
चीन की नौसेना ताकतवर है. पाकिस्तान अपनी आतंकी गतिविधियों से परेशान करता रहता है. ऐसे में भारत अपने स्वदेशी हथियारों की ताकत से इन दोनों के मन में खौफ पैदा कर रहा है. भारतीय मिलिट्री के लिए ऐसे वेपन बनाए जा रहे हैं, जो इसकी ताकत को कई गुना बढ़ा देंगे. इन हथियारों की चर्चा से ही पाकिस्तान और चीन में हो रही है.
idrw के मुताबिक सबसे बड़ी चर्चा इस समय अग्नि-6 मिसाइल (Agrni-VI) की हो रही है. पाकिस्तान के थिंक टैंक इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट के लोग ये मान रहे हैं कि भारत यह इंटरकॉन्टीनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बना रहा है. हालांकि भारत में इस मिसाइल को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी तरह की चर्चा भी नहीं हो रही है.
अगर Agni-VI मिसाइल बनाई जाती है तो इसका संभावित वजन 55 से 70 हजार Kg होगा. लंबाई करीब 20 से 40 मीटर होगी. व्यास 2 मीटर होगा. माना जा रहा है कि इसके अंदर 3 टन का वॉरहेड लगाया जाएगा. यह मिसाइल 10 से 11 परमाणु हथियार MIRV लेकर टारगेट पर हमला कर पाएगी. इसकी रेंज 10 से 12 हजार किलोमीटर होगी.
हल्के वजन का जोरावर टैंक... देश में कहीं भी पहुंचा सकते हैं
लद्दाख में जोरावर टैंक को 100 km चलाकर देखा जा चुका है. अप्रैल तक इसके यूजर ट्रायल भी शुरू हो जाएंगे. ये ट्रायल भारतीय सेना करेगी. भारतीय सेना ने डीआरडीओ को 59 जोरावर टैंक बनाने का ऑर्डिर दिया था. यह टैंक L&T बना रहा है. डिजाइन DRDO ने बनाया है. सेना इस टैंक को लद्दाख में चीन सीमा के पास तैनात करने की तैयारी में है.
भारतीय सेना को ऐसे 350 टैंक्स की जरुरत है. ये टैंक मात्र 25 टन के होंगे. इन्हें चलाने के लिए सिर्फ तीन लोगों की जरूरत होती है. असल में यह देश का पहला ऐसा टैंक होगा, जिसे माउंटेन टैंक बुला सकते हैं.
हल्का होने की वजह से इसे उठाकर कहीं भी पहुंचाया जा सकेगा. इसकी नली 120 mm की है. ऑटोमैटिक लोडर है. रिमोट वेपन स्टेशन होगा, जिसमें 12.7 mm की हैवी मशीन गन लगाई जाएगी. 2024 तक इसके ट्रायल्स चलेंगे. फिर सेना को सौंपा जाएगा.
ज़ोरावर में AI, ड्रोन इंटीग्रेशन, एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम, हाई डिग्री ऑफ सिचुएशनल अवेयरनेस जैसी तकनीकें भी हैं. साथ ही इसमें मिसाइल फायरिंग की क्षमता है. दुश्मन के ड्रोन्स को मार गिराने के यंत्र, वॉर्निंग सिस्टम भी लगे है. चीन ने अपनी तरफ जो टैंक लगाए हैं, वो 33 टन से कम वजन के हैं. उन्हें आसानी से एयरलिफ्ट किया जा सकता है.
ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल भी हो रही है तैयार... गति ही होगी घातक
रूस और भारत मिलकर ब्रह्मोस-2 हाइपरसोनिक मिसाइल बना रहे हैं. इसमें वही स्क्रैमजेट इंजन लगाया जाएगा, जो इसे शानदार गति और ग्लाइड करने की क्षमता प्रदान करेगा. इस मिसाइल की रेंज अधिकतम 600 km होगी. लेकिन इसकी गति बहुत ज्यादा होगी. यह मैक-7 यानी 8,575 km/hr की रफ्तार से दुश्मन पर धावा बोलेगी. इसे जहाज, पनडुब्बी, विमान या जमीन पर लगाए गए लॉन्चपैड से जागा जा सकेगा.
हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल... चाहे बम गिराओ या विमान को बम बना दो
भारत हाइपरसोनिक ग्लाइडर हथियार बना रहा है, उसका परीक्षण भी कर चुका है. DRDO ने मानव रहित स्क्रैमजेट का हाइपरसोनिक स्पीड फ्लाइट का सफल परीक्षण साल 2020 में किया था. इसे HSTDV (हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल) कहते हैं. जो 6126 से 12251 km/hr की रफ्तार से उड़े, उसे हाइपरसोनिक विमान कहते हैं.
