
गुजरात के सूरत शहर की एक अदालत ने प्रतिबंधित संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया यानी सिमी के 127 लोगों को शनिवार को बरी कर दिया. बीस साल पहले इन्हें सिमी संगठन से जुड़े रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इन सभी को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया गया था.
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एएन दवे की अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोपी सिमी से जुड़े हुए थे और प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए एकत्र हुए थे.
सूरत की अठवालाइंस पुलिस ने 28 दिसंबर 2001 को कम से कम 127 लोगों को सिमी का सदस्य होने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था. इन पर शहर के सगरामपुरा के एक हॉल में प्रतिबंधित संगठन की गतिविधियों को विस्तार देने के लिए बैठक करने का आरोप था.
इन आरोपियों में 44 लोग महाराष्ट्र से, 25 लोग गुजरात से, 11 लोग कर्नाटक से, 10 लोग उत्तर प्रदेश से, 9 लोग राजस्थान से, 4 लोग पश्चिम बंगाल से, 2 लोग बिहार से और एक व्यक्ति छत्तीसगढ़ सहित कुल 127 लोगों को आरोपी बनाया गया था. 20 वर्ष के ट्रायल के दौरान 5 आरोपियों की मौत हो गई थी. जबकि 7 आरोपियों के खिलाफ अन्य मामले अभी भी चल रहे हैं. हालांकि प्रतिबंधित संगठन सिमी से जुड़े होने के आरोप में सभी 127 आरोपियों को सूरत की कोर्ट ने बरी कर दिया है.
केंद्र सरकार ने 27 सितंबर 2001 को अधिसूचना जारी कर सिमी पर प्रतिबंध लगा दिया था. आरोपियों ने अपने बचाव में कहा कि उनका सिमी से कोई संबंध नहीं है और वे सभी अखिल भारतीय अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड के बैनर तले कार्यक्रम में शामिल हुए थे.