
ये जुर्म की एक अनोखी कहानी है. इसकी शुरुआत एक एक्सीडेंट से होती है. अपने घर के पास बैठे एक शख्स को एक मिनी ट्रक भयानक टक्कर मार देता है. पीड़ित की दोनों टांगें टूट जाती हैं. फिर एक्सीडेंट का शिकार होने वाले शख्स पर दोषी ड्राइवर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाने लगता है. पीड़ित दबाव के आगे झुकने से इनकार कर देता. इस इनकार के बदले एक्सीडेंट के ठीक 71 दिन बाद इस कहानी में एक भयानक मोड़ आता है.
खुंदक से भरा दोषी ड्राइवर पीड़ित शख्स के घर में घुस कर उसे बिल्कुल करीब से गोली मार देता है. यानी पीड़ित की हत्या हो जाती है, लेकिन कातिल ड्राइवर मौके से पकड़ा जाता है. ऊपर लिखी ये पूरी कहानी एक ओपन एंड शट केस है. यानी एक ऐसा जुर्म, जो सबकी आंखों के सामने हुआ. सबने सब कुछ होता हुआ देखा, गवाही दी और खून से रंगे हाथ के साथ गुनहगार मौके से ही पकड़ा गया. लेकिन वो कहते हैं ना कि जो दिखता है, हमेशा वही सच नहीं होता.
कई बार सच्चाई उससे आगे भी होती है, लेकिन नजर नहीं आती. ये मामला कुछ ऐसा ही है. अब ढाई साल बाद इस केस में एक ऐसा ट्विस्ट आया है, जिसने इस केस से जुड़े लोगों के साथ खुद उन पुलिसवालों को भी हैरत में डाल दिया है, जिन्होंने इस केस की तफ्तीश की, गुनहगार को गिरफ्तार किया और उसे जेल भिजवाया. क्योंकि पुलिस जिसे अब तक इस केस का कातिल समझ रही थी, असल में वो इस कत्ल का सिर्फ एक मोहरा भर था.
उसे सिर्फ कत्ल की सुपारी दी गई थी. ये कत्ल की एक ऐसी साज़िश थी, जिसे दो हिस्सों में बांटा गया. प्लान ए और प्लान बी. यानी एक प्लान के फेल होने पर दूसरे प्लान पर शिफ्ट हो जाना यानी उसे अमल में लाना. लेकिन एक ओपन एंड शट केस के पीछे छिपी इस मिस्ट्री का खुलासा आखिर कैसे हुआ? तो जवाब है, मौका ए वारदात यानी हरियाणा के पानीपत से 8621 किलोमीटर दूर ऑस्ट्रेलिया से आए एक व्हाट्स एप मैसेज की वजह से.
आखिर क्या था वो प्लान ए और प्लान बी? कौन था असली कातिल? ऑस्ट्रेलिया से मैसेज भेजने वाले की पहचान क्या थी? मैसेज में ऐसा क्या लिखा था? और आखिर इस केस में ऐसा क्या है, जिसने लोगों को हैरत में डाल दिया? तो आइए, इस कहानी को समझने के लिए करीब ढा़ई साल पीछे चलते हैं. इस साज़िश की शुरुआत प्लान ए से होती है. 5 अक्टूबर 2021. शाम का वक्त था. हरियाणा के पानीपत के सुखदेव नगर इलाके में कंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाने वाला विनोद बराड़ा अपनी कॉलोनी के गेट के पास बैठा था. लेकिन बदकिस्मती से वो घर के पास बैठे-बैठे ही एक हादसे का शिकार हो गया.
एक तेज़ रफ्तार मिनी ट्रक ने उसे ज़ोरदार टक्कर मार दी. ये टक्कर इतनी भयानक थी कि विनोद की दोनों टांगें टूट गई. उसे अस्पताल में एक लंबा वक़्त गुजारना पड़ा. इस बीच पुलिस ने उस ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया, जिसने विनोद को टक्कर मारी थी. ये पंजाब के बठिंडा का रहने वाला देव सुनार उर्फ दीपक नाम का एक शख्स था. लेकिन इस वारदात के ठीक 15 दिन बाद ट्रक ड्राइवर दीपक अचानक एक रोज़ पानीपत में विनोद के घर आ पहुंचा.
