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यहां से शुरू होगा World War 3... चीन की हरकतें दुनिया में कराएंगी कलह

चीन के नौसैनिकों ने फिलिपींस के मरीन कमांडो की उंगली काट दी. नाव में टक्कर मारी. फिलिपींस ने ब्रह्मोस, टोमाहॉक और SM-6 मिसाइलें तैनात कर दी हैं. किसी भी समय ये तनाव की स्थिति बड़े जंग में बदल सकती है. अमेरिका फिलिपींस की मदद करेगा. ऐसे में तीसरा विश्व युद्ध साउथ चाइना सी से शुरू हो सकता है.

चीनी कोस्ट गार्ड अपने युद्धपोत से फिलिपींस के रीसप्लाई बोट पर पानी की बौछार मारते हुए. (फोटोः एपी) चीनी कोस्ट गार्ड अपने युद्धपोत से फिलिपींस के रीसप्लाई बोट पर पानी की बौछार मारते हुए. (फोटोः एपी)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 20 जून 2024,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

चीन और फिलिपींस हथियारबंद संघर्ष के करीब पहुंच रहे हैं. अगर साउथ चाइना सी यानी दक्षिणी चीन सागर में इन दोनों देशों में जंग छिड़ती है, तो ये विशालकाय युद्ध या फिर तीसरे विश्व युद्ध की शक्ल ले सकता है. क्योंकि फिलिपींस के समर्थन में अमेरिका रहता है. चीन का उग्र रूप फिलिपींस के साथ-साथ अमेरिका को भी आमने-सामने खड़ा कर देगा. 

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चीन की समुद्री सेना और फिलिपींस के कोस्टगार्ड के बीच 17 जून 2024 को संघर्ष हुआ. चीन के नौसैनिकों ने फिलिपींस के रीसप्लाई वेसल को रोका. उसपर पानी की बौछार की. तलवारों, चाकुओं और अन्य हथियारों से हमला किया. इसमें फिलिपींस के मरीन कमांडो की उंगली कट गई. फिलिपींस ने आरोप लगाया कि चीनी फौजी उसकी समुद्री सीमा में घुसपैठ कर गए थे. 

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यहां देखिए संघर्ष का Video

फिलिपींस की बेहतरीन सैन्य एजेंसियों का एक मिश्रित सैन्य ऑर्गेनाइजेशन है. ये संस्था फिलिपींस के समुद्री सीमा की सुरक्षा करता है. खासतौर से पश्चिमी फिलिपीन सागर. चीन की मैरीटाइम फोर्सेस ने फिलिपींस के रीसप्लाई पोत को खींचा, टक्कर मारी और धकेला. फिर दोनों के जवानों में जूतमपैजार हुई. इसमें कई सैनिक जख्मी भी हुए. 

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चीन की हरकतों से खत्म हो रही शांति

फिलिपींस के डिफेंस सेक्रेटरी जिलबर्टो टियोडोरो ने कहा कि चीन खतरनाक और लापरवाह व्यवहार कर रहा है. हमारी सेनाएं इसका विरोध करती आईं हैं. करती रहेंगी. चीन की वजह से इस इलाके में शांति भंग हो रही है. जबकि, चीन का आरोप है कि फिलिपींस की रीसप्लाई पोत चीन के जहाज के करीब जा रही थी. 

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छोटे-मोटे संघर्ष से बड़े जंग की आशंका

चीन ने कहा कि फिलिपींस की बोट उनके जलसीमा में जबरदस्ती घुस रही थी. अब मुद्दा ये है कि चीन और फिलिपींस के इस संघर्ष में अमेरिका का आना होगा. क्योंकि उसका फिलिपींस के साथ डिफेंस ट्रीटी है. अब इस विवादित समुद्री क्षेत्र में कई स्थानों पर छोटे-मोटे या फिर बड़े संघर्ष की आशंका है. 

सेकेंड थॉमस शोल पर पहले भी हुई हैं घटनाएं

एक सार्वजनिक बयान में अमेरिका ने स्पष्ट तौर पर इसे चीन का उग्र व्यवहार और गलत कार्रवाई बताई है. इससे पहले भी छह-सात बार इस तरह की हरकत चीन कर चुका है. सेकेंड थॉमस शोल में ही ये सारी घटनाएं इसी साल हो चुकी हैं. इसकी वजह से साउथ चाइना सी में शांति और स्थिरता खत्म हो रही है. 

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चीन का एक नियम है संघर्ष की जड़

इस तरह के संघर्ष की कहानी शुरू कहां से होती है? असल में चीन के कोस्ट गार्ड्स को बीजिंग से सीधा निर्देश मिला है कि उनके नाइन-डैश लाइन को कोई भी संदिग्ध पार करे तो उसे तत्काल 60 दिन के लिए गिरफ्तार करो. ये गिरफ्तारी बिना किसी न्यायिक ट्रायल के होगी. 

फिलिपींस ने तैनात किए दो पेट्रोल वेसल

चीन को करारा जवाब देने के लिए फिलिपींस कोस्ट गार्ड ने दो पेट्रोल वेसल अपनी समुद्री सीमा में तैनात कर दिए हैं. ताकि फिलिपींस के मछुआरों को चीन की तरफ से कोई खतरा न हो. फिलहाल दोनों ही टीमें एकदूसरे पर संघर्ष और घुसपैठ का आरोप लगा रही है. दोनों ही किसी भी समय हथियारबंद संघर्ष की ओर जा सकती हैं. 

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ब्रह्मोस, टोमाहॉक और SM-6 मिसाइलें तैनात

फिलिपींस ने चीन को रोकने के लिए भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ली हैं. उन्हें दक्षिण चीन सागर की तरफ तैनात भी कर दिया है. इसके अलावा फिलिपींस अपने मित्र देशों के साथ मजबूती से युद्धाभ्यास में भाग लेता है. अमेरिका भी फिलिपींस में अपने हथियारों की तैनाती कर रहा है. जैसे हाई मोबिलिटी आर्टिलरी रॉकेट सिस्टम यानी हिमार्स (HIMARS). इसके अलावा अमेरिका ने MRC/Typhon System को भी फिलिपींस में तैनात किया है. इससे टोमाहॉकम और एसएम-6 मिसाइलें दागी जा सकती हैं. 

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