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कौन से फाइटर जेट्स हैं ऋतिक की फिल्म Fighter में... किन एयरफोर्स स्टेशनों पर हुई है शूटिंग?

ऋतिक रोशन, दीपिका पादुकोण और अनिल कपूर की फिल्म Fighter को देश की पहली एरियल एक्शन फिल्म कहा जा रहा है. फिल्म की कहानी भारतीय वायुसेना और उसके जवानों पर है. आइए जानते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग एयरफोर्स के किस स्टेशन या बेस पर हुई है. इसमें कौन से फाइटर जेट्स, हेलिकॉप्टर या एयरक्राफ्ट्स दिखाए गए हैं.

Fighter Movie में भारतीय वायुसेना के लड़ाकों और एयरक्राफ्ट्स को प्रदर्शित किया गया है. Fighter Movie में भारतीय वायुसेना के लड़ाकों और एयरक्राफ्ट्स को प्रदर्शित किया गया है.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 11 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

Fighter Movie की पूरी कहानी भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) पर आधारित है. इसकी शूटिंग असम, हैदराबाद, जम्मू और कश्मीर और मुंबई में हुई है. यहां के एयरफोर्स बेस या स्टेशन पर फिल्म की शूटिंग हुई है. इसमें फिल्म भारतीय वायुसेना के कैडेट्स ने भी कलाकार की भूमिका निभाई है.

इस फिल्म की शूटिंग असम के तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन, हैदराबाद के पास डुंडीगल एयरफोर्स एकेडमी और कश्मीर के पहलगाम बेस पर हुई है. फिल्म में कई जगहों पर ग्राफिक्स और वीएफएक्स का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन जिन जगहों को दिखाया गया है, उनमें से कई ओरिजिनल हैं. हथियार और फाइटर जेट भी ओरिजिनल हैं. 

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आइए... जानते हैं कि इस फिल्म में कौन-कौन से एयरक्राफ्ट्स का इस्तेमाल किया गया है. 

ध्रुव अटैक हेलिकॉप्टर (Dhruv Attack Helicopter)

दीपिका पादुकोण इस फिल्म में जम्मू-कश्मीर की वादियों में ध्रुव अटैक हेलिकॉप्टर उड़ाते हुए दिख रही हैं. इंडियन एयरफोर्स के पास 107, इंडियन आर्मी के पास 191 और नेवी के पास 14 हेलिकॉप्टर्स हैं. नेवी ने 11 और आर्मी ने 73 हेलिकॉप्टर और ऑर्डर कर रखे हैं. इन ऑर्डर से ही पता चलता है कि ये कितने काम का है. ध्रुव हेलिकॉप्टर को दो पायलट उड़ाते हैं. इनमें 12 सैनिक बैठ सकते हैं. 

52.1 फीट लंबे इस हेलिकॉप्टर की ऊंचाई 16.4 फीट है. अधिकतम गति 291 KM प्रतिघंटा है. यह एक बार में 630 किमी तक उड़ान भर सकता है. अधिकतम 20 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. जब बात होती है यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की मतलब वो आमतौर पर जवानों और कार्गो ले आने और ले जाने का काम करता है. इसी के प्लेटफॉर्म पर लाइट कॉम्बैटर हेलिकॉप्टर प्रचंड, रुद्र और लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर बने हैं.  

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पिलेटस पीसी-7 ट्रेनर विमान (Pilatus PC-7 MK2 Trainer Aircraft)

ऊपर दी गई तस्वीर में ऋतिक रोशन कई एयरक्राफ्ट्स के सामने से आते दिख रहे हैं. यह पिलेटस पीसी-7 एमके2 ट्रेनर एयरक्राफ्ट है. हाल ही में हैदराबाद में यह प्लेन क्रैश हुआ था. इसमें दो पायलट बैठते हैं. पहला इंस्ट्रक्टर और दूसरा स्टूडेंट पायलट. 32.1 फीट लंबे इस प्लेन की ऊंचाई 10.6 फीट है. टेकऑफ के समय यह अधिकतम 2700 किलोग्राम वजन लेकर उड़ान भर सकता है. इसमें 474 लीटर फ्यूल आता है. 

