
गाजियाबाद में जिला प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट (DM) के आदेश पर की गई जांच में करीब एक हजार करोड़ रुपये की कीमत की जमीन पकड़ी है. सदर तहसील के अकबरपुर-बहरामपुर में चारागाह की जमीन को खुर्द-बुर्द कर बेचने को लेकर एफआईआर दर्ज की जाएगी.
कनावनी की बंजर जमीन पर रुद्रा बिल्डर निर्माण कर रहा था. तत्कालीन एसडीएम प्रशांत तिवारी ने बिल्डर के खिलाफ आरसी जारी की. प्रशासन ने सरकारी जमीन को कब्जे में ले लिया है. बैनामा करने वाले 250 लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमा होगा.
एसडीएम प्रशांत तिवारी गाजियाबाद में 13 अगस्त तक उपजिलाधिकारी के पद पर कार्यरत थे और उन्हें इसी दिन मुरादाबाद के लिए रिलीव कर दिया गया था.
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हालांकि प्रशांत तिवारी ने मुरादाबाद जाने से पहले विजय नगर और कनावनी क्षेत्र में सरकारी जमीन हथियाने और खरीद-फरोख्त करने के 2 गंभीर मामलों में कार्रवाई करके गए थे. उनकी कार्रवाई की वजह से लगभग 1 हजार करोड़ रुपये की कीमत की जमीन प्रशासन को वापस मिल सकी.
यह जमीन गाजियाबाद के अकबरपुर, बहरामपुर और कनावनी के पॉश इलाके में कई हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है. विजय नगर के अकबरपुर, बहरामपुर क्षेत्र में स्थित जमीन के बारे में जांच करने पर पता चला कि इस क्षेत्र में पिछले 10 सालों में सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त हो रही है. धीरे-धीरे भू-माफियाओं ने अकबरपुर, बहरामपुर के खसरा नंबर 206/5 में 250 से अधिक बैनामे कर दिए हैं.
जांच के बाद पता चला कि यह पूरी जमीन चारागाह की जमीन है जिनके निरस्तीकरण, क्रेता, विक्रेता, बैनामा लेखक और गवाहों के खिलाफ 420, गैंगस्टर, एंटी भू-माफिया और अन्य धाराओं के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने और जमीन पर कब्जा वापस लेने को लेकर प्रशांत तिवारी ने तहसीलदार को पत्र लिखा था. और साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी.
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इसी तरह नोएडा से गाजियाबाद में आए कनावनी गांव में एक आवेदक करोड़ों की जमीन पर मालिकाना हक का दावा कर रहा था और कब्जा दिलाने का अनुरोध कर रहा था. जांच करने पर पता चला कि यह बंजर जमीन है और इसी कई साल पहले कब्जाने की कोशिश की गई थी. मामला सामने आने पर उसके आवेदन को खारिज कर दिया गया.