
चीन अपनी सेना में उसकी नई एंटी-शिप क्रूज मिसाइल YJ-18 की मात्रा तेजी से बढ़ा रहा है. ऐसा इसलिए ताकि चीन स्थानीय मुश्किलों का सामना इसके जरिए आसानी से कर सके. यह मिसाइल रूस की 3M-54E Club मिसाइल से प्रेरित है. यह अभी तक नहीं पता चल पाया है कि इसे चीन ने अकेले बनाया है या रूस के साथ मिलकर. भारत की ब्रह्मोस, रूस की ओनिक्स से भी इसकी तुलना की जाती है.
इसके बारे में सबसे पहला खुलासा 2009 में आया था. इसके बाद 2013 में इसकी टेस्टिंग शुरू की गई थी. जबकि यह चीन की सेना में 2015 से शामिल है. इसमें YJ-62 मिसाइल की लंबी दूरी और YJ-12 मिसाइल की सुपरसोनिक स्पीड को शामिल करने की कोशिश की गई है. यानी कुल मिलाकर डिजाइन का मामला है.
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पहले धीमी चलती है, फिर एकदम से तेज भागती है मिसाइल
इस मिसाइल में दो स्टेज हैं. पहला स्टेज है सबसोनिक टर्बोजेट इंजन वाला. ताकि लंबी दूरी तक क्रूज कर सके. इसके बाद टारगेट से मात्र 40 किलोमीटर की दूरी पर इसका सुपरसोनिक टर्मिनल स्टेज एक्टिव हो जाता है. यह एकदम से 3580 km/hr से 4770 km/hr की स्पीड पकड़ लेती है. यानी दुश्मन के पास अगर पहले 2 मिनट का समय था बचने का, तो वह घटकर मात्र 30 सेकेंड रह जाता है.
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कई तरह के हथियार लगा सकते हैं, रेंज 540 किलोमीटर तक
इस मिसाइल की असल रेंज 220 से 540 किलोमीटर है. एक मिसाइल में 140 से 300 किलोग्राम तक हथियार लगा सकते हैं. यानी वॉरहेड. इसका नाटो नाम CH-SS-NX-13 है. वैसे चाइनीज में इसे यिंगजी-18 बुलाते हैं. इसमें हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड या एंटी-रेडिएशन वॉरहेड लगाकर दागा जा सकता है. इससे दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम खराब हो जाते हैं. उनके राडार और कम्यूनिकेशन सिस्टम खराब करने के बाद दूसरी मिसाइल से घातक हमला किया जा सकता है.
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चीन के कई युद्धपोत और पनडुब्बियों में की गई है तैनात
चीन ने इस मिसाइल को अपने टाइप-052डी डेस्ट्रॉयर और टाइप 055 डेस्ट्रॉयर में तैनात किया है. इसके अलावा शांग-2 क्लास न्यूक्लियर सबमरीन में भी लगाया है. जहां इसकी लॉन्चिंग वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम (VLS) से होती है. इसके अलावा सॉन्ग क्लास डीजल इलेक्ट्रिक सबमरीन में भी लगाई गई है.