यह अधिकतम 412 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड से उड़ सकता है. लेकिन आमतौर पर इसे 316 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ाया जाता है. यह बार फ्यूल भरने पर यह 1200 किलोमीटर की उड़ान भर सकता है. अधिकतम 33,010 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. ज्यादा से ज्यादा साढ़े चार घंटे तक उड़ान भर सकता है. इसमें 6 हार्डप्वाइंट्स है. जिसमें कुल 1040 किलोग्राम के बम या रॉकेट्स लगाए जा सकते हैं. 

एफ-16 फाइटिंग फॉल्कन (F-16 Fighting Falcon)

फिल्म के एक सीन में एक डॉग फाइट में हरे रंग का फाइटर जेट दिखाया जाता है. जो F-16 फाइटिंग फॉल्कन है. अमेरिका द्वारा बनाया गए सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक. 48 सालों से कई देशों का भरोसेमंद फाइटर जेट. अब तक करीब 4604 यूनिट्स बनाए गए हैं. इस फाइटर प्लेन को एक पायलट उड़ाता है. 49.5 फीट लंबे प्लेन में एक बार में 3200 किलोग्राम फ्यूल आता है. यह अधिकतम 2178 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से उड़ सकता है. पूरे हथियारों के साथ इसकी कॉम्बैट रेंज 546 किलोमीटर है. 

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इसमें एक 20 मिमी की रोटरी कैनन लगी है. जो प्रतिमिनट 511 राउंड फायर करती है. इसके अलावा इसमें 2 एयर-टू-एयर मिसाइल, 6 अंडर विंग, 3 अंडर फ्यूसलेज पाइलॉन बम लगाए जा सकते हैं. इसके अलावा 4 रॉकेट या 6 हवा से हवा, हवा से सतह या हवा से शिप पर मार करने वाली मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. या फिर इनका मिश्रण. इसमें आठ बम भी लगाए जा सकते हैं. 

सुखोई एसयू-30एमकेआई (Sukhoi Su-30MKI)

इस फिल्म में ऋतिक रोशन जिस विमान को उड़ा रहे हैं, वो सुखोई सू-30 फाइटर जेट है. भारतीय वायुसेना के पास 272 Su-30MKI हैं. यह इकलौता ऐसा फाइटर जेट है, जिसे अलग-अलग देश अपने हिसाब से ढाल लेते हैं. या बदलाव करवाते हैं. भारत में इसे HAL बनाती है. एमकेआई का मतलब होता है- Modernised Commercial Indian. 

सुखोई की लंबाई 72 फीट है. विंगस्पैन 48.3 फीट है. ऊंचाई 20.10 फीट है. इसका वजन 18,400 KG है. यह फाइटर जेट अधिकतम 2120 किमी प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. रेंज भी 3000 km है. बीच रास्ते में ईंधन मिले तो यह 8000 km तक जा सकता है. यह 57 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. 

Su-30MKI में 30mm की ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है. जो एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है. यानी दुश्मन का विमान, ड्रोन या हेलिकॉप्टर बच नहीं सकते. इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं. इसमें 4 तरह के रॉकेट्स लगा सकते हैं. चार तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम लग सकते हैं. या फिर इन सबका मिश्रण लगाया जा सकता है. 

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Su-30MKI के हार्डप्वाइंट्स में हथियारों को दागने की सुविधा ज्यादा है. अगर मल्टीपल रैक्स लगाए जाएं तो इसमें 14 हथियार लगा सकते हैं. यह कुल 8130 KG वजन का हथियार उठा सकता है. सुखोई में लगने वाली ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 500 km है. भविष्य में ब्रह्मोस मिसाइलों को मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी तैनात करने की योजना है.  

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