उसने विनोद से इस मामले में समझौता कर लेने की गुजारिश करते हुए केस वापस लेने के लिए कहने लगा. लेकिन इसे विनोद का गुस्सा कहें या फिर कुछ और उसने केस वापस लेने से मना कर दिया. लेकिन विनोद का यही इनकार उसकी ज़िंदगी पर भारी पड़ जाएगा ये किसी ने सोचा नहीं था. उसके समझौते से इनकार करने के ठीक 56 दिन बाद यानी 15 दिसंबर को एक भयानक वारदात हुई. आरोपी ड्राइवर अचानक फिर से उसके घर आ धमका.
इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, दीपक ने घर में एंट्री करते ही सीधे अंदर से दरवाज़े की कुंडी लगा ली. इस बार उसके हाथ में पिस्तौल था. घर में घुस आए इस शख्स को देख कर विनोद की पत्नी और बच्चे शोर मचाने लगे. पड़ोसी भी आ पहुंचे. दरवाज़ा बंद था, इसलिए वो फौरन कोई मदद नहीं कर सके और ड्राइवर दीपक ने विनोद के सिर और कमर में बिल्कुल करीब से गोली मार दी. इस हमले से विनोद की मौके पर ही जान चली गई.
एक ओपन एंड शट केस ऐसे मर्डर मिस्ट्री में तब्दील हो गया
ये वारदात सबकी आंखों के सामने हुआ था, कातिल के पास भागने का कोई रास्ता नहीं था. लोगों ने उसे दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया. अब पुलिस दीपक को एक बार फिर गिरफ्तार कर चुकी थी. उस पर दो अलग-अलग केस दर्ज हो चुके थे. एक्सीडेंट कर जाने की कोशिश का केस यानी आईपीसी की धारा 307 का मुकदमा, जबकि इस बार किए गए क़त्ल का केस यानी आईपीसी की धारा 302 का मुकदमा. ये मामला बिल्कुल ओपन एंड शट केस था.
इसमें कोई भी रहस्य जैसी बात नहीं थी. क़ातिल पकड़े जाने के बाद अपना जुर्म कबूल चुका था. उसका कहना था कि चूंकि विनोद ने एक्सीडेंट के मामले में उससे समझौते से इनकार कर दिया, इसलिए उसने उसकी हत्या कर दी. इस बात को अब करीब ढाई साल गुज़र चुके थे. वक़्त का दरिया बहता-बहता दूर निकल चुका था. लेकिन इतने ही दिनों के बाद यानी अब से महज़ कुछ रोज़ पहले पानीपत के एसपी अजीत सिंह शेखावत के मोबाइल में ऑस्ट्रेलिया से मैसेज आया.
ऑस्ट्रेलिया से आए व्हाट्सऐप मैसेज ने केस को पलट दिया
मैसेज करने वाले ने विनोद मर्डर केस का जिक्र करते हुए लिखा कि उस केस का गुनहगार अकेला वो ड्राइवर दीपक ही नहीं है, बल्कि उसकी केस की साज़िश में विनोद के कुछ बेहद करीबी लोग यानी घरवाले ही शामिल हैं, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए. कहते हैं समझदार को इशारा काफी होता है. पुलिस ने इस मामले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी. सीआईए थ्री की टीम ने आरोपी दीपक के बारे में जानकारी जुटाने के साथ उसके कॉल डिटेल निकलवाई.
इसमें पता चला कि बठिंडा का रहने वाला ड्राइवर दीपक हरियाणा के ही गोहाना के रहने वाले सुमित नाम के किसी शख्स से लगातार बात करता है. अब सुमित भी पुलिस की रडार में आ चुका था. पुलिस ने बड़ी खामोशी से उसके बारे में जानकारी जुटाने की शुरुआत कर दी. इस कोशिश में पुलिस को एक ऐसी बात पता चली, जिसने उसका दिमाग़ घुमा दिया. सुमित नाम के इस शख्स की मारे गए कारोबारी विनोद बराड़ा की पत्नी निधि से काफी बातचीत होती थी.
