी बारी-बारी से हर लाइफ लाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिससे साफ है कि वो कानून की कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं. और ये बात अदालत भी जानती है. मगर मजबूरी ये है कि उन्हें उनके कानूनी अधिकार से कोई कानून भी रोक नहीं सकता. पर क्या अदालत चारों को अपनी-अपनी लाइफ लाइन इस्तेमाल करने के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं कर सकती है?

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थोड़ी देर भले हो रही है. मगर इस अंजाम तक इन्हें पहुंचना ही है. लिहाज़ा शम्मा बुझने से पहले जी भर के फड़फड़ा लेना चाहती है. मौत टल जाए इसके लिए जो भी मुमकिन हथकंडे हैं उन्हें अक्षय, विनय, पवन और मुकेश अपना रहे हैं. इन हथकंडों को कब कहां और कैसे इस्तेमाल करना है. इसके पीछे जाहिर है इनके वकील का दिमाग काम कर रहा है. दरअसल, कानूनी दायरे में रहते हुए भी इन दोषियों के कई मौलिक अधिकार हैं, जो इनकी सांसों को अभी मोहलत दे सकते हैं. अगर ये चारों उन मौलिक अधिकारों को एक साथ इस्तेमाल कर लेते तो शायद अब तक इनका किस्सा ही खत्म हो चुका होता. लिहाज़ा बेहद सधी प्लानिंग के तहत ये एक एक कर अपनी फांसी को टालने की कोशिशों में लगे हुए हैं.

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दरअसल, दिल्ली जेल मैनुअल 2018 कहता है कि अगर जुर्म एक है, सज़ा एक है तो दोषियों को फांसी अलग-अलग नहीं हो सकती है. बस यही वो एक कमजोर कड़ी है, जिसका ये भरपूर फायदा उठा रहे हैं. ये सब इन्होंने कैसे किया इसे समझने के लिए आपको निर्भया केस और उसके मामले की क्रोनोलॉजी को समझना होगा.

16 दिसंबर 2012

पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया से दिल्ली में एक चलती बस के अंदर गैंगरेप की वारदात को बेरहमी के साथ अंजाम दिया गया. घटना के बाद एक-एक कर आरोपी पकड़े गए. इस मामले में बस ड्राइवर राम सिंह, उसका भाई मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और एक नाबालिग को आरोपी बनाया गया.

17 जनवरी 2013

मामला पुलिस की जांच के बाद अदालत में जा पहुंचा. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 5 आरोपियों के खिलाफ मामले की कार्रवाई शुरू की. छठा आरोपी चूंकि नाबालिग था लिहाज़ा उसका मामला अलग से जूविनायल कोर्ट में चला गया.

10 सितंबर 2013

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने महज़ 9 महीने में केस की सुनवाई को पूरा किया और निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले मुकेश, विनय, अक्षय और पवन को दोषी करार दे दिया. पांचवे आरोपी राम सिंह पर ये मामला खत्म हो गया क्योंकि मार्च 2013 में उसने तिहाड़ जेल की एक सेल में खुद को फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी.

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1 नवंबर 2013

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मामले को सुनवाई पूरी हो जाने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट को रैफर कर दिया. जिसका नतीजा ये हुआ कि 1 नवंबर 2013 से हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई डेली बेसिस यानी रोज़ाना शुरु हो गई.

13 मार्च 2014

हाईकोर्ट में मामला चलता रहा. दिल दहला देने वाले निर्भया कांड के ठीक 15 महीने बाद हाईकोर्ट ने भी निर्भया के चारों गुनहगारों मुकेश, विनय, अक्षय और पवन को सजा-ए-मौत यानी फांसी की सज़ा सुनाई. इस फैसले से चारों दरिंदों के होश फाख्ता हो गए.

2 जून 2014

हाईकोर्ट से सजा-ए-मौत पाने के बाद निर्भया के गुनहगारों में शामिल विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर ने फांसी की सज़ा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की.

14 जुलाई 2014

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए दोषी विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर को फांसी की सज़ा दिए जाने पर स्टे दे दिया. इस तरह से उन दोनों को राहत मिल गई. लेकिन मामला अभी थमा नहीं था.

20 दिसंबर 2015

पूरे देश को गुस्से से भर देने वाले निर्भयाकांड के पूरे तीन साल बाद निर्भया के गैंगरेप में शामिल नाबालिग को बाल सुधार गृह से रिहाई मिल गई. यानी वो इस मामले से बच निकला. सरकार ने उसकी सुरक्षा का इंतजाम किया और उसे दिल्ली से दूर कहीं किसी दूसरी जगह जाने के लिए कहा गया.

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3 अप्रैल 2016

दोनों पक्षों की ओर से सुप्रीम कोर्ट को याचिकाएं मिली. जिसमें दो दोषियों को राहत देने वाले स्टे के खिलाफ चुनौती की याचिका भी शामिल थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस एक बार फिर मामले की सुनवाई शुरू की.

