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क्या चीन-PAK की मिसाइलों से बचने के लिए भारत के पास है पर्याप्त डिफेंस सिस्टम?

भारत के दो तरफ उसके दुश्मन हैं. दोनों के पास खतरनाक मिसाइलों का जखीरा है. ड्रोन्स हैं. अटैक हेलिकॉप्टर्स हैं. फाइटर जेट्स हैं. ऐसे में भारत को चाहिए खतरनाक एयर डिफेंस सिस्टम. क्या भारत के पास ऐसा कोई एयर डिफेंस सिस्टम है, जैसे इजरायल के पास आयरन डोम है.

इजरायल के आयरन डोम की तरफ भारत के पास कई लेयर वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. (फोटोः AFP) इजरायल के आयरन डोम की तरफ भारत के पास कई लेयर वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. (फोटोः AFP)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 3:10 PM IST

भारत की सुरक्षा का लेवल बहुत जटिल है. सीमाओं और जरूरी स्थानों की सुरक्षा के लिए सटीक एयर डिफेंस सिस्टम की जरूरत है, ताकि चीन या पाकिस्तान के किसी भी हवाई हमले को करारा जवाब दिया जा सके. इजरायल के आयरन डोम जैसी हथियार प्रणाली की जरूरत है. क्या भारत में ऐसी प्रणाली है. या नहीं. 

पाकिस्तान और चीन के पास के पास कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. लंबी दूरी के रॉकेट्स हैं. कुछ तो 300 किलोमीटर की रेंज से भी ज्यादा के हैं. ये भारतीय सीमा के पास के शहरों, कस्बों और गांवों के लिए खतरा है. इजरायल का आयरन डोम कम दूरी के रॉकेट्स, आर्टिलरी गोले और बैलिस्टिक मिसाइलों को आसमान में ही खत्म कर देता है. इसलिए भारत को भी ऐसे ही रक्षाकवच की जरूरत है. 

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भारत की जो भौगोलिक स्थिति है. जिस तरह से उसके दुश्मन दो अलग-अलग लोकेशन पर मौजूद हैं, उसके हिसाब से भारत को बहुत बड़े पैमाने पर खतरों का सामना करना है. इन खतरों में बैलिस्टिकि, क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों और हथियारों का खतरा है. इसलिए भारत को ज्यादा सटीक बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम चाहिए. जिसमें कई तरह के लेयर हों. कम दूरी से लेकर अंतरिक्ष तक हमला करने लायक मिसाइलें. 

अगर विदेश से कोई तकनीक मंगवाकर लगाएंगे तो उसमें फेल होने के चांस ज्यादा है. इसलिए भारत को अपने एयर डिफेंस सिस्टम को विदेशी डिफेंस सिस्टम के साथ मिलाकर तैनात करने होंगे. भारत के एयर डिफेंस सिस्टम को मल्टी लेयर बनाना होगा. जैसे- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD) और तीसरा लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल (LRSAM). 

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रूस से लिए गए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से खाली काम नहीं चलेगा. इसके अलावा भारत को अपने छोटे से लेकर बड़े एयर डिफेंस सिस्टम को आपस में जोड़कर रखना होगा. ताकि वो बेहतर तरीके और सामंजस्य के साथ काम कर सके. आइए जानते हैं कि भारत के पास कौन-कौन से एयर डिफेंस सिस्टम हैं... 

इंडियन बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस प्रोग्राम 

इस प्रोग्राम के तहत कई रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए डिफेंस सिस्टम बनाया गया है. इसके लिए दो लेयर वाली इंटरसेप्टर मिसाइलें बनाई गईं. ये हैं- पृथ्वी एयर डिफेंस (PAD), जिसकी मिसाइलें बेहद अधिक ऊंचाई पर जाकर दुश्मन टारगेट को बर्बाद कर सकती हैं. दूसरा है एडवांस्ड एयर डिफेंस (AAD), इसकी मिसाइलें कम ऊंचाई वाले टारगेट्स को मार गिराने के लिए बनाई गई हैं. 

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ये मिसाइल सिस्टम 5 हजार किलोमीटर या उससे ज्यादा दूरी से आने वाली हवाई खतरों को हवा में ही खत्म कर देती हैं. क्योंकि भारत को हमेशा से पाकिस्तान और चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों को खतरा बना हुआ है. PAD सिस्टम की मिसाइलों की रेंज 300 से 2000 किलोमीटर है. ये जमीन से 80 किलोमीटर ऊपर दुश्मन टारगेट को नष्ट कर सकते हैं. ये मिसाइलें 6174 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. इसमें पृथ्वी सीरीज की सभी मिसाइलें शामिल हैं. 

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अगर एडवांस्ड एयर डिफेंस यानी AAD की बात करें तो इसकी मिसाइलें वायुमंडल के नीचे अधिकतम 30 किलोमीटर की ऊंचाई तक टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं. इनकी ऑपरेशनल रेंज 150 से 200 किलोमीटर है. ये मिसाइलें 5556 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. 

