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तबरेज मॉब लिंचिंग: धारा 302 बहाल होने के लिए वायरल वीडियो की होगी जांच

राज्य के सरायकेला-खरसावां में 17 जून को भीड़ ने बाइक चोरी के शक में 22 वर्षीय तबरेज अंसारी की बुरी तरह से पिटाई कर दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. 11 आरोपियों पर धारा 302 के तहत मामला दर्ज हुआ. हालांकि, बाद में पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत 11 आरोपियों पर दर्ज मामले को खारिज कर दिया.

तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग का वायरल हुआ था वीडियो तबरेज अंसारी मॉब लिंचिंग का वायरल हुआ था वीडियो
सत्यजीत कुमार
  • रांची,
  • 18 सितंबर 2019,
  • अपडेटेड 9:30 PM IST

  • वीडियो की सत्यता की जांच कोर्ट में अदा करेगी अहम भूमिका
  • सबूत के तौर पर सिर्फ वायरल वीडियो जिसमें नहीं है दिन और तारीख
  • 25 सितंबर को कोर्ट सुनेगी पीड़ित व बचाव पक्ष के वकीलों की दलील
झारखंड में तबरेज मॉब लिंचिंग मामले में अब अदालत यह निर्धारित करेगी कि मॉब लिंचिंग के 11 आरोपियों के विरुद्ध हटाई गई धाराएं फिर से बहाल होंगी या नहीं. तबरेज को पीटती हुई भीड़ का जो वीडियो वायरल हुआ था, अब अदालत में सारा मामला उसी पर टिका है.

इस वीडियो की सत्यता की जांच से मामले का रुख तय होगा. फिलहाल पीड़ित और बचाव पक्ष के वकील अपनी-अपनी दलीलों और सबूतों को लेकर पूरी तैयारी कर चुके हैं. 25 सितंबर, 2019 को अदालत दोनों पक्षों की दलील सुनेगी.

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इसी बीच तबरेज की विधवा शाहिस्ता ने प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल उठाते हुए धमकी दी है कि अगर आरोपियों के विरुद्ध धारा 302 के तहत हत्या का मुकदमा नहीं चलाया गया तो वे आत्महत्या कर लेंगी. हालांकि, वकीलों का कहना है कि अब यह पूरा केस वायरल वीडियो की प्रामाणिकता पर टिका है.

प्रशासन पर लगाया आरोप

तबरेज के चाचा मौलाना मंसूर ने आरोप लगाया है कि प्रशासन उनके साथ सहयोग नहीं कर रहा है. उन्होंने पुलिस से विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी मांगी थी. परिवार ने यह भी मांग की थी कि जेल में तबरेज का क्या इलाज किया गया था, इसका ब्यौरा दिया जाए, लेकिन पुलिस ने ये दस्तावेज मुहैया नहीं कराए.

मौलाना मंसूर का आरोप है कि एसपी ने कहा कि ये सभी दस्तावेज उन्हें नहीं दिए जाएंगे, बल्कि अब अदालत में जमा किए जाएंगे. पीड़ित परिवार का आरोप है कि जानबूझ कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है.

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तबरेज की विधवा शाहिस्ता ने धारा 302 नहीं लगाने पर आत्महत्या की धमकी देने के साथ यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें मुआवजे के रूप में एक भी पैसा नहीं मिला. उन्होंने हाईकोर्ट में 50 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी के लिए याचिका डाली है. परिवार की आशाएं अब पूरी तरह कोर्ट पर टिकी हैं.

नहीं है कोई चश्मदीद

आरोपियों के वकील सुबोध चंद्र हजरत ने कहा कि उनके मुवक्किलों के विरुद्ध 302 या 304 के तहत कोई भी केस नहीं ठहरेगा. एफआईआर में घटना की तारीख और समय स्पष्ट नहीं है. आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है. मामले में कोई चश्मदीद नहीं है और अब सारा मामला वायरल हुए वीडियो पर टिका है.

पीड़ित पक्ष के वकील अल्ताफ हुसैन विश्वास के साथ कहते हैं कि वायरल वीडियो की सत्यता की जांच हो जाए, इसके बाद कोर्ट हमारी अपील सुनेगी और आरोपियों पर धारा 302 लगेगी. प्रशासन हमारे केस को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हमें अदालत में पूरा भरोसा है.

घटनास्थल पर समय से नहीं पहुंची पुलिस

सरायकेला के एसपी एस कार्तिक ने फोन पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस घटनास्थल पर देर से पहुंची, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं. लेकिन इस घटना के 3 तीन पहले कुकरा बाजार में पुलिस पर गुरिल्ला अटैक हुआ था और 5 सिपाही मारे गए थे.

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हेडक्वार्टर से निर्देश था कि रात को पुलिस के लूज मूवमेंट से बचा जाए. इसके अलावा हमने अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी है. हम सबूतों के आधार पर आगे बढ़ रहे हैं.

शाहिस्ता के वकील ने सरायकेला सीजेएम से पुलिस को यह आदेश देने की अपील की है कि मामले में वायरल वीडियो को कोर्ट के सामने पेश किया जाए जो कि एकमात्र ठोस सबूत है.

गौरतलब है कि राज्य के सरायकेला-खरसावां में 17 जून को भीड़ ने बाइक चोरी के शक में 22 वर्षीय तबरेज अंसारी की बुरी तरह से पिटाई की दी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई. इसके बाद 11 आरोपियों पर धारा 302 के तहत मामला दर्ज हुआ.

हालांकि, बाद में पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत 11 आरोपियों पर दर्ज मामले को खारिज कर दिया. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कि कहा गया है कि तबरेज अंसारी की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई, यह पूर्व नियोजित हत्या का मामला नहीं है.

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