Advertisement

Ladakh... चार महीने से 12 हजार फीट पर फंसा है भारतीय वायुसेना का अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर... कैसे उतारेंगे नीचे?

Indian Air Force का एक अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर चार महीने से लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों पर फंसा हुआ है. तकनीकी गड़बड़ी की वजह से चीन सीमा के नजदीक उसकी इमरजेंसी लैंडिंग हुई थी. तब से उसे ऊपर से लाने का प्रयास किया जा रहा है. लेकिन सफलता नहीं मिल रही है. वह करीब 12 हजार फीट पर फंसा है.

लद्दाख के खारदूंग ला पास के करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ वायुसेना का अपाचे हेलिकॉप्टर फंसा हुआ है. (फोटोः X/IAF-MCC) लद्दाख के खारदूंग ला पास के करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर एक पहाड़ वायुसेना का अपाचे हेलिकॉप्टर फंसा हुआ है. (फोटोः X/IAF-MCC)
aajtak.in
  • ,
  • 23 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 8:02 PM IST

भारतीय वायुसेना का AH-64 Apache Attack Helicopter चीन सीमा के पास लद्दाख के ऊंचे पहाड़ों पर चार महीने से फंसा है. इस साल 4 अप्रैल को अधिक ऊंचाई और दुरूह परिस्थितियों की वजह से इस हेलिकॉप्टर में कुछ तकनीकी गड़बड़ी हुई थी. इससे इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. दोनों पायलट सुरक्षित निकल आए थे. 

हेलिकॉप्टर तब से खारदूंग ला पास के पास करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर फंसा है. इस पास की अधिकतम ऊंचाई 18,380 फीट है.  बताया जा रहा है कि हेलिकॉप्टर ने पावर जेनरेट नहीं हो पा रहा था, जिसकी वजह से इसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी. इस हेलिकॉप्टर को 'हवा का टैंक' कहा जाता है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: सीमा पार कर पाकिस्तान में गिरा भारतीय ड्रोन, PAK आर्मी के कब्जे में टैक्टिकल UAV

इस साल अप्रैल के आसपास दो महीने में पूरी दुनिया में अपाचे हेलिकॉप्टर में गड़बड़ी को लेकर पांच घटनाएं हुई थीं. जिसमें से एक भारतीय वायुसेना झेल रही है. चार दशकों से यह हेलिकॉप्टर कई देशों में ऑपरेशनल है, लेकिन अब तकनीकी गड़बड़ियों से जूझ रहा है. जो हेलिकॉप्टर खारदूंग ला पास पर फंसा है, वो सियाचिन ग्लेशियर जा रहा था. 

इसे बचाने के दो तरीके हैं... 

रूसी Mi-26 सुपर हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर से इसे उठाया जाए. लेकिन अब इन्हें ग्राउंडेड कर दिया गया है. अमेरिकी चिनूक हैवी लिफ्ट हेलिकॉप्टर से इसे लटका कर बेस तक पहुंचाया जा सकता है. लेकिन लद्दाख का वातावरण और हिमालय की दुरूह भौगोलिक परिस्थितियां ये करने की अनुमति नहीं देती. क्योंकि इतनी ऊंचाई पर बेहद ताकतवर विमानों की इंजन और वजन उठाने की क्षमता कमजोर हो जाती है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: रूस ने क्यों बनाई लकड़ी की पनडुब्बी... किसे बना रहा था बेवकूफ... सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा

दूसरा रास्ता ये है कि इस अपाचे हेलिकॉप्टर को, जहां वो फंसा है, वहीं पर डिस्मैंटल किया जाए. यानी वहीं खोलकर उसके पुर्जे नीचे बेस पर हेलिकॉप्टर के जरिए लाए जाएं. इसकी संभावना ज्यादा दिखती है. इसमें समय ज्यादा लगेगा लेकिन ये ज्यादा सुरक्षित है. 

IAF की घटना के 44 दिन पहले कई घटनाएं

इंडियन एयरफोर्स के अपाचे हेलिकॉप्टर के लद्दाख में फंसने से 44 दिन पहले अमेरिका में ऐसी चार घटनाएं हुईं. 12 फरवरी, 23 फरवरी. दोनों घटनाओं में पायलट मारे गए. 24 मार्च और 26 मार्च को इमरजेंसी लैंडिंग. 24 मार्च वाली घटना को वॉशिंगटन में ज्वाइंट बेस लेविस मैक्कॉर्ड में हुई. इसमें दोनों पायलट गंभीर रूप से जख्मी हो गए. 

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement