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जल, जमीन और आसमान... प्रयागराज में महाकुंभ की सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर देंगे हैरान

दुनिया का सबसे बड़ा मेला सज चुका है. ये वो मेला है जिसमें 140 करोड़ भारतियों में से लगभग 45 करोड़ हिस्सा लेने जा रहे हैं. लगभग डेढ़ महीने के इस मेले का नाम है महाकुंभ. वो महाकुंभ जो 12 साल बाद आता है. अब जहां डेढ़ महीने में करीब एक तिहाई भारतीय यानि 45 करोड़ हिंदुस्तानी एक ही शहर की सरजमीन पर होंगे.

 कुंभ की सुरक्षा के लिए 75 हजार जवान तैनात किए गए हैं कुंभ की सुरक्षा के लिए 75 हजार जवान तैनात किए गए हैं
कुमार अभिषेक/संजय शर्मा
  • प्रयागराज,
  • 14 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 4:52 PM IST

Maha Kumbh 2025: बस आंखें बंद कीजिए और सोचिए... एक छोटा सा शहर, जिसकी अपनी आबादी ही सिर्फ 70 लाख है, वहां लगभग 45 दिनों में 40 से 45 करोड़ लोग पहुंचने वाले हैं. 40 से 45 करोड़ इंसानों का मतलब समझ रहे हैं ना आप. बस यूं समझ लीजिए इंसानी सैलाब. अब इतनी बड़ी भीड़ की सुरक्षा सिर्फ यूपी क्या दुनिया के किसी भी देश के लिए किसी जंग की तैयारी जैसी है. प्रयागराज में महाकुंभ का मेला सज चुका है और इस मेले की हिफाजत के लिए सुरक्षा के जो इंतज़ाम किए गए हैं, उसे अगर एक शब्द में बयान किया जाए तो वो शब्द होगा- अभूतपूर्व.

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कुंभ के लिए प्रयागराज आएंगे 45 करोड़ लोग
दुनिया का सबसे बड़ा मेला सज चुका है. ये वो मेला है जिसमें 140 करोड़ भारतियों में से लगभग 45 करोड़ हिस्सा लेने जा रहे हैं. लगभग डेढ़ महीने के इस मेले का नाम है महाकुंभ. वो महाकुंभ जो 12 साल बाद आता है. अब जहां डेढ़ महीने में करीब एक तिहाई भारतीय यानि 45 करोड़ हिंदुस्तानी एक ही शहर की सरजमीन पर होंगे. तो सुरक्षा भी तो अभूतपूर्व ही होगी. जमीन से आसमान तक, संगम से तट तक, शहर से गलियों तक, नाव से गाड़ियों तक. पानी के ऊपर से पानी के नीचे तक. रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, गाड़ियां, रेलगाड़ियां शायद ही ऐसी कोई चीज हो जो सुरक्षा एजेंसियों की पैनी निगाहों से बच या छुप जाए.

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
70 लाख की आबादी वाले प्रयागराज में अगले डेढ़ महीने में लगभग 45 करोड़ लोग आने वाले हैं यानि औसतन एक दिन में एक करोड़ लोग संगम पहुंचेंगे. इन 45 करोड़ लोगों की सुरक्षा करीब 75 हजार सुरक्षाकर्मियों के हाथों में होगी. इनमें यूपी पुलिस के अलावा तमाम सेंट्रल एजेंसियां और पैरामिलिट्री फोर्सेज़ शामिल हैं.

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ये हैं सुरक्षा इंतजाम
75,000 सुरक्षा कर्मी, 70 जिलों की 50 हजार पुलिस, यूपी होमगार्ड्स, पीएसी, एटीएस, 2700 सीसीटीवी कैमरे, NSG के 100 कमांडो, एंटी टेरर स्कॉड (ATS), स्पेशल टास्क फोर्स (STF), नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), 4,300 फायर सेफ्टी यूनिट, 56 थाने, 155 चौकी, 10 पिंक बूथ, 3 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, 400 महिला पुलिसकर्मी, 30 स्पाटर्स (गुप्तचर) की टीम, 123 वॉच टावर, फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर, आसमान और पानी वाले ड्रोन, डिजिटल वॉरियर्स.

