
26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की रिहाई हरगिज न होती यदि पाकिस्तान ने अदालत में उसके खिलाफ जरूरी सबूत पेश कर दिए होते. हकीकत यह है कि पाकिस्तान सरकार ने लाहौर हाई कोर्ट में हाफिज के खिलाफ सुनवाई में जानबूझकर लापरवाही बरती और हाफिज को रिहा होने दिया.
लाहौर हाई कोर्ट लगातार पाक सरकार से हाफिज को नजरबंद रखने की वजह और सबूत मांगता रहा. लेकिन पाक सरकार बस तारीख पर तारीख मांगती रही. गौरतलब है कि भारत सरकार ने हाफिज के खिलाफ इतने सबूत दे रखे हैं कि हाफिज अगले कई जन्मों तक बाहर नहीं आ पाता.
पाकिस्तान ने लाहौर हाई कोर्ट में हाफिज के खिलाफ हुई सुनवाई में सिर्फ रस्म अदायगी की. जिसका नतीजा रहा कि 10 महीने की नजरबंदी की नौटंकी के बाद गुरुवार को हिंदुस्तान का सबसे बड़ा गुनहगार हाफिज आजाद हो गया.
हाफिज की रिहाई ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल
हाफिज की रिहाई के बाद भारत और अमेरिका सहित अंतर्राष्ट्रीय मंचों से आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान के लापरवाह रवैये को लेकर आगाह किया गया. लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह मुमकिन कैसे हुआ? आखिर कैसे इतने सबूतों के बावजूद हाफिज को आजादी मिल गई?
आखिर कैसे पाकिस्तान ने भारत, अमेरिका और यहां तक की संयुक्त राष्ट्र के ऐतराज की भी अनदेखी कर दी? आखिर हाफिज को बाहर निकालने के लिए पाकिस्तान की सरकार और वहां कि सिस्टम ने कौन सा चक्रव्यूह रचा?
हाई कोर्ट की सुनवाई में छिपे हैं सवालों के जवाब
इन तमाम सवालों का जवाब जानने के लिए हाफिज को लेकर लाहौर हाईकोर्ट में हाल में हुई सुनवाई पर एक निगाह डालना जरूरी है. लाहौर हाईकोर्ट ने कहा था कि हाफिज के खिलाफ यदि सबूत पेश नहीं किए गए, तो उसे आजाद कर दिया जाएगा. कोर्ट ने इस मामले में पाक सरकार को फटकार भी लगाई.
कोर्ट ने पाकिस्तान के गृह सचिव को हाफिज के खिलाफ सबूतों के साथ पेश होने को कहा. लेकिन न तो गृह सचिव आए और ही ना सबूत आए. बल्कि छोटे अफसरों ने अदालत में नई तारीख ले ली. लाहौर हाईकोर्ट ने इस पर नाखुशी जताई और कहा कि यह केस को टालने की सरकारी कोशिश है.
पाकिस्तान की आतंकियों से मिलीभगत
असल में ये पाकिस्तान के सिस्टम की आतंकियों से वो मिलीभगत है, जिसकी बदौलत वो सालों से पूरी दुनिया की आंखों में धूल झोंकता रहा है. अंतराष्ट्रीय मंचों से जब भी आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है, पाकिस्तान उन पर पाबंदी लगाने, उन्हें नजरबंद करने जैसे नाटक शुरू कर देता है.
लेकिन हकीकत यही है कि पाकिस्तानी सरकार की सरपरस्ती में पल रहे ये आतंकवादी अब इतने ताकतवर हो चुके हैं कि इनके खिलाफ सचमुच कार्रवाई करने में सरकार के हाथ-पांव कांपते हैं. ये आतंकवादी अब खुले मंचों से आतंकी संदेश फैला रहे हैं, और पाकिस्तान सरकार ने आंखों पर पट्टी बांध रखी है.
इन्हीं में से एक है हाफिज सईद का सिपहसालार अब्दुल रहमान मक्की. हाफिज सईद को नजरबंद करने को लेकर मक्की खुलेआम पाकिस्तान सरकार को धमकी देता नजर आता रहा है. वहीं दूसरी तरफ वहां सिस्टम इन आतंकवादियों को आवामी रहनुमा बनाने की कोशिशों में जुटा हुआ है.
सच्चाई यह है कि पाकिस्तान सरकार इन आंतकवादियों को सियासत में लाकर और नेता बना कर मुल्क की कमान आतंकियों के हाथ में सौंपने की साजिश में लगा हुआ है. पाकिस्तानी आर्मी के प्रवक्ता तक यह कुबूल कर चुके हैं कि पाकिस्तानी सरकार का इन आतंकवादियों पर कोई जोर नहीं रह गया है.
इतना ही नहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ तक मान चुके हैं कि आतंकियों को लेकर पाकिस्तान का सिस्टम आपस में ही फ्रेंडली मैच खेल रहा है. वास्तव में यही पाकिस्तान की असली फितरत है. वहीं हमारी यही गलती है कि हम हर बार पाकिस्तान से उम्मीद पाल लेते हैं और धोखा भी खाते हैं.