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S-400 एयर डिफेंस सिस्टम

S-400 एक बार में एक साथ 72 मिसाइल छोड़ सकती है. इस एयर डिफेंस सिस्टम को कहीं मूव करना बहुत आसान है क्योंकि इसे 8X8 के ट्रक पर माउंट किया जा सकता है. माइनस 50 डिग्री से लेकर माइनस 70 डिग्री तक तापमान में काम करने में सक्षम इस मिसाइल को नष्ट कर पाना दुश्मन के लिए बहुत मुश्किल है. क्योंकि इसकी कोई फिक्स पोजिशन नहीं होती. इसलिए इसे आसानी से डिटेक्ट नहीं कर सकते.  

S-400 मिसाइल सिस्टम में चार तरह की मिसाइलें होती हैं जिनकी रेंज 40, 100, 200, और 400 km तक होती है. यह सिस्टम 100 से लेकर 40 हजार फीट तक उड़ने वाले हर टारगेट को पहचान कर नष्ट कर सकता है.  एस-400 मिसाइल सिस्टम का राडार बहुत अत्याधुनिक और ताकतवर है. इसका रडार 600 km तक की रेंज में करीब 300 टारगेट ट्रैक कर सकता है. यह सिस्टम मिसाइल, एयरक्राफ्ट या फिर ड्रोन से हुए किसी भी तरह के हवाई हमले से निपटने में सक्षम है. 

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शॉर्ट रेंज इंटरसेप्शन... आकाश, पिचोरा जैसी मिसाइलें 

पेचोरा मिसाइल सिस्टम

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है पेचोरा (Pechora). भारत के पास इसके 30 स्क्वॉड्रन्स हैं. जो अलग-अलग सीमाओं पर सुरक्षा के लिए तैनात हैं. इसके 12 वैरिएंट्स हैं, जिनका इस्तेमाल दुनियाभर के 31 देश कर रहे हैं. इसमें लगी मिसाइल 953 kg वजनी होती है. 

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इसकी नाक पर 60 kg का फ्रैगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव हथियार लगाते हैं. इसके ऑपरेशनल रेंज 3.5 से 35 km है. अधिकतम 59 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी स्पीड 3704 से 4322 km/hr की गति से उड़ती है. पेचोरा मिसाइल की सबसे खास बात है कम ऊंचाई पर उड़ते हुए टारगेट को खत्म करने की ताकत. इसका राडार 32 से 250 किलोमीटर तक की रेंज में दुश्मन पर नजर रखता है. 

मिसाइल थोड़ा पुराने टेक्नीक पर काम करती है, यानी रेडियो कमांड गाइडेंस सिस्टम पर. कोई भी अत्याधुनिक विमान सबकुछ बंद कर सकता है लेकिन वह अपना रेडियो बंद नहीं कर सकता. अगर दुश्मन का विमान, हेलिकॉप्टर रेडियो बंद नहीं कर पाएगा तो यह मिसाइल उसे ध्वस्त कर देगी. यहां तक कि छोटे-मोटे ड्रोन्स का भी खात्मा कर देती है.

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आकाश एयर डिफेंस सिस्टम

आकाश मिसाइल सिस्टम की सिंगल यूनिट में चार मिसाइलें होती हैं. जो अलग-अलग टारगेट्स को ध्वस्त कर सकती हैं. देश में इसके 3 वैरिएंट मौजूद हैं- पहला आकाश एमके- इसकी रेंज 30KM है. दूसरा एमके-2 - रेंज 40KM है. तीसरा एनजी - रेंज 80KM है. आकाश-एनजी 20 km की ऊंचाई तक जाकर दुश्मन के विमान या मिसाइल को नष्ट कर सकती है. 

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इसकी गति 3087 km/hr है. आकाश-एनजी में डुअल पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर है, जो इसकी गति को बढ़ाता है. इसकी रेंज 40 से 80 km है. साथ ही इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे मल्टी फंक्शन राडार लगा है जो एकसाथ कई दुश्मन मिसाइलों या विमानों को स्कैन कर सकता है. 

आकाश-एनजी का कुल वजन 720 kg है. इसकी लंबाई 19 फीट और व्यास 1.16 फीट है. ये अपने साथ 60 kg वजन का हथियार ले जा सकता है. आकाश-एनजी मिसाइल के पुराने संस्करण को चीन के साथ हुए सीमा विवाद के दौरान लद्दाख स्थित लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर भी तैनात किया गया था.  

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SpyDer... स्पीड इतनी की राडार भी पकड़ न पाए

सीमा के आसपास इसे तैनात कर दिया तो दुश्मन का कोई भी हवाई हमला बेकार जाएगा. अन्य एयर डिफेंस सिस्टम की तुलना में ये हल्का, घातक और सटीक है. इस मिसाइल से आप एयरक्राफ्ट, फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर, ड्रोन्स या प्रेसिशन गाइडेड मिसाइलों को निशाना बना सकते हैं. 