प्रयागराज जाने के लिए 7 रास्ते
महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में दाखिल होने के 7 रास्ते हैं. संगम पहुंचने के लिए आपको इन्हीं सात रास्तों से गुजरना होगा. पहला जौनपुर, दूसरा वाराणसी, तीसरा मिर्जापुर, चौथा रीवा, पांचवा कानपुर-फतेहपुर, छठा लखनऊ-रायबरेली और आखिरी रास्ता सुल्तानपुर-प्रतापगढ़ से होते हुए प्रयागराज को जाता है. यानि अगर आप संगम आते हैं तो इन्हीं में से किसी एक रूट से आपका सामना होगा. 

सात सुरक्षा घेरों से घिरे हैं घाट
घाट पर पहुंचने और गंगा में डुबकी लगाने के लिए आपको सुरक्षा के सात घेरों से होकर गुजरना होगा. सबसे पहले किसी भी एंट्री प्वॉइंट से अंदर आने के लिए इंटर स्टेट चेकिंग से गुजरना होगा जो एक जिले से दूसरे जिले में जाने पर होती है. मेला क्षेत्र को 6 जोन में बांटा गया है. और दूसरी चेकिंग इन्हीं जोन लेवल पर की जाएगी. तीसरी बार कमिश्नरेट लेवल पर श्रद्धालुओं की तलाशी ली जाएगी. जो आउटर कॉर्डन पर मौजूद होंगी. चौथी सिक्योरिटी कुंभ मेला क्षेत्र में दाखिल होते ही की जाएगी. जिसकी तीन लेयर होंगी. यानि कुल मिलाकर 7 सुरक्षा घेरे हैं. घाट तक पहुंचते-पहुंचते आपको सात बड़े सुरक्षा घेरों से होकर गुजरना जरूरी होगा.

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ब्लैक कैट कमांडो की तैनाती
ये युद्ध स्तर पर महाकुंभ को सुरक्षित बनाने की बस झलक भर है. सुपरटेक, सुपरएक्टिव और सुपरफास्ट एनएसजी कंमाडोंज यानि नेशनल सिक्योरिटी गार्ड्स भारत की एलीट सिक्योरिटी फोर्स है, जिन्हें ब्लैक कैट कमांडो भी कहा जाता है. इन्हें पीएम, सीएम और वीआईपी की सुरक्षा में देखा जाता है. इनका काम आतंकवाद से लड़ने और स्पेशल सिक्योरिटी मिशन का है. लेकिन ब्लैक कंमाडों की एक टुकड़ी का मिशन महाकुंभ को सुरक्षित बनाना है. ज़मीन से लेकर आसमान और पानी से लेकर संगम तक का चप्पा-चप्पा इन्होंने नाप लिया है. दुश्मन को भेदने का निशाना ऐसा कि चूकेगा नहीं. पूरे मेला क्षेत्र में 100 ब्लैक कंमाडों तैनात हैं. बाज की तरह इनका निशाना किसी भी दुश्मन को सेकंड में ढेर कर देगा.

मेले की सुरक्षा में घुड़सवार पुलिस
अगर मेले में आपको कहीं घोड़े नज़र आ जाएं तो इन्हें हल्के में मत लीजिए. ये कोई मामूली घोड़े नहीं बल्कि बेहद खास घोड़े हैं, जिनके ज़िम्मे भी मेले की सुरक्षा है. पूरे मेला क्षेत्र में ऐसे कुल 130 घोड़ों की ड्यूटी लगाई गई है. इन घोडो़ं की गर्दन में चिप लगी है. जिसमें घोड़े की सारी जानकारी है. 165 घुड़सवार इनकी सवारी करके मेले की सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे. इन घोड़ों पर बैठकर पुलिस वाले करीब से निगरानी करेंगे. इन घोड़ों को खास अमेरिका से मंगवाया गया है. इनमें से हरेक घोड़े की कीमत लगभग सात साख रुपये है.

