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समीर वानखेड़े ने विजिलेंस टीम को दिया स्टेटमेंट, सादे कागज पर साइन के आरोपों को नकारा

मुंबई के क्रूज जहाज ड्रग्स मामले में एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने एनसीबी की विजिलेंस टीम को बयान दिया, जिसमें उन्होंने साफ किया कि उन्होंने केस से जुड़ी सभी जानकारी आला अफसरों के साथ साझा की थी. सूत्रों के अनुसार, समीर वानखेड़े पर पहला आरोप था कि चार सीधे कागजों पर जबरदस्ती साइन करवाए गए. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि किसी भी सादे कागज पर पंच से कोई साइन नहीं करवाया गया.

समीर वानखेड़े समीर वानखेड़े
तनसीम हैदर
  • मुंबई,
  • 31 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 5:46 PM IST
  • 'जानकारी आला अफसरों के साथ साझा की थी'
  • वानखेड़े बोले- सादे कागज पर नहीं करवाए साइन

मुंबई के क्रूज जहाज ड्रग्स मामले में एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े ने एनसीबी की विजिलेंस टीम को बयान दिया, जिसमें उन्होंने साफ किया कि उन्होंने केस से जुड़ी सभी जानकारी आला अफसरों के साथ साझा की थी. सूत्रों के अनुसार, समीर वानखेड़े पर पहला आरोप था कि चार सीधे कागजों पर जबरदस्ती साइन करवाए गए. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि किसी भी सादे कागज पर पंच से कोई साइन नहीं करवाया गया. बकायदा सीजर मेमो तैयार किया गया, जिसके बाद साइन करवाए गए थे. उन्होंने इस आरोप को मनगढ़ंत कहानी बताते हुए दावा किया कि यह जांच की दिशा को भटकाने के लिए साजिश के तहत तैयार किया गया है.

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जांच के दौरान समीर वानखेड़े ने बताया कि जिस वक्त प्रभाकर सैल वहां पर पंचनामें पर साइन कर रहा था उस दौरान बाकी पंच और अफसर भी मौजूद थे, जिनके बयान रजिस्टर होने चाहिए ताकि इस बात की तस्दीक हो उसे जबरदस्ती किसी सादे कागज पर साइन नहीं करवाए गए हैं. समीर वानखेडे ने क्रूज पर रख पार्टी की शुरुआती जानकारी से लेकर रेड पार्टी में शामिल अधिकारी, पार्टी में शामिल पंच और गिरफ्तारी सीजर मेमो और बरामद जी से जुड़ी हुईं एक-एक जानकारियां अपने बयान में दर्ज करवाई हैं.


बयान दर्ज करवाने के दौरान समीर वानखेड़े ने एनसीबी की जांच कमेटी के सामने अपनी बात रखते हुए यह बताने की कोशिश की है कि केस की पूरी की पूरी प्रक्रिया कानूनी तौर पर अंजाम तक कैसे पहुंचाई गई. क्रूस केस और ड्रग्स पार्टी से लेकर इस केस से जुड़ी हुई प्रत्येक जानकारी शुरू से आखिर तक मैंने अपने उच्चाधिकारियों से साझा की.

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'उच्चाधिकारियों के संज्ञान में था सब'

वानखेड़े ने बताया कि वह लगातार अपने उच्चाधिकारियों को केस की प्रगति के बारे में अवगत कराते रहे. उन्होंने कहा, ''मैंने जो भी रेड, गिरफ्तारी और रिकवरी की, वह सब उच्चाधिकारियों के संज्ञान में रहते हुए की हैं.'' इसके अलावा, दूसरा सबसे बड़ा इल्ज़ाम 25 करोड़ के लेन-देन पर था, जिसके जवाब में समीर वानखेड़े ने सीधे तौर पर जांच कमेटी से कहा कि प्रभाकर सैल एकदम झूठ बोल रहा है और मनगढ़ंत कहानियां रच रहा है. 

727 करोड़ से ज्यादा के सीजर को अंजाम दिया: वानखेड़े

उन्होंने आगे कहा कि जांच टीम प्रभाकर सैल से भी पूछताछ करे और अगर जांच टीम को कुछ भी लगे तो वह किसी भी एजेंसी से जांच करा सकती है. एनसीबी अधिकारी ने खुद को ईमानदार अधिकारी बताते हुए कहा कि मैंने पूर्व में कस्टम विभाग, डीआरआई और एनआईए में रहते हुए बड़े-बड़े केस वर्कआउट किए हैं. कस्टम में रहते हुए मैंने 727 करोड़ से ज्यादा के सीजर को अंजाम दिया. एनआईए में रहने को दौरान मैंने अंडरवर्ल्ड से जुड़े हुए कई बड़े केस पर काम किया और बड़े बड़े अपराधियों की गिरफ्तारी को अंजाम दिया. डीआरआई में रहते हुए मैंने ड्रग्स के बड़ी-बड़ी बरामदगी की जो कि एनसीबी में आने के बाद भी जारी रही. डीआरआई में रहते हुए 416.91 करोड़ का माल बरामद किया और 192 करोड़ की ड्रग्स भी बरामद किया.

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