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उन्नाव कांडः अब CBI करेगी गैंगरेप और हत्या की जांच, आरोपी विधायक पर कसेगा शिकंजा

उन्नाव गैंगरेप मामले की जांच अब सीबीआई करेगी. केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश मंजूर करते हुए गुरुवार की शाम इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने का फरमान जारी कर दिया. इससे पहले हाई कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. लेकिन विधायक को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया.

UP सरकार ने हाल ही में CBI जांच की सिफारिश की थी UP सरकार ने हाल ही में CBI जांच की सिफारिश की थी
परवेज़ सागर
  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2018,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

उन्नाव गैंगरेप मामले की जांच अब सीबीआई करेगी. केंद्र ने उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश मंजूर करते हुए गुरुवार की शाम इस केस की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी से कराने का आदेश जारी कर दिया. इससे पहले हाई कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस ने आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, लेकिन विधायक को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया.

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मामले पर बढ़ता विवाद और विपक्ष के आक्रामक तेवर योगी सरकार के लिए परेशानी का सबब बन रहे थे. पूरी सरकार आरोपी विधायक के सामने लाचार और बेबस दिख रही थी. गैंगरेप और हत्या के इस संगीन मामले पर सरकार पर हर तरफ से हल्ला हो रहा था. हाई कोर्ट ने जब मामले का संज्ञान लिया तो यूपी पुलिस की तरफ से मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की.

CBI करेगी मामले की जांच

यूपी सरकार की सिफारिश को मंजूर करते हुए केंद्र ने उन्नाव गैंगरेप मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दी. इससे पहले जिस तरह से अभी तक इस मामले में लापरवाही बरती गई है और विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की गिरफ्तारी नहीं की गई. इसी वजह से यूपी सरकार सबके निशाने पर है.

हैरानी की बात है कि इस मामले में 260 दिन बाद आरोपी MLA के खिलाफ दबाव में आकर केस दर्ज किया गया है. लेकिन उस पर भी अहम सवाल है कि अगर विधायक के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है, तो फिर उसकी गिरफ्तारी अभी तक क्यों नहीं की गई. जबकि इस मामले में गिरफ्तारी जरूरी है.

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विपक्षी दलों और अन्य संगठनों का आरोप है कि केस दर्ज होने के बाद भी राज्य सरकार विधायक को बचाने में जुटी है. माना जा रहा है कि अगर गिरफ्तारी से पहले ही विधायक कहीं भाग जाए तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?

बता दें कि गुरुवार को ही उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजीपी ओपी सिंह ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि विधायक अभी सिर्फ आरोपी हैं. उनकी गिरफ्तारी का फैसला सीबीआई करेगी.

मामले में बरती गई लापरवाही

वहीं सूबे के प्रमुख गृह सचिव अरविंद कुमार ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए SIT बनाई गई थी, जिसमें एडीजी लखनऊ जोन शामिल थे. उन्होंने पीड़िता, उसकी मां और आरोपी विधायक पक्ष के बयान दर्ज किए. तीन स्तर पर जांच की गई है. पहली जांच एसआईटी, दूसरी डीआईजी जेल और तीसरी डीएम उन्नाव को सौंपी गई थी. इसमें कई स्तर पर लापरवाही सामने आई है.

पीड़िता के परिजनों को सरकार पर नहीं भरोसा

एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित लड़की की बहन ने आजतक से बात करते हुए आरोपी विधायक की गिरफ्तारी की मांग की. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि मेरे पिता को मारने वाले और इस साजिश को रचने वालों को फांसी होनी चाहिए. आजतक से बात करते हुए पीड़िता की बहन ने कहा कि इस मामले में जांच होनी चाहिए, जल्द से जल्द गिरफ्तारी होनी चाहिए. हमें अब इस सरकार पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है.

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पीड़ित की बहन ने कहा कि जब एक पीड़ित लड़की को डरा दिया जाए और उसके पिता-चाचा की हत्या करवाने की बात की जाए तो वह कैसे किसी का नाम ले सकती है. मेरी बहन जब दिल्ली गई तो उसने आवाज उठाना शुरू किया. हर तरफ से इनको (विधायक) बचाया जा रहा है, इन्हें जल्द से जल्द जेल भेजा जाए.

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