Advertisement

हरियाणा में चुनाव और सरकार का फैसला... आखिर गुरमीत राम रहीम को हर बार कैसे मिल जाती है पैरोल या फरलो?

अब सवाल ये है कि देश की जेलों में बड़े बड़े तोप और पहुंच वाले कैदी भी बंद हैं. तो फिर गुरमीत राम रहीम के ऊपर ही पैरोल और फरलो की ये कृपा क्यों? तो याद रखिये गुरमीत का बलात्कारी और कातिल चेहरा सामने आने से पहले एक चेहरा वो भी था जिसे बाबा नाम दिया गया था और उस बाबा के चरणों और दरबार में बड़े बड़े धुरंधर माथा टेकने और हाजरी लगाने आते थे.

रेपिस्ट और कातिल गुरमीत राम रहीम को हर बार पैरोल मिल जाती है रेपिस्ट और कातिल गुरमीत राम रहीम को हर बार पैरोल मिल जाती है
आजतक ब्यूरो
  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 7:23 PM IST

Gurmeet Ram Rahim Singh out on furlough: सचमुच, जेल न हो गई सराय खाना हो गया. कानून न हुआ तमाशा हो गया. सजा न हुई किश्तों की दिहाड़ी हो गई. कौन कहता है कानून सबके लिए बराबर होता है. छोटा, बड़ा, अमीर गरीब, कमजोर ताकतवर में फर्क नहीं करता. एक अकेले शख्स ने सारे मुहावरों को झूठा साबित कर दिया. उसने ये भी साबित कर दिया है कि भले ही कोई रेप करे, किसी का कत्ल करे. 20-20 साल की दो-दो उम्र कैद की सजा झेले, तो भी जेल के बाहर आजाद रहा जा सकता है. वो पैरोल और फरलो के नाम पर आजादी के मजे ले रहा है. हम बात कर रहे हैं रेपिस्ट-कातिल बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा की.

Advertisement

21 दिनों तक मनाया था बर्थ डे 
अपने देश में शायद कोई ससुराल भी इतनी जल्दी नहीं आता जाता होगा. पर इस बंदे ने सचमुच ससुराल वाली जेल की कहावत को बार-बार सच किया है. अभी पिछले 13 अगस्त को ही 21 दिनों की छुट्टी मनाने एक जमाने का रॉक स्टार बाबा जो लव चार्जर भी था, जेल यानी ससुराल से बाहर आया. 21 दिनों तक धूम धाम से अपना बर्थ डे मनाया. आजादी के सारे मजे लूटे. फिर 3 सितंबर को अगली बार बाहर आने के लिए वापस जेल पहुंच गया. 

3 हफ्ते के अंदर-अंदर फिर मिली फरलो 
इस बार अंदर मन नहीं लग रहा था. इसलिए जेल में बैठे-बैठे फिर से छुट्टी की अर्जी लगा दी. कमाल तो जेल के बाहर बैठा कानून है, जो बस रॉक स्टार की छुट्टी की अर्जी का लिफाफा देख कर ही छुट्टी मंजूर कर लेता है. अंदर का मजमून पढ़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती. जी हां, महज 3 हफ्ते के अंदर-अंदर एक बार फिर से लव चार्जर चार्ज होने ससुराल से बाहर आ रहे हैं. अब तो इत्तेफाक पर भी शक होने लगा है. पर इत्तेफाक ये है कि हरियाणा में फिर से चुनाव है.

Advertisement

नहीं मिलेगा राम गुरमीत राम रहीम जैसा कैदी
NCRB यानी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े के मुताबिक इस वक्त पूरे देश में लगभग छह लाख कैदी अलग अलग जेलों में बंद हैं. इन छह लाख में से लगभग पौने दो लाख ऐसे कैदी हैं जो सजायाफ्ता हैं यानी जिनके गुनाहों का हिसाब हो चुका है और उन्हें सजा सुनाई जा चुकी है. दावा है कि पूरे देश की जेलों में घूम आइये, और बस एक ऐसा कैदी दिखा दीजिए जो पिछले सात सालों में 255 दिन से ज्यादा पैरोल और फरलो के नाम पर जेल से बाहर भेजा गया हो. शर्तिया गुरमीत राम रहीम सिंह इंसा के अलावा दूसरा नाम ढूंढ़ने से आपको नहीं मिलेगा.