भारत के HSTDV का परीक्षण 20 सेकंड से भी कम समय का था. हालांकि, तब इसकी गति करीब 7500 km/hr थी, लेकिन भविष्य में इसे घटाया या बढ़ाया जा सकता है. दुश्मन पर पलक झपकते ही बम गिराए जा सकते हैं. या फिर इस यान को ही बम के रूप में गिराया जा सकता है.
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स... बिना इंसानी जान गवाए, दुश्मन टारगेट खत्म
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स (DEW) ऐसे हथियार होते हैं जो किसी खास प्रकार की ऊर्जा को एकत्रित करके किसी एक टारगेट पर हमला करते हैं. इससे टारगेट या तो जल जाता है. या फिर उसकी इलेक्ट्रॉनिक तकनीक, संचार सिस्टम, नेविगेशन प्रणाली बेकार हो जाती हैं. इससे वह दिशा भ्रमित हो जाता है. अपने बेस से कनेक्ट नहीं कर पाता है. DEW से दो तरह के हमले किए जाते हैं. पहला लेजर लाइट और दूसरा इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें.
लेजर से हमला करके फाइटर जेट्स, ड्रोन्स, जंगी जहाज, टैंक्स आदि को नष्ट किया जा सकता है. इसमें काफी तेज ऊर्जा का बहाव होता है, जो सामने मौजूद चीज को जलाकर खाक कर देती है.
DRDO एक खुफिया प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. जिसका नाम दुर्गा-2 (Directionally Unrestricted Ray-Gun Array - Durga) है. इसके तहत भारतीय सेना को 100 किलोवॉट की लाइटवेट डाइयरेक्टेड एनर्जी सिस्टम दिया जाएगा.
अभी तक डीआरडीओ ने 25 किलोवॉट लेजर हथियार बनाया है, जो बैलिस्टिक मिसाइल पर 5 km दूर से हमला कर सकता है. हालांकि, 1 अप्रैल 2022 को लोकसभा में दिए गए एक जवाब में रक्षा राज्यमंत्री ने 300 किलोवॉट या उससे ज्यादा ताकत के हथियार बनाने का जिक्र किया है.
नौसैनिक जहाज पर ड्रोन... समंदर में निगरानी और हमला एकसाथ
भारतीय नौसेना अपने जंगी जहाजों पर ड्रोन्स यानी अनमैन्ड एरियल व्हीकल (NSUAV) की मांग कई वर्षों से कर रही थी. जिसे केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी. अब भारतीय नौसैनिक जंगी जहाजों पर 10 नेवल शिपबॉर्न यूएवी की तैनाती की जाएगी. इसके लिए सरकार ने करीब 1300 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी. भारत सरकार लगातार मेक इन इंडिया हथियारों और रक्षा उपकरणों पर जोर दे रही है. नौसैनिक ड्रोन्स से निगरानी, हमला और जासूसी में आसानी हो जाएगी. समुद्र में बैठे-बैठे नौसैनिक दुश्मन की जमीन पर ड्रोन के जरिए नजर रख सकेंगे.
भारतीय मल्टी रोल हेलिकॉप्टर ... VIP मूवमेंट हो या जंग, दोनों जगह आएगा काम
भारतीय मल्टी रोल हेलिकॉप्टर (Indian Multi Role Helicopter - IMRH) एक मीडियम लिफ्ट हेलिकॉप्टर होगा. जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बना रही है. इसकी पहली उड़ान की संभावना 2024-25 है. इसका उपयोग हवाई हमले, एंटी-सबमरीन, एंटी-सरफेस, मिलिट्री ट्रांसपोर्ट और वीआईपी ट्रांसपोर्ट में किया जाएगा.
इनके आने के बाद रूस के Mi-17 और Mi-18 को धीरे-धीरे हटा दिया जाएगा. इनका पांच पत्तियों वाला मुख्य पंखा होगा और चार ब्लेड वाला रोटर पीछे पूंछ पर होगा.
माना जा रहा है कि इसे उड़ाने के लिए दो पायलटों की जरूरत होगी. ये एक बार में 24 से 36 सैनिकों को ले जा सकेगा. या फिर 4500 kg वजन उठा सकेगा. इसकी लंबाई 25.12 मीटर, ऊंचाई 6.22 मीटर होगी. अधिकतम 300 km की रफ्तार से उड़ेगा. इसकी रेंज 800 km होगी. अधिकतम 6700 मीटर की ऊंचाई तक जा सकेगा.