निधि के बॉयफ्रेंड सुमित ने किया चौंका देने वाला खुलासा
सुमित और निधि के बीच लंबी बातचीत हुआ करती थी. पुलिस ने विनोद के क़त्ल के सिलसिले में सुमित को हिरासत में ले लिया. उसने कत्ल के ढाई साल बाद ना सिर्फ क़त्ल में अपना हाथ होने की बात कबूल कर ली, बल्कि ये खुलासा कर हर किसी को चौंका दिया कि ये क़त्ल उसने खुद विनोद की पत्नी निधि के कहने पर करवाया था. यानी साज़िश में विनोद की पत्नी निधि भी शामिल थी. लेकिन आखिर निधि ने अपने ही पति विनोद का कत्ल क्यों करा दिया?
वो भी तब जब पति-पत्नी में किसी तरह का कोई विवाद नहीं था. सवाल ये भी था कि आखिर सुमित और निधि एक दूसरे को कैसे जानते थे? सवाल ये भी था कि अगर इस क़त्ल के पीछे सुमित और निधि ही शामिल थे, तो फिर ट्रक ड्राइवर ने अकेले विनोद का क़त्ल करने का दोष अपने सिर पर क्यों ले लिया? तो इस सवालों के पीछे साज़िश का प्लान 'बी' था. ढाई साल बाद ही सही, कत्ल एक ओपन एंड शट केस अब एक पेचीदा मर्डर मिस्ट्री में तब्दील हो चुका था.
कत्ल की असली मास्टरमाइंड थी निधि, सुमित ने दिया साथ
कत्ल का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि खुद मकतूल की बीवी थी. लेकिन सवाल ये था कि कंप्यूटर इंस्टीट्यूट चलाने वाले एक शख्स का क़त्ल खुद उसी की बीवी ने क्यों करवा दिया? कैसे वो अब तक शक दायरे में आने से बची रही? दरअसल निधि साल 2021 में एक जिम में फिटनेस ट्रेनिंग के लिए जाया करती थी. उसी जिम में गोहाना का रहने वाला सुमित ट्रेनर के तौर पर काम करता था. वहां सुमित और निधि में दोस्ती हुई और फिर दोनों नजदीक आ गए.
अब जाहिर है निधि शादीशुदा थी, तो जब उसके पति विनोद को अपनी बीवी के इस अफेयर के बारे में पता चला तो वो इसका विरोध करने लगा. उसकी निधि से सुमित को लेकर कई बार कहासुनी भी हुई. बस इसी के बाद निधि ने अपने पति विनोद को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया और नए नए ब्वॉयफ्रेंड सुमित के साथ मिलकर उसके कत्ल की साज़िश रच डाली. सुमित ने अपने किसी जानकार के ज़रिए ट्रक ड्राइवर दीपक से बात की.
प्लान 'ए' नाकाम हुआ तो 'बी' पर काम करने लगे 'कातिल'
तय ये हुआ कि दीपक ट्रक से कुचल कर विनोद की हत्या कर देगा और कहीं ये कोशिश नाकाम हो गई तो फिर प्लान बी पर काम होगा. प्लान ए के मुताबिक सुमित और निधि ने दीपक को 10 लाख रुपए की सुपारी दी और फिर उनके ईशारे पर दीपक ने पहले विनोद को ट्रक से कुचल कर मारने की कोशिश की और जब इस काम में वो नाकाम रहा, तो कुछ दिन बाद उसने समझौते के बहाने विनोद के घर धावा बोला और आखिरकार गोली मार कर उसकी जान ले ली.
यानी प्लान बी कामयाब हो गया और विनोद की हत्या हो गई. निधि ने अपने उसी पति यानी विनोद के रुपए से उसकी सुपारी दी, जिस पति का उसने कत्ल करवाया. यहां तक कि आगे भी जेल में रहने तक उसके और उसके परिवार की देखभाल करने का जिम्मा निधि और सुमित ने ही उठा रखा था. किसी को इसकी खबर ही नहीं थी. वो तो जब ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले विनोद के एक भाई को अपनी भाभी की इस करतूत के बारे में खुफिया खबर मिली, तो उसने चुपचाप इसके बारे में पानीपत पुलिस व्हाट्सऐप के जरिए शिकायत की और जब दोबारा इस केस की तफ्तीश हुई, तो असली कहानी सामने आ गई.