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What is Interception: आयरन डोम, Arrow-3... इन हथियारों से इजरायल ने तबाह किए ईरान के 99% मिसाइल और ड्रोन?

ईरान ने 331 मिसाइलों और ड्रोन्स से इजरायल पर हमला किया. इजरायल और उसके मित्र देशों ने मिलकर 99% हवाई खतरों को नेस्तनाबूत कर दिया. कैसे? किसे कहते हैं 99% इंटरसेप्शन. क्या होता है इंटरसेप्शन में?

ये तस्वीर इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम के एक्टिव मोड की है, जब सामने से आ रही मिसाइलों को मारने के लिए आयरन डोम फायरिंग करता है. (फोटोः AFP) ये तस्वीर इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम के एक्टिव मोड की है, जब सामने से आ रही मिसाइलों को मारने के लिए आयरन डोम फायरिंग करता है. (फोटोः AFP)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:48 PM IST

ईरान ने कुल मिलाकर 331 मिसाइलों और ड्रोन्स से इजरायल पर 13 अप्रैल 2024 की रात हमला किया. इनमें शाहेद-136 आत्मघाती ड्रोन्स थे. जो 2000 किलोमीटर की दूरी तक जा सकते हैं. 50 किलो वॉरहेड ले जा सकते हैं. इसके अलावा एमाद बैलिस्टिक मिसाइल दागी. ये 1700 किलोमीटर रेंज की मिसाइल है. 

यहां नीचे देखिए 99 फीसदी इंटरसेप्शन का शानदार वीडियो...

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इसके अलावा कुछ और बैलिस्टिक मिसाइलों से भी हमला किया जिसका जिक्र नहीं किया गया है. लेकिन 30 से ज्यादा Paveh क्रूज मिसाइलों से इजरायल पर हमला किया. इसकी रेंज 1650 किलोमीटर है. लेकिन इतने हमलों के बावजूद इजरायल ने 99 फीसदी हवाई खतरों को अपनी एयर डिफेंस प्रणाली से मार गिराया. 

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सभी 185 आत्मघाती ड्रोन्स को इजरायल के आयरन डोम और Arrow-3 हाइपरसोनिक सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम ने मार गिराया. 110 बैलिस्टिक मिसाइलों में से 103 को मार गिराया. ईरान की ओर से दागी गई सभी 36 क्रूज मिसाइलें भी इजरायल ने मार गिराईं. सिर्फ सात बैलिस्टिक मिसाइलों को इजरायल गिरा नहीं पाया. 

क्या होता इंटरसेप्शन? 

जब दुश्मन अपने फाइटर जेट, मिसाइल, हेलिकॉप्टर या ड्रोन से हमला करता है, तब उसे अपनी सीमा पर आने से पहले आसमान में या अंतरिक्ष में रोक कर उसे बर्बाद कर देना. या फिर सीधा हमला करके उसे खत्म कर देने को ही इंटरसेप्शन कहते हैं. इस काम में इजरायल का आयरन डोम, सी-डोम और ऐरो एयर डिफेंस सिस्टम ने मदद की. 

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एमाद मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल

एमाद मिसाइल लिक्विड-फ्यूल मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. इसका व्यास 1.25 मीटर है. इसमें एक ही वॉरहेड लगता है. जिसका वजन 750 किलोग्राम होता है. इसकी CEP 10 मीटर है. यानी टारगेट के पांच10 मीटर इधर-उधर भी गिरा तभी टारगेट पूरी तरह से खत्म हो जाएगा. इसकी रेंज 1700 किलोमीटर है. 

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इतना ही नहीं इस मिसाइल में मैन्यूवरेबल रीएंट्री व्हीकल (MaRV) की खासियत भी है. यानी जरूरत पड़ने पर इसकी दिशा बदली जा सकती है. इसे इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) की कैटेगरी में भी रखा जाता है. यह देखने में शहाब-3 मिसाइल की तरह दिखती है. 2016 से ईरानी सेना इसका इस्तेमाल कर रही है. 

गद्र-110 मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल

Ghadr-110 भी मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है. इसकी रेंज 1800 से 2000 km है. यह 11,113.2 km/hr की स्पीड से टारगेट की तरफ बढ़ती है. इसे एंटी सैटेलाइट मिसाइल और IRBM की कैटेगरी में भी रखते हैं. यह मिसाइल इनर्शियल गाइडेंस और जीपीस नेविगेशन के आधार पर चलती है. दो स्टेज की मिसाइल में पहला स्टेज लिक्विड और दूसरा सॉलिड फ्यूल वाला है. इसकी लंबाई 15.5 मीटर है. 

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शाहेद ड्रोन भी कमाल का... 

यह ईरान का लॉयटरिंग म्यूनिशन है. यानी आत्मघाती हमलावर ड्रोन. इस ड्रोन का इस्तेमाल रूस-यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है. इसका विंगस्पैन 3 मीटर का होता है. लंबाई 2.5 मीटर होती है. इसकी रेंज 2000 किलोमीटर है.  

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एक रात में खर्च हो गए एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा... 

ईरान ने 110 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी, जिनकी कुल कीमत करीब 250 से 417 करोड़ रुपए. फिर उसने 36 से 45 क्रूज मिसाइलें दागी, जिनकी कीमत करीब 33.41 से 58.47 करोड़ रुपए हैं. 170 शाहेद आत्मघाती ड्रोन्स दागे. इनकी कीमत करीब 33 से 54 करोड़ रुपए है. कुल मिलाकर ईरान ने इजरायल पर हमले के लिए 520 करोड़ रुपए के आसपास खर्च किया. जबकि इजरायल को खुद को बचाने में 92 हजार करोड़ रुपए खर्च कर डाले. . 

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