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डिफेंस न्यूज

क्या है NASAMS... रूस की नई हाइपरसोनिक मिसाइल अटैक से यूक्रेन को बचा पाएगा ये एयर डिफेंस सिस्टम

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 25 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 10:37 AM IST
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कनाडा की सरकार ने रूस के हवाई हमलों से बचने के लिए यूक्रेन को NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम दिया है. यह अत्याधुनिक और घातक मिसाइल सिस्टम दिया है. यह रूस के ड्रोन्स, विमानों और अत्याधुनिक क्रूज मिसाइलों को आसमान में ही खत्म कर देगा. लेकिन सवाल ये है कि क्या नई हाइपरसोनिक मिसाइल को मार गिरा सकता है? (फोटोः गेटी)

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यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने इस बात की पुष्टि की है. अब यूक्रेन के लिए Russia के ड्रोन्स, विमानों, फाइटर जेट्स और क्रूज मिसाइलों को हवा में ही खत्म करना और आसान हो जाएगा. इस मिसाइल सिस्टम का नाम है NASAMS. यानी नेशनल/नॉर्वेनियन एडंवांस्ड सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम (National/Norwegian Advanced Surface to Air Missile System). (फोटोः रॉयटर्स/ ऑस्टिन डेविड रॉस)

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इस मिसाइल सिस्टम को नॉर्वे और अमेरिका ने मिलकर बनाया है. इस मिसाइल सिस्टम से AIM-9 साइडविंडर या IRIS-T जैसी मिसाइलों को दागा जा सकता है. यह कम दूरी का ऐसा मिसाइल सिस्टम है जो सतह से हवा में मार करता है. (फोटोः रॉयटर्स)

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NASAMS एयर डिफेंस सिस्टम की खास बात ये है कि इसके लॉन्चर में छह खाने होते हैं. हर खाने में दो-दो मिसाइलें तैनात होती है. यानी एक लॉन्चर से 12 मिसाइलें छूट सकती हैं. इसकी रेंज 30 से 50 km है. यानी मिसाइल इतनी दूरी पर मौजूद दुश्मन के हेलिकॉप्टर, ड्रोन, फाइटर जेट, विमान या क्रूज मिसाइलों को मार कर गिरा सकती है. लेकिन इस मिसाइल सिस्टम का राडार दुश्मन के टारगेट को 120 km दूर से ही पकड़ लेता है.  (फोटोः रॉयटर्स)

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NASAMS मिसाइल सिस्टम के अब तक तीन वैरिएंट आ चुके हैं. जो सबसे नया वैरिएंट है वो NASAMS 3. इसे AMRAAM-ER भी बुलाया जाता है. यह अमेरिका के पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम जैसा ही ताकतवर है. पहली जेनरेशन की NASAMS मिसाइल की रेंज सिर्फ 15 km थी. दूसरी जेनरेशन की 30 और तीसरे वैरिएंट की 50 km है. अमेरिका के NASAMS एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की मांग दुनिया के कई देशों में थी. 

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अमेरिका ने उन्हें यह सिस्टम दिया भी है. जैसे- लिथुआनिया, ऑस्ट्रेलिया, चिली, इंडोनेशिया, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, स्पेन, ओमान आदि. भारत के साथ भी इस मिसाइल सिस्टम को लेकर डील हो सकती थी लेकिन बाद में भारतीय वायुसेना ने इससे इंकार कर दिया. (फोटोः रॉयटर्स)

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वायुसेना ने कहा कि हम अपने बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम के तहत बनने वाली मिसाइलों का उपयोग करेंगे. यह मिसाइल सिस्टम हाइपरसोनिक मिसाइलों को रोकने की ताकत नहीं रखता. गलती से किसी मिसाइल को इंटरसेप्ट कर दे तो वह मात्र एक संयोग होगा. (फोटोः विकिपीडिया)

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