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Ugram Assault Rifle: डीआरडीओ ने भारतीय सेना के लिए बनाई नई राइफल, AK-203 प्रोजेक्ट अटका

DRDO ने भारतीय सेना के लिए नई घातक, सटीक और खतरनाक मारक क्षमता वाली असॉल्ट राइफल उग्रम (Ugram) बनाई है. यह राइफल पूरी तरह से स्वदेशी है. यह 7.62x51mm कैलिबर की राइफल है. डीआरडीओ ने इस राइफल को बनाने में भारतीय निजी कंपनी की मदद ली है.

ये है डीआरडीओ द्वारा बनाई गई Ugram Assault Rifle. ये है डीआरडीओ द्वारा बनाई गई Ugram Assault Rifle.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 09 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 7:09 PM IST

भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) के हैदराबाद स्थित आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (ARDE) ने भारतीय सेना के लिए नई असॉल्ट राइफल लॉन्च की है. इस राइफल का नाम है उग्रम (Ugram Assault Rifle). यह  7.62x51mm कैलिबर की राइफल है. जिसका वजन चार किलोग्राम से कम है. रेंज 500 मीटर है. 

आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग के डायरेक्टर जनरल शैलेंद्र गडे ने बताया कि कुछ महीनों पहले जनरल स्टाफ क्वालिटेटिव रिक्वायरमेंट्स ने भारतीय सेना के लिए नई राइफल की मांग जताई थी. तब निजी कंपनी के साथ मिलकर डीआरडीओ ने यह राइफल मात्र 100 दिनों में बनाकर तैयार कर दी. 

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रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के चलते अब AK-47 राइफलों का आयात नहीं हो रहा है. साथ ही AK-203 राइफल का प्रोजेक्ट भी शुरू नहीं हो पा रहा है. इसलिए यह राइफल बनाने की जरूरत पड़ी. ARDE के डायरेक्टर ए राजू ने कहा कि डीआरडीओ ने राइफल की डिजाइन बनाई है. इसके बाद इसे बनाने का काम निजी कंपनी को दिया है. 

मैनुअल और ऑटोमैटिक मोड दोनों हैं इसमें 

वेपन की टेस्टिंग के समय लेने वाली प्रक्रिया है. इसमें सटीकता, आसानी संचालन आदि देखा जाता है. इस राइफल में 20 राउंड की मैगजीन लगेगी. यह सिंगल शॉट और ऑटोमैटिक मोड में चलने वाली राइफल है. अगर एके सीरीज या AR टाइप राइफलों से तुलना करें तो इसकी डिजाइन रिवेट फ्री है. 

हर मौसम में की जाएगी राइफल की टेस्टिंग

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राजू ने बताया कि इस समय वो लोग मिलकर भारतीय सेना के अधिकारियों के साथ एक टीम बना रहे हैं, जो इस बंदूक की टेस्टिंग करेंगे. वो भी अलग-अलग मौसम में. ताकि ये पता चल सके कि यह असॉल्ट राइफल कितनी कारगर है. इस राइफल की टेस्टिंग बर्फीले इलाकों से लेकर रेगिस्तानों में किया जाएगा. जंगलों से लेकर बारिश वाले मौसम में किया जाएगा. 

ट्रायल के लिए पांच राइफल बनी हैं, और मिलेंगी

डीआरडीओ ने यह प्रोजेक्ट Dvipa Armour India कंपनी को इसे बनाने का काम दिया. इस कंपनी के डायरेक्टर जी. राम चैतन्य रेड्डी ने कहा कि हम 30 लाइसेंस बंदूक बनाने वाली देसी कंपनियों में शामिल थे. लेकिन यह हमें मिली. रहमने इस राइफल को रिकॉर्ड टाइम में बनाया है. हमने टेस्टिंग के लिए पांच बंदूकें बनाई हैं. इसके बाद हम 15 और राइफल सेना को टेस्टिंग के लिए देंगे. 

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