5 मई 2016

हालांकि इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और पवन गुप्ता की मौत की सज़ा पर रोक लगा दी. निर्भया पक्ष की और से इस बात का विरोध किया गया. मामले की सुनवाई अभी भी जारी थी.

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5 मई 2017

सुनवाई चलते हुए पूरे एक साल का वक्त बीत चुका था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया केस को रेयरेस्ट और रेयर केस मानते हुए फांसी की सज़ा बरकरार रखी. देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस वारदात को गम की सुनामी बताया था.

6 नवंबर 2017

निर्भया कांड के चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिव्यू पीटिशन यानी पुनर्विचार याचिका दायर की. इस पर सुनवाई शुरू होने से पहले ही दो दोषी इसी तरह की कार्रवाई में जुट गए.

15 दिसंबर 2017

गुनहगार मुकेश सिंह की रिव्यू पीटिशन यानी पुनर्विचार याचिका की देखा देखी दो और दोषियों ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर रिव्यू पीटिशन दायर कर दी. जिस पर सुनवाई शुरू हो गई थी.

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9 जुलाई 2018

सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की रिव्यू पीटिशन पर सुनवाई कर रही थी. सुनवाई करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों को कोई राहत नहीं दी. नतीजा ये हुआ कि दोषी मुकेश सिंह, विनय और पवन की याचिका खारिज कर दी गई.

13 दिसंबर 2018

इसी दौरान वक्त बीतता रहा. एक दिन इस दर्दनाक वारदात का शिकार बनी निर्भया के माता-पिता दोषियों की फांसी पर जल्दी सुनवाई के लिए पटियाला हाउस कोर्ट जा पहुंचे. उन्होंने दोषियों को सजा दिए जाने में हो रही देरी पर अफसोस जाहिर किया. कोर्ट ने कार्रवाई शुरू कर की.

29 अक्टूबर 2019

इसके करीब सालभर बाद तिहाड़ जेल ने निर्भया के दोषियों को मर्सी पेटिशन यानी दया याचिका दायर करने के लिए 7 दिन का समय दिया और उसके बाद ब्लैक वॉरेंट जारी कराने के लिए कोर्ट के पास जाने की बात कही. एक बार फिर मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया.

8 नवंबर 2019

अब निर्भया को गुनहगारों को समझ आ चुका था कि उनका अंतिम समय पास आ रहा है. वो बच नहीं पाएंगे लिहाजा निर्भया कांड के दोषी विनय शर्मा ने दिल्ली सरकार को दया याचिका दे दी.

10 दिसंबर 2019

दोषी विनय शर्मा के बाद चौथे दोषी अक्षय ठाकुर ने भी ढाई साल बाद अदालत में पुर्नयाचिका दायर की. उसने अदालत से उसे छोड़ देने की गुज़ारिश की और दलील देते हुए कहा कि यूं भी प्रदूषित हवा और पानी की वजह से वो मर रहा है.

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18 दिसंबर 2019

इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस जघन्य कांड के दोषी अक्षय ठाकुर की पुर्नयाचिका भी खारिज कर दी. इसके बाद तिहाड़ जेल ने दोषियों को फिर से दया याचिका दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया.

7 जनवरी 2020

पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वॉरेंट यानी मौत का वो फरमान जारी कर दिया, जिसके बिना तिहाड़ जेल दोषियों को फांसी पर नहीं लटका सकता. इस डेथ वॉरेंट में चारों गुनहगारों को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे फांसी पर लटकाने के आदेश दिए गए. इसके खिलाफ कोर्ट में दलील दी गई की मुकेश सिंह और विनय शर्मा के पास अभी क्यूरेटिव पीटिशन दायर करने का अधिकार बाकी है.

9 जनवरी 2020

इसके बाद निर्भया कांड के आरोपी दरिंदे मुकेश सिंह और विनय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पीटिशन दायर कर दी. जिसकी वजह से सजा का मामला फिर लटक गया. 22 जनवरी को फांसी नहीं हो सकती थी.

17 जनवरी 2020

सजा पर सुनवाई करने वाली दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के लिए नया डेथ वारंट जारी किया. और डेथ वारंट में फांसी की अगली तारीख दी गई 1 फरवरी सुबह 6 बजे. दरअसल, तिहाड़ जेल प्रशासन ने इस मामले में दिल्ली सरकार को खत लिखकर फांसी की नई तारीख मांगी थी.

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20 जनवरी 2020

इसी बीच सुप्रीम कोर्ट में दोषी पवन ने एक याचिका दायर की. जिसमें उसने दावा किया कि जुर्म के वक्त वह नाबालिग था. लेकिन अदालत ने उसकी यह याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई नया आधार नहीं है.

कुल मिलाकर फांसी की नई तारीख के मुताबिक अगले महीने यानी फरवरी की पहली तारीख निर्भया के गुनहगारों की ज़िंदगी की आखिरी तारीख होनी चाहिए. मगर कानूनी दाव पेंच के जानकार मानते हैं कि अभी इसकी उम्मीद ना के बराबर है.

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