स्पाइडर के दो वैरिएंट्स हैं. एक स्पाइडर-SR यानी शॉर्ट रेंज. दूसरा स्पाइडर-MR यानी मीडियम रेंज. दोनों हर मौसम में काम करते हैं. दो तरह की होती हैं स्पाइडर मिसाइलें. स्पाइडर पाइथन-5 का वजन 105 kg है. जबकि डर्बी का 118 kg है. पाइथन से 40 km के आसपास की हवाई सुरक्षा मिलती है. जबकि, स्पाइडर एमआर और एलआर (Long Range) से 80 km तक. ये दोनों ही मिसाइलें 360 डिग्री में घूमकर फायरिंग कर सकती हैं. 

पाइथन 10.2 फीट लंबी है. वहीं, डर्बी की 11.11 फीट है. पाइथन 11 kg का और डर्बी 23 kg का वॉरहेड ले जा सकता है. पाइथन की रेंज 20 km है जबकि डर्बी की 50 km. पाइथन 30 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है. वहीं, डर्बी 52 हजार फीट की ऊंचाई तक.   

इसकी गति सबसे खतरनाक है. ये मिसाइलें 4900 km/hr की स्पीड से टारगेट की ओर बढ़ती हैं. दोनों ही मिसाइलें टारगेट को लॉक करने के बाद दाग दीजिए. उसके बाद भूल जाइए. ये तब तक नहीं पीछा छोड़तीं, जब तक उसका खात्मा न कर दें. यानी दागो और भूल जाओ. 

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9K33 Osa AK डिफेंस सिस्टम

ये कहीं भी आसानी से पहुंचाया जाने वाला एयर डिफेंस सिस्टम है. यह कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है. यह 17.5 टन के बीएमपी वाहन पर लगी होती हैं. इसे 5 जवान मिलकर चलाते हैं. इसकी ऑपरेशनल रेंज 15 से 18 किलोमीटर है. यह अधिकतम 80 km/hr की स्पीड से चल सकती है. इसमें लगने वाली मिसाइलों की रेंज 15 किलोमीटर होती है. ये अधिकतम 3704 km/hr की स्पीड से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं.  

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2K12 Kub मिसाइलें 

ये सतह से हवा में मार करने वाली निचले और मध्यम लेवल का एयर डिफेंस सिस्टम है. इसके राडार की रेंज 75 किलोमीटर है. इसमें लॉन्चर और मिसाइल का कुल वजन 599 किलो होता है. इसकी मिसाइलों में फ्रैगमेंटेशन ब्लास्ट वॉरहेड लगता है. अधिकतम रेंज 24 किलोमीटर है. इसकी मिसाइलें अधिकतम 46 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकती हैं. मिसाइलें 3457 km/hr की गति से दुश्मन की तरफ बढ़ती हैं. 

LRSAM मिसाइल सिस्टम

भारत ने LRSAM मिसाइल बना लिया है. यह 400 किलोमीटर रेंज वाली स्वदेशी सरफेस-टू-एयर मिसाइल है. यह दुश्मन के हवाई जहाज, फाइटर जेट, रॉकेट, हेलिकॉप्टर या मिसाइल को मार गिराने में सक्षम है. यह 350 से 400 किलोमीटर की रेंज तक हमला कर सकती है. फिलहाल 70 किलोमीटर रेंज वाली मिसाइल बन चुकी है. यह ठीक इजरायल के आयरन डोम की तरह काम करने वाली मिसाइल प्रणाली होगी. यह अधिकतम 16 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकती है. इसके पीछे धुआं नहीं निकलता, इसलिए इसे खोजने में मुश्किल होगी. 

QRSAM मिसाइल सिस्टम

इन मिसाइलों में स्वदेशी रेडियो फ्रिक्वेंसी सीकर लगे हैं. इस सिस्टम में इसके अलावा मोबाइल लॉन्चर, ऑटोमेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, सर्विलांस और मल्टी-फंक्शन राडार होता है. आप इस मिसाइल को दागने के बाद भूल जाइए. यह अपने टारगेट का पीछा करके मारता है.  

QRSAM के ऊपर HMX/TNT या प्री-फ्रैगमेंटेड वॉरहेड लगाया जा सकता है. वॉरहेड का वजन 32 kg हो सकता है. मिसाइल की रेंज 3 से 30 km है. यह 98 फीट ऊंचाई से लेकर 33 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकती है. इसकी अधिकतम गति मैक 4.7 यानी 5757.70 km/hr है. इसे छह ट्यूब वाले लॉन्चर ट्रक से दागा जा सकता है. 

MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम

सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दुश्मन के विमान, हेलिकॉप्टर, सबसोनिक या सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों को मार कर गिरा सकती है. MRSAM का वजन करीब 275 kg है. लंबाई 4.5 मीटर और व्यास 0.45 मीटर होता है. इस मिसाइल पर 60 kg वॉरहेड लोड किया जा सकता है. 

एक बार लॉन्च होने के बाद MRSAM आसमान में सीधे 16 km तक टारगेट को गिरा सकती है. वैसे इसकी रेंज 0.5 km से लेकर 100 km तक है. इसकी गति है 680 मीटर प्रति सेकेंड यानी 2448 km/hr. इसकी गति भी इसे बेहद घातक बनाती है.

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