बड़े बड़े धुरंधर टेकते हैं माथा, लगाते हैं हाजरी
अब सवाल ये है कि देश की जेलों में बड़े बड़े तोप और पहुंच वाले कैदी भी बंद हैं. तो फिर गुरमीत राम रहीम के ऊपर ही पैरोल और फरलो की ये कृपा क्यों? तो याद रखिये गुरमीत का बलात्कारी और कातिल चेहरा सामने आने से पहले एक चेहरा वो भी था जिसे बाबा नाम दिया गया था और उस बाबा के चरणों और दरबार में बड़े बड़े धुरंधर माथा टेकने और हाजरी लगाने आते थे. तब बाबा का आशीर्वाद बरसता था. अब उसी बाबा को वही आशीर्वाद रिटर्न गिफ्ट में मिल रहा है. 

Advertisement

चुनावी मौसम में मिलती है आजादी!
वैसे ये रिटर्न गिफ्ट तब तब ज्यादा मिलता है जब जब चुनावी मौसम आता है. और अपने यहां तो हर मौसम चुनावी मौसम होता है. कभी निगम चुनाव, कभी पंचायत चुनाव, कभी विधान सभा, कभी लोकसभा यहां तक कि उप चुनाव. और ये इत्तेफाक नहीं बल्कि हकीकत है कि बस कुछ वक्त बाद ही उसी हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने जा रहा है, जिस हरियाणा में बाबा के आशीर्वाद का सबसे ज्यादा असर है. तो चुनावी तैयारी से पहले तैयारियों का जायजा लेने के लिए बाबा को जेल से बाहर निकालना जरूरी तो था ही.

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार
वैसे कमाल ये भी है कि इस बार ऐन गुरमीत राम रहीम के जन्म दिन से पहले फरलो पर रिहाई का फैसला उसी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दिया है जिसने कुछ वक्त पहले राम रहीम को बार-बार लगातार 50 -50 दिन की पैरोल या फरलो दिए जाने पर राज्य सरकार की क्लास लगा दी थी. और तभी अदालत ने ये फैसला भी सुना दिया था कि आइंदा जब भी राम रहीम को बाहर जाना होगा तो राज्य सरकार पहले उससे इजाजत लेगी. तो गुरमीत राम रहीम और हरियाणा सरकार इस बार उसी पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गई. एक नई रिहाई का परवाना मांगने. 

Advertisement

13 अगस्त को मिली थी फरलो 
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट भी पिछली बातें भूल गई थी और गुरमीत राम रहीम से कहा था कि जा 13 अगस्त से अगले 21 दिन तक जी ले अपनी जिंदगी. उतार दे कैदी के कपड़े, फिर से पहन ले अपनी वही ठगी वाली पोशाक और अपनी फितरत के मुताबिक बाहर जाकर सोशल मीडिया के जरिए फिर से अपने ज्ञान प्रवचन दे डाल.

साल में 70 दिन की पैरोल देने का प्रावधान
अब कहानी के एक नए ट्विस्ट की. रेपिस्ट-कातिल बाबा ने इस बार फिर से 20 दिन की पैरोल मांगी थी. असल में हरियाणा जेल मैनुअल के हिसाब से हर कैदी को साल में 70 दिन की पैरोल मिल सकती है. बाबा इस साल अब तक 50 दिन की पैरोल के मजे लूट चुके हैं. ऐसे में अभी उनके हिस्से के 20 दिन और बचे हैं. ऐसे में अब जब बाबा ने फिर से पैरोल की अर्जी दी, तो चुनाव आचार संहिता लागू होने की वजह से राज्य सरकार ने उसकी अर्जी को मुख्य चुनाव अधिकारी यानी सीईओ को भेज दिया. 

कुछ शर्तों के साथ मिली गुरमीत को फरलो
सीईओ ने उसके पैरोल के नियम और अब तक मिले पैरोल की जानकारी मांगी और फिर कुछ शर्तों के साथ उसे एक बार फिर से पैरोल पर आज़ाद करने का फरमान सुना दिया. इन शर्तों के मुताबिक बाबा ना तो खुले तौर पर और ना ही सोशल मीडिया के ज़रिए किसी चुनाव प्रचार में शामिल हो सकता है. यानी बाबा को पैरोल तो मिली है, लेकिन कहने को चुनाव से दूर रहेंगे. लेकिन सोशल मीडिया के इस ज़माने में बाबा को अपना ईशारा अपने भक्तों तक पहुंचाने में कितनी मुश्किल होगी और कितनी नहीं, ये कोई भी आसानी से समझ सकता है. बहुत मुमकिन है कि बाबा इस बार बाहर आने के बाद फिर से यूपी के बागपत में मौजूद बरवाला आश्रम में ही अपना डेरा जमाएगा. 

