
Punjab Drugs Case 2021: पूर्व कैबिनेट मंत्री और अकाली दल (Akali Dal) के वरिष्ठ नेता बिक्रम मजीठिया (Bikram Majithia) सोमवार को 2013 एनडीपीएस मामले में एडीजीपी लखविंदर सिंह चिन्ना की अध्यक्षता वाली पंजाब पुलिस एसआईटी के सामने पेश हुए. जहां उनसे करीब सात घंटे तक पूछताछ की गई. पूछताछ दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई और शाम 7 बजे तक चली.
मजीठिया के समर्थकों ने उनसे की जा रही पूछताछ को राजनीति से प्रेरित होने का आरोप लगाया और पंजाब की आप सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. बिक्रम सिंह मजीठिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि एसआईटी प्रमुख इस महीने सेवानिवृत्त हो जाएंगे और उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान को खुद एसआईटी का नेतृत्व करने की चुनौती देते हुए कहा कि वह 'आमने-सामने पूछताछ' के लिए तैयार हैं.
मजीठिया ने कहा, "यह शहीदों का सप्ताह है. केवल शेरों को ही पिंजरे में डाला जा सकता है. अगर मुझे गिरफ्तार किया जाता है, तो मुझे डर नहीं है." अकाली दल नेता ने कहा कि अगर पुलिस के पास उनके खिलाफ कोई सबूत है तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा "इस केस को दो साल पूरे होने जा रहे हैं. अगर कुछ नहीं था तो मुझे दोबारा क्यों बुलाया गया. दरअसल, मैंने भगवंत मान के खिलाफ बोला है इसलिए मुझे बुलाया गया है. मैं किसी से नहीं डरता."
अकाली दल नेता मजीठिया ने कहा कि मुख्यमंत्री उन्हें कमजोर नेता न समझें क्योंकि वह हर चीज का सामना करने के लिए तैयार हैं. मजीठिया ने कहा, "आप पूरी ताकत लगा सकते हैं लेकिन एजेंसियों और पुलिस का दुरुपयोग करके मुझे दबाना आसान नहीं होगा."
आपको बता दें कि बिक्रम मजीठिया को दिसंबर 2021 में दर्ज की गई एफआईआर नंबर 2 में नामजद किया गया था. यह मुकदमा कांग्रेस शासन के दौरान स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन, जांच ब्यूरो, मोहाली में एनडीपीएस एक्ट के प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया था.
मजीठिया के अलावा, तीन और लोगों का नाम भी एफआईआर में शामिल है, जिनमें अमरिंदर सिंह छेना उर्फ लाडी छेना, सतप्रीत सिंह सत्ता और परमिंदर सिंह पिंडी शामिल हैं. पुलिस ने अभी तक तीन अन्य आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया है, जो कनाडाई नागरिक हैं.
जमानत पर बाहर हैं बिक्रम मजीठिया
बिक्रम मजीठिया को 24 फरवरी, 2022 को गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद वो 5 महीने से अधिक समय तक पटियाला जेल में बंद थे. उन्हें 10 अगस्त, 2022 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की पीठ ने जमानत दे दी थी. तभी से वो बाहर हैं. उस खंडपीठ में न्यायमूर्ति एम.एस. रामचन्द्र राव और न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर शामिल थे.
बिक्रम मजीठिया की जमानत मंजूर करते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि वह उन अपराधों के लिए दोषी नहीं हैं, जैसा कि एफआईआर में आरोप लगाया गया है. खंडपीठ ने मजीता की जमानत अर्जी पर फैसला करते हुए कहा, "हम इस बात से संतुष्ट हैं कि यह मानने के लिए उचित आधार मौजूद हैं कि याचिकाकर्ता अपने खिलाफ स्वीकृत अपराधों के लिए दोषी नहीं है. जमानत पर रहते हुए उसके ऐसे अपराध करने की संभावना नहीं है."
अदालत ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा था कि मजीठिया के खिलाफ मामले में प्रतिबंधित सामग्री की बरामदगी का कोई रिकॉर्ड नहीं है. पीठ ने 26 पेज के आदेश में कहा, "सभी वसूली विशिष्ट व्यक्तियों से की गई है और याचिकाकर्ता की रिकॉर्ड में कोई भूमिका नहीं है. प्रक्षेपण, परिवहन या भंडारण दिखाने वाली कोई सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं रखी गई है."
इससे पहले एसआईटी ने मामले में अकाली दल टकसाली के नेता अमरपाल सिंह बोनी अजनाला को भी तलब किया था. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने मजीठिया के खिलाफ कुछ सबूत एसआईटी को सौंपे हैं.