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3000 CCTV कैमरों से मेले की निगरानी
40 वर्ग किलोमीटर में महाकुंभ का महामेला सजा हुआ है. लेकिन क्या सड़क, चौक-चौराहा, गली-नुक्कड़, गाड़ियां, पैदल रास्ता, एंट्री गेट, पार्क, बाजार, मेला और क्या संगम घाट. संगम का एक-एक इंच यूपी पुलिस और सीसीटीवी की नजरों में कैद हैं. जो नजर महाकुंभ को देख रही है. सीसीटीवी कंट्रोल रूम से पूरे मेला क्षेत्र में लगे तकरीबन 3000 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी हो रही है. एक-एक स्पॉट पर पुलिस की नजर है और इन नजरों से बचना नामुमकिन.

हेल्पलाइन नंबर 1920
सिर्फ सीसीटीवी कैमरे ही नहीं बल्कि ड्रोन से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है. पुलिस की लंबी-चौड़ी टीम ड्रोन को आसमान में उड़ा कर 40 वर्ग किलोमीटर के एक-एक इंच पर नजर रख रही हैं. इसी कंट्रोल और कमांड सेंटर में एक और यूनिट है, जो महाकुंभ में आने वाले लोगों की हर परेशानी सुनेगी. 1920. इसी नंबर पर फोन करना है और किसी भी तरह की परेशानी को सुनने के लिए ये भारी-भरकम टीम आप ही के लिए तैयार बैठी है. 1920 कुंभ में आपके साथी का ही नंबर है.

डूबने से बचाएंगे NDRF के जवान
NDRF यानि नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स किसी भी आपदा का सामना करने में माहिर है. संगम में डुबकी लगाते वक्त, नहाते वक्त, पूजा-पाठ करते वक्त कोई फिसल जाए, डूब जाए, कोई नाव पलट जाए तो NDRF के ये जवान इतने कुशल है कि सेकंड में आपको डूबने से बचा लेंगे. ना सिर्फ रौशनी में बल्कि रात के अंधेरे में भी ये किसी को डूबने से बचा सकते हैं. कोई दुश्मन अगर पानी के रास्ते आए तो भी ये पूरी तरह तैयार हैं. ये टेक्नोलॉजी से लैस हैं. 

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पहली बार अंडरवॉटर ड्रोन का इस्तेमाल
इसके अलावा पानी में सुरक्षा का घेरा भी एडवांस्ड है. पहली बार अंडरवॉटर ड्रोन कुंभ में इस्तेमाल किया जाएगा. जल पुलिस के पास 300 नाव और कुशल गोताखोर हैं जो पल में किसी की जान बचा सकते हैं. रेस्क्यू बोट्स, एल्यूमिनियम बोट्स, पेट्रोलिंग के लिेए FRP बोट्स भी अंडर वॉटर सर्विलांस के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं, जो 100 मीटर गहराई तक पानी के अंदर देख सकती हैं. और सोनार सिस्टम किसी को भी पानी के अंदर पिन पॉइंट करने में सक्षम है. यहां तैनात डीप डाइवर आपको डूबने नहीं देंगे. इन सबको कंट्रोल करने के लिए 3 जल पुलिस स्टेशन और 18 जल पुलिस कंट्रोल रूम बनाए गए हैं.

रेलवे ने चलाई 3000 मेला स्पेशल ट्रेन
45 करोड़ भक्त हवाई जहाज, ट्रेन, बस, गाड़ी, स्कूटर, बाइक और पैदल ही आस्था की डुबकी लगाने पहुंचेंगे. इतनी बड़ी तादाद में पहुंचने वालें श्रद्धालुओँ के लिए लगभग साढ़े अठारह सौ हेक्टेयर में पार्किंग बनाई गई है. पूरे कुंभ मेला क्षेत्र में 104 पार्किंग बनाई गई है. एक दिन में 10 हजार से 1 लाख और डेढ़ महीने में 25 लाख गाड़ियां आ सकती हैं. 70 फीसदी से ज्यादा पार्किग घाट से 5 किलोमीटर के दायरे में ही है. घाट के करीब पार्किंग में 5 लाख से ज्यादा गाड़ियां खड़ी की जा सकती हैं. इसके अलावा कुछ जगहों पर अतिरिक्त पार्किंग की व्यवस्था है. 83 फीसदी लोग सड़क मार्ग और 15 फीसदी ट्रेन से महाकुंभ में पहुंच रहे हैं. रूटीन ट्रेन के अलावा 3000 मेला स्पेशल ट्रेन चल रही हैं जो 13000 चक्कर लगाएंगी.

