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राजस्थान: नाबालिग से गैंगरेप और हत्या के केस में दो को फांसी की सजा का ऐलान

बूंदी में नाबालिग से गैंगरेप एवं हत्या के मामले में दोनों दोषियों को आज कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है. इस पूरे मामले में 22 गवाह और 79 सबूत एकत्रित किए गए. राजस्थान के बूंदी में 15 वर्षीय आदिवासी नाबालिग लड़की के साथ रेप को अंजाम देने के बाद पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई गई थी.

दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा
aajtak.in
  • बूंदी,
  • 29 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 8:04 PM IST
  • गैंगरेप के बाद पत्थर से कुचलकर की थी हत्या
  • तीन आरोपियों को किया गया था गिरफ्तार  

बूंदी में 23 दिसंबर को हुए नाबालिग से गैंगरेप और हत्या के मामले में दो लोगों को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई  है. जबकि तीसरा आरोपी नाबालिग है जिसको कोर्ट ने बाल सुधार गृह भेज दिया है. इस केस में प्रदेश सरकार ने विशेष वकील की नियुक्ति की थी. राजस्थान के बूंदी में 23 दिसंबर 2021 को 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप को अंजाम देने के बाद पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी गई गई थी.

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तीन हैवानों ने पहले किशोरी के साथ बलात्कार किया और फिर गला घोंट कर उसे मार डाला था. विरोध करने पर उन्होंने नाबालिग के शरीर को नोच डाला था. दरिंदे ने पहले मासूम को अपहरण कर जंगल में ले गए और वहां गैंगरेप की घटना को अंजाम देने के बाद में ,पहले उसका गला घोंटा और पत्थर से उसकी सिर कुचल दिया और उसे घसीटते हुए जंगल में फेंक दिया.

इस पूरे मामले में 22 गवाह और 79 सबूत एकत्रित किए गए. जो न्यायालय के समक्ष पेश किए गए. सरकारी अधिवक्ता स्पेशल महावीरसिंह किशनावत ने पूरे मामले में पैरवी की थी. जिसके बाद दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया.

अशोक गहलोत ने किया ट्वीट

23 दिसंबर 2021 को बूंदी में नाबालिग से गैंगरेप एवं हत्या के मामले में दोनों आरोपियों को आज कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है. इस केस में प्रदेश सरकार ने विशेष वकील की नियुक्ति की थी एवं केस ऑफिसर स्कीम के तहत मामले को लेकर 3 कार्यदिवस में पुलिस ने चालान पेश किया था. यह प्रदेश में पॉक्सो एक्ट का पहला मामला है. जिसमें दो दोषियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाई गई है. हर राज्य से ऐसी खबरें लगातार आती रहती हैं जो पूरे देश के लिए चिंता का विषय है. 

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गहलोत ने लिखा, 'इसको ध्यान में रखकर हमने प्रदेश में कई नवाचार किए. सबसे पहले हर अपराध की FIR दर्ज करना अनिवार्य किया गया. पुलिस में महिला अपराधों की जांच के लिए एडिशनल एसपी के नेतृत्व में अलग सैल बनाई गई. फॉरेंसिक लैब की संख्या बढ़ाई गई. लीगल ऑफिसर की नियुक्ति की गई जिससे कोई आरोपी अदालत से भी ना बच सके.  केस ऑफिसर स्कीम में केस के लिए एक अधिकारी लगाया गया. इन सभी नवाचारों के कारण आज प्रदेश में हर पीड़िता को न्याय सुनिश्चित हो पा रहा है. 

सीएम ने कहा, 'हमारी सरकार आने के बाद पॉक्सो एक्ट के मामलों में 8 दोषियों को फांसी, 137 से अधिक आजीवन कारावास समेत कुल 620 से अधिक दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है. प्रदेश सरकार महिला सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. महिला अपराधों के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा एवं अदालत के माध्यम से इनको अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.

इनपुट-(भवानी सिंह )

 

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