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Aero India 2025 में Tejas Mk1A फाइटर जेट दिखाया गया. अपनी शक्ति और सटीकता का प्रदर्शन किया. 'अल्फा' के नाम से जाने जाना वाला यह जेट भारतीय वायु सेना की युद्ध शक्ति को दिखाने के लिए तैयार है. 83 तेजस एमके1ए जेट विमानों की डिलीवरी में की जानी है. जिसकी लागत 48,000 करोड़ रुपए है.
एमके-1ए जेट में तेजी से मैनोवर करने की क्षमता, उन्नत सेंसर सूट, उन्नत मिशन और डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम और कटिंग-एज नेट-सेंट्रिक युद्ध क्षमताएं हैं. इसके अलावा विमान में अब एस्ट्रा बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (बीवीआर) मिसाइलें और सटीक-निर्देशित हथियार शामिल हैं.
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भारतीय वायु सेना ने पहले ही एचएएल से 83 जेट्स का ऑर्डर दे दिया है, जिसमें लीड विमान को जल्द ही अपना मिलिटरी टाइप सर्टिफिकेशन मिलने की उम्मीद है. एक बार शामिल होने के बाद ये जेट भारत की हवाई श्रेष्ठता को मजबूत करेंगे.
42 स्क्वॉड्रनों की जरूरत... हैं सिर्फ 31 स्क्वॉड्रन
वायुसेना वर्तमान में लड़ाकू स्क्वाड्रनों में गंभीर कमी का सामना कर रही है. जबकि वायुसेना को पाकिस्तान और चीन के साथ दो-मोर्चे के खतरे का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए 42 स्क्वाड्रनों की आवश्यकता है. वर्तमान में केवल 31 सक्रिय स्क्वाड्रनों का संचालन करती है. हर एक में 16-18 विमान हैं.
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ऐसी खतरनाक स्थिति में पुराने विमान रिस्की
पुराने विमानों से ऐसी स्थिति से नहीं निपटा जा सकता. वायुसेना अगले साल सोवियत-युग के मिग-21 जेट विमानों की दो स्क्वाड्रनों को हटाने वाली है. जबकि जगुआर, मिराज-2000 और मिग-29 जैसे अन्य विमानों को 2029-30 तक हटाएगी. इससे लगभग 250 लड़ाकू जेट विमानों की और कमी हो सकती है. ये 1980 के दशक में शामिल किए गए थे.
MK-1A जेट की खासियत
तेजस एमके-1ए फाइटर जेट में डिजिटल फ्लाई बाय वायर फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर (DFCC) को लगाया गया है. DFCC का साधारण भाषा में मतलब होता है कि फाइटर जेट से मैन्यूअल फ्लाइट कंट्रोल्स हटाकर इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस लगाना. यानी कंप्यूटर विमान को उड़ाते समय पायलट के मुताबिक संतुलित रखता है.
इस सिस्टम से राडार, एलिवेटर, एलिरॉन, फ्लैप्स और इंजन का नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होता है. फ्लाई बाय वायर फाइटर जेट को स्टेबलाइज करता है. यह विमान को सुरक्षित बनाता है.
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अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है तेजस
विमान के उन्नत संस्करण, तेजस एमके-1ए में उन्नत मिशन कंप्यूटर, उच्च प्रदर्शन क्षमता वाला डिजिटल फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर (DFCC Mk-1A), स्मार्ट मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले (SMFD), एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार, एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन जैमर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट आदि सुविधाएं हैं.
यह फाइटर जेट वैसे तो तेजस एमके-1 की तरह ही है, इसमें कुछ चीजें बदली गई हैं. जैसे इसमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूईट, उत्तम एईएसए राडार, सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर, राडार वॉर्निंग रिसीवर लगा है. इसके अलावा इसमें बाहर से ECM पॉड भी लगा सकते हैं.
2200 km/hr की स्पीड, 739 km की कॉम्बैट रेंज
मार्क-1ए पिछले वैरिएंट से थोड़ा हल्का है. लेकिन यह आकार में उतना ही बड़ा है. यानी 43.4 फीट की लंबाई. 14.5 फीट की ऊंचाई. अधिकतम 2200 km/hr की स्पीड से उड़ान भर सकता है. कॉम्बैट रेंज 739 किलोमीटर है. वैसे इसका फेरी रेंज 3000 किलोमीटर है.
यह विमान अधिकतम 50 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. इसमें कुल मिलाकर 9 हार्ड प्वाइंट्स हैं. इसके अलावा 23 मिलिमीटर की ट्विन-बैरल कैनन लगी है. हार्डप्वाइंट्स में 9 अलग-अलग रॉकेट्स, मिसाइलें, बम लगा सकते हैं. या फिर इनका मिश्रण कर सकते हैं.