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किसी भी हाल के लिए तैयार है RPF 
RPF यानि रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स की तैयारी भी पूरी है. चाहे कोई हादसा हो या कोई हमला. कोई आगजनी हो या किसी भी तरह की कोई मेडिकल एमरजेंसी. ये फोर्स हर मुश्किल घड़ी के लिए पूरी तरह तैयार हैं. भारी भीड़ अगर बेकाबू हुई तो भी इंतजाम पूरे हैं. चौक-चौराहों और मेला क्षेत्र में इसकी रिहर्सल पहले से हो चुकी है. ऐतिहासिक भीड़ को काबू करने के लिए तैयारी भी पूरी है. कैसे भीड़ को कंट्रोल करना है. कैसे ट्रैफिक को डायवर्ट करना है. कहां बैरिकेट करना है. इनके पास सारे इंतजाम हैं.

खोजी कुत्तों या यंत्रों की तैनाती
एक सुरक्षा दस्ता पैदल मार्च कर एक- एक कदम को स्कैन कर रहा है. चाहे वो खोजी कुत्तों के साथ हो या टेक्नोलॉजी से लैस लेंस की मदद से. सुरक्षा में चूक ना रह जाए इसके लिए ये दस्ता एक एक इंच नाप रहा है. अगर सीसीटीवी और ड्रोन से की नज़रों से कुछ बच जाए तो उसे इन खोजी कुत्तों या यंत्रों से ढूंढ लेंगे. कोई भी लावारिस वस्तु, संदिग्ध बैग, ब्रीफकेस, डब्बा या कुछ भी इनकी नजरें हर कोने इंच-इंच पर होंगी.

मेले में बनाए गए 123 वॉच टावर 
मेले की सुरक्षा के लिए 123 वॉच टावर भी बनाए गए है. वॉच टावरों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि दूरबीन से मेले के बड़े हिस्से को देखा जा सके. ज़रा भी कुछ गड़बड़ लगे स्नाइपर्स दूर से ही निशाना लगा सकते हैं. वो इस काम के लिए मुस्तैद होंगे. साथ ही महाकुंभ पर मेडिकल इमेरजेंसी की भी महा तैयारी है. अस्पताल से लेकर एंबुलेंस और एयर एंबुलेस तक के इंतजाम किए गए हैं.

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महाकुंभ भी हुआ डिजिटल
पहली बार महाकुंभ डिजिटल भी होगा. डिजिटल तकनीक के जरिए भी मेले की सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं. इस मेले को ध्यान में रखते हुए खासतौर पर खास ऐप बनाए गए हैं. इस ऐप की मदद से श्रद्धालुओं को शाही स्नान से लेकर प्रयागराज में एंट्री और ठहरने की जगह की भी पूरी जानकारी मिल सकेगी. महाकुंभ में जाने वालों के लिए खास तौर पर चार क्यूआर कोड भी डिजाइन किए गए हैं.

बेहद खास है ये महाकुंभ
ये महाकुंभ बेहद खास है. वजह ये है कि ऐसा महाकुंभ 144 साल बाद आया है. यूं तो महाकुंभ हर 12 साल में आता है. लेकिन इस बार के महाकुंभ का जो संयोग बना है वो 144 साल बाद बना है. यानि इस संयोग के साक्षी बनने वाले 144 साल पहले बने थे. बस यही वजह है कि इस बार के महाकुंभ का हर कोई हिस्सा बनना चाहता है और बस इसीलिए इस महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की तादाद पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ने जा रही है. तो मेला सज चुका है. 13 जनवरी से महाकुंभ की शानदार शुरुआत हो चुकी है. अगले डेढ़ महीने तक प्रयागराज पर सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नजर होगी.

(साथ में मनीषा झा) 

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