Advertisement

पहला Tejas MK1-A फाइटर जेट अक्टूबर अंत तक मिलेगा वायुसेना को, ये है खासियत

स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस का अपग्रेडेड वर्जन यानी MK1-A भारतीय वायुसेना को अक्टूबर अंत तक मिलने की संभावना है. कुछ दिन पहले ही वायुसेना ने HAL को इनकी डिलिवरी जल्दी करने को कहा था. वायुसेना ने एचएएल को 83 तेजस-एमके1ए फाइटर जेट बनाने को कहा है. इस साल मार्च में इसकी पहली उड़ान हुई थी.

अक्टूबर अंत तक तेजस-एमके1ए फाइटर जेट भारतीय वायुसेना को मिल जाएगा. (फोटोः रक्षा मंत्रालय) अक्टूबर अंत तक तेजस-एमके1ए फाइटर जेट भारतीय वायुसेना को मिल जाएगा. (फोटोः रक्षा मंत्रालय)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2024,
  • अपडेटेड 12:36 PM IST

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) भारतीय वायुसेना को उसका पहला लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस एमके-1ए अक्टूबर अंत तक दे सकता है. इस स्वदेशी लड़ाकू विमान की पहली उड़ान मार्च में हो चुकी है. तब से अब तक इसके इंटीग्रेशन ट्रायल्स चल रहे हैं. यानी अलग-अलग यंत्रों और हथियारों को लगाकर उसकी टेस्टिंग हो रही है.  

इंडियन एयरफोर्स ने 83 तेजस एमके-1ए का ऑर्डर HAL को दिया था. इसके लिए 48 हजार करोड़ रुपए की लागत आई है. तेजस के आने से वायुसेना के पुराने मिग सीरीज के विमान को हटा दिया जाएगा. नए तेजस के साथ राजस्थान के जोधपुर में तीसरा स्क्वॉड्रन बनाया जाएगा. यानी पाकिस्तान किसी भी तरह की हिमाकत नहीं कर सकता. यह फाइटर जेट दुनिया का सर्वश्रेष्ठ हल्का लड़ाकू विमान है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: हिजबुल्लाह ने इजरायल पर 1300 से ज्यादा ड्रोन और रॉकेटों से किया हमला , मिलिट्री बेस तबाह

आइए जानते हैं इसकी खासियतों को...  

तेजस एमके-1ए फाइटर जेट में डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर (DFCC) को लगाया गया है. साधारण भाषा में मतलब होता है कि फाइटर जेट से मैन्यूअल फ्लाइट कंट्रोल्स हटाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस लगाना. यानी कंप्यूटर विमान को उड़ाते समय पायलट के मुताबिक संतुलित रखता है. 

इस सिस्टम से राडार, एलिवेटर, एलिरॉन, फ्लैप्स और इंजन का नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होता है. फ्लाई बाय वायर फाइटर जेट को स्टेबलाइज करता है. यह विमान को सुरक्षित बनाता है. 

यह भी पढ़ें: भारत के नए टैंक ने बरसाए गोले... देखिए टारगेट पर सटीके निशाने का Video, जानिए क्यों जरूरत पड़ी इस टैंक की?

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है तेजस

Advertisement

विमान के उन्नत संस्करण, तेजस एमके-1ए में उन्नत मिशन कंप्यूटर, उच्च प्रदर्शन क्षमता वाला डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर (DFCC Mk-1A), स्मार्ट मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले (SMFD), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार, एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट आदि सुविधाएं हैं. 

यह फाइटर जेट वैसे तो तेजस एमके-1 की तरह ही है, इसमें कुछ चीजें बदली गई हैं. जैसे इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूईट, उत्तम एईएसए राडार, सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर, राडार वॉर्निंग रिसीवर लगा है. इसके अलावा इसमें बाहर से ECM पॉड भी लगा सकते हैं.

यह भी पढ़ें: भारत की 'सीक्रेट मिसाइल' का सफल परीक्षण, एक सेकेंड में डेढ़ km की स्पीड से करती है हमला 

2200 km/hr की स्पीड, 739 km की कॉम्बैट रेंज

मार्क-1ए पिछले वैरिएंट से थोड़ा हल्का है. लेकिन यह आकार में उतना ही बड़ा है. यानी 43.4 फीट की लंबाई. 14.5 फीट की ऊंचाई. अधिकतम 2200 km/hr की स्पीड से उड़ान भर सकता है. कॉम्बैट रेंज 739 किलोमीटर है. वैसे इसका फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है. 

यह विमान अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें कुल मिलाकर 9 हार्ड प्वाइंट्स हैं. इसके अलावा 23 मिलिमीटर की ट्विन-बैरल कैनन लगी है. हार्डप्वाइंट्स में 9 अलग-अलग रॉकेट्स, मिसाइलें, बम लगा सकते हैं. या फिर इनका मिश्रण कर सकते हैं.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement