चीन ने पाकिस्तान के बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास AMAN-2025 भाग लिया है. चीन ने एक नौसैनिक कार्य बल को इस बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास में भाग लेने के लिए तैनात किया है. इससे इस्लामाबाद के साथ उसके रणनीतिक और सैन्य संबंध और मजबूत होंगे. (सभी फोटोः रॉयटर्स)
यह अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ रही हैं, जिसमें चीनी नौसेना की बढ़ती उपस्थिति शामिल है. यह अभ्यास 7 से 12 फरवरी तक कराची में आयोजित किया जाएगा, जिसमें चीन, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मलेशिया और अमेरिका के अलावा 32 अन्य देशों के पर्यवेक्षक भाग लेंगे.
चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (पीएलएएन) ने इस अभ्यास के लिए एक गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर, एक आपूर्ति जहाज और मैरीन कॉर्प्स के कर्मियों को तैनात किया है. चीन की AMAN-2025 में भागीदारी उसकी भारतीय समुद्री क्षेत्र में नौसैनिक प्रभाव का विस्तार करने की उसकी व्यापक रणनीति के अनुरूप है.
चीन के सरकारी बयान में कहा गया है कि उसकी नौसैनिक संपत्तियां समुद्री डाकू विरोधी अभियानों और समुद्री सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित होंगी, जिसमें महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और विदेशी हितों की सुरक्षा पर जोर दिया जाएगा. पाकिस्तान फ्लीट के कमांडर रियर एडमिरल अब्दुल मुनीब ने समुद्री सुरक्षा में बहुराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर बल दिया. इस अवसर पर चीनी रक्षा अटैचे भी शामिल थे.
चीन की पाकिस्तान-अधिकृत सैन्य अभ्यास में बढ़ती भागीदारी को हिंद महासागर में उसके विस्तारित नौसैनिक प्रभाव के बीच एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है. अमन-2025 का आयोजन भारत के थिएटर लेवल ऑपरेशनल रेडीनेस एक्सरसाइज (ट्रोपेक्स) के साथ मेल खाता है, जो भारतीय नौसेना द्वारा अपनी युद्ध तैयारी का मूल्यांकन करने के लिए आयोजित एक व्यापक नौसैनिक अभ्यास है.
भारत ने चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति के माध्यम से सैन्य और रणनीतिक घेराबंदी पर चिंता व्यक्त की है, जिसमें हिंद महासागर और दक्षिण एशिया में रणनीतिक आधार और साझेदारी बनाना शामिल है. चीन की पाकिस्तानी नौसैनिक अभ्यास में जारी भागीदारी को इस व्यापक सैन्य रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.
पाकिस्तान के साथ चीन अपने रक्षा और समुद्री संबंधों को मजबूत कर रहा है. भारत विशेष रूप से प्रमुख शिपिंग लेन और रणनीतिक गलियारों के आसपास हिंद महासागर में बीजिंग की बढ़ती आक्रामकता के बारे में सावधान रहता है. पिछले महीने चीन के अपने दो अनुसंधान जहाजों को आईओआर में भेजने की खबरें थीं.