
भारतीय सेना ने पिछले साल नवंबर में रूस के साथ डील की थी. ताकि 120 लॉन्चर और 400 मिसाइलें खरीद सके. ये मिसाइल सिस्टम लाइसेंस के तहत देश में ही बनाए गए हैं. इनका नाम है Igla-S Manpads. यह खास तरह के एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम हैं, जो किसी भी तरह के हवाई खतरे को नष्ट कर सकते हैं.
भारतीय सेनाओं के पास इसके पुराने वर्जन मौजूद हैं. इसकी मदद से दुश्मन के इग्ला-एस एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल का वजन 10.8 kg है. जबकि पूरे सिस्टम का वजन 18 kg. सिस्टम की लंबाई 5.16 फीट होती है. व्यास 72 mm. इस मिसाइल की नोक पर 1.17 kg का विस्फोटक लगाते हैं. इसकी रेंज 5 से 6 km है.
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यह मिसाइल 2266 km/hr की स्पीड से अधिकतम 11 हजार फीट तक जा सकती है. नई इग्ला-एस हैंड-हेल्ड एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल भारतीय सेना में शामिल पुरानी इग्ला मिसाइल को बदलेगी. पुरानी इग्ला मिसाइल 1990 के दशक में सेना में शामिल की गई थी.
रूस के साथ पुराने संबंधों का फायदा
भारत इन मिसाइलों को मेक-इन-इंडिया मिशन के तहत देश में बनाना चाहता है. रूस कई सालों से भारत को हथियार देता आ रहा है. दोनों देशों के बीच सैन्य हथियारों को लेकर कई समझौते हुए हैं. रूसी हथियार एक्सपोर्ट एजेंसी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ एलेक्जेंडर मिखीव ने कहा कि भारत और रूस के बीच इग्ला-एस एयर डिफेंस सिस्टम के लाइसेंस के लिए समझौता हो चुका है.
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पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनाती
भारत ने S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर लगाया है. यह रूस का सबसे अत्याधुनिक हवाई सुरक्षा सिस्टम है. यह सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है. यूक्रेन के साथ युद्ध के चलते भारत ने कभी भी रूस की सीधे तौर पर आलोचना नहीं की.