Advertisement

बाबा उसी आश्रम से फिर से ज्ञान देगा. प्रवचन देगा. चुनावी रणनीति बनाएगा. चोरी चोरी चुपके चुपके तमाम नेता और अफसर मिलने भी आएंगे. क्योंकि भले ही गुरमीत राम रहीम एक बलात्कारी और कातिल है, पर हरियाणा की राजनीत कर रहे राजनेताओं को अब भी उसके अंदर से लहू की जगह वोट की बू आती है. 

आसाराम नहीं बना सका अपना वोट बैंक
सुनरिया और बरवाला आश्रम से सीधे अब बात करके हैं राजस्थान के जोधपुर की. उसी जोधपुर की सेंट्रल जेल में अगस्त 2013 से अब तक यानी पिछले 11 सालों से एक और कलंकित बाबा आसाराम रेप के इल्जाम में उम्र कैद की सजा काट रहा है. आसाराम की पहुंच भी कुछ कम नहीं थी. शायद ही देश का ऐसा कोई नेता हो जिसने कभी आसाराम के दर पर सर न झुकाया हो. लेकिन उसका नसीब गुरमीत राम रहीम जैसा नहीं निकला. शायद वजह ये हो सकती है कि आसाराम ने भक्त तो बनाए वोट बैंक नहीं बना पाया.

आसाराम को पहली बार मिली थी 7 दिन की पैरोल 
नतीजा ये कि जहां गुरमीत राम रहीम सात साल में ही 13 किश्तों में 255 दिनों से ज्यादा पैरोल और फरलो पर आजादी काट चुका है, वहीं गुरमीत राम रहीम से कहीं ज्यादा बुजुर्ग और कहीं ज्यादा बीमार आसाराम 11 सालों की कैद के बाद पहली बार अगस्त के महीने में ही सात दिनों के लिए पैरोल मिली थी. वो भी इलाज के नाम पर ये और बात है कि ये पैरोल बाद में सात और दिनों के लिए बढ़ा दी गई. लेकिन अब आसाराम 14 दिन की कस्टडी पैरोल के बाद एक बार फिर से जेल के अंदर जा चुका है. यानी कायदे से फिर देश के बाकी कैदियों से राम रहीम की तुलना ही बेइमानी है. 

Advertisement

रेप और मर्डर के लिए सजा काट रहा है गुरमीत राम रहीम
बाबा के नाम पर कलंक इस राम रहीम को दो लड़कियों के बलात्कार और एक पत्रकार के कत्ल के इल्जाम में सितंबर 2017 में 20-20 साल की दो दो उम्रकैद की सजा हुई. लेकिन जेल में सात साल रहने के बाद भी वो आजादी के मजे ले रहा है. वो पैरोल और फरलो का जमकर इस्तेमाल कर रहा है. जिसका अंदाजा आप इस लिस्ट को देखकर लगा सकते हैं-

20 अक्टूबर 2020- मां से मिलने के लिए एक दिन की पैरोल 

12 मई 2021- बीपी चेक कराने के लिए एक दिन की पैरोल 

17 मई 2021- मां से दोबारा मिलने के लिए एक दिन की पैरोल 

3 जून 2021- पेट दर्द उठा, तो सात दिन की पैरोल 

13 जुलाई 2021- एम्स में दिखाने के लिए पैरोल 

7 फरवरी 2022- 21 दिन की फरलो 

17 जून 2022- 30 दिन की पैरोल 

अक्टूबर 2022- 40 दिन की पैरोल 

21 जनवरी 2023- 40 दिन की पैरोल 

20 जुलाई 2023- 30 दिन की पैरोल 

20 नवंबर 2023- 21 दिन की पैरोल 

19 जनवरी 2024- पूरे 50 दिन की पैरोल

13 अगस्त 2024- 21 दिन की फरलो  

01 अक्टूबर 2024 - 20 दिन की फरलो 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement