
कहते हैं कि बेटा अपने पिता के नक्शे कदम पर चलता है. बिहार के गया में एमएलसी मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव पर ये कहावत फिट बैठती है, जिसे आदित्य की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा मिली है. उसके पिता बिंदी यादव पर मर्डर और किडनैपिंग के कई केस दर्ज हैं. उस पर कम से कम 17 आपराधिक मामले दर्ज हैं. बिंदी को भी इस केस में 5 साल की सजा मिली है.
बिंदी यादव पर नक्सलियों को हथियारों की सप्लाई करने का भी आरोप है. वह लंबे वक्त तक देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद रहा. गया में एंट्री माफिया के नाम से भी जाना जाता है. वह बिहार-झारखंड की सीमा पर ट्रकों से वसूली करता था. उसका इतिहास जानने के लिए 1991-92 के उस दौर में जाना होगा, जब बिहार में आतंक का राज की शुरूआत हुई थी.
यूं कहें कि उस दौर में जंगलराज का उदय हुआ था. उस दौर में वह आतंक का पर्याय बना. बिहार के लोग उस समय बिन्दी और बच्चू यादव गैंग से भयभीत रहा करते थे. एक साधारण परिवार में जन्मा बिन्दी यादव आज एक हजार करोड़ से अधिक संपत्ति का मालिक है. उसके पीछे आतंक की वही कहानी है, जिसकी बदौलत आज वो अरबपति बना हुआ है.
ऐसे बन गया जुर्म की दुनिया का सरताज
गया में दर्जनों मकान पर इस गिरोह ने कब्जा जमाया हुआ है. कई एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा है. उसके भय से उस जमाने में कई बड़े-बड़े बिजनेसमैन शहर छोड़ने को मजबूर हो गए. उसी का बेटा रॉकी लैंड रोवर पर सवार होकर निकलता है और जब गाड़ी को साइड नहीं मिलता, तो गोली मार देता है. ऐसे बाप के बेटे से और क्या उम्मीद की जा सकती है.
बबली जैन अपहरण कांड में उछला नाम
बिहार के कुख्यात राजन कुर्मी की हत्या कर बिन्दी यादव गया का सरताज बन गया. उसके बाद हत्या लूट और अपहरण के धंधे में खूब तहलका मचाया. लालू-राबड़ी राज में उसकी करतूत उफान पर थी. बबली जैन अपहरण कांड में भी इसका नाम खूब उछला. बिन्दी और बच्चू यादव ने मिलकर पूरे मगध क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम कर लिया था.
नक्सलियों को सप्लाई करता था हथियार
बताते हैं कि गया के मोहनपुर ब्लाक के गणेश चक गांव में पैदा हुआ बिन्दी यादव के पिता साधारण किसान थे. लेकिन पिछले 25 वर्षों में वह धन कुबेर हो गया. चार भाईयों में तीसरे नंबर का बिन्दी शुरू से ही आपराधिक प्रवृति का था. वह नक्सलियों को हथियार सप्लाई करता था. 2011 में उसके यहां हथियारों का जखीरा पकड़ा गया, जिसमें AK-47 भी शामिल है.
देशद्रोह, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का केस
उस पर देशद्रोह और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत मुकदमा दर्ज हुआ. लेकिन अपनी पहुंच और रसूख की बदौलत वह जेल से बाहर आ गया. वह शुरू से आरजेडी से जुड़ा हुआ था. उसी से उसकी रसूख और संपत्ति में इजाफा होता रहा. पैसा आया तो बिन्दी का शौक भी बढा. उसने अपनी पहली पत्नी को छोड़कर दूसरी शादी मनोरमा यादव से कर ली.
खुद हारा चुनाव, पत्नी बनी एमएलसी
मनोरमा के पिता जीटी रोड पर ढाबा चलाते थे. वे पंजाब के रहने वाले थे. रॉकी यादव इन्हीं दोनों का बेटा है. मनोरमा आरजेडी से 2003 से 2009 तक विधान परिषद का सदस्य रही. खुद आरजेडी और निर्दलीय के रूप में 2005 और 2010 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन दोनों बार हार गया. बाद में जदयू के टिकट पर मनोरमा विधान परिषद का चुनाव जीत गई.