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Atharva Tank: मिलिए भारत के नए टैंक अथर्व से, भीष्म की नली और T-72 का शरीर लेकर बना ये फौलाद

देश में नया टैंक बनाया गया है. ये हाइब्रिड टैंक है. इसमें T-72 टैंक की ताकत है तो वहीं T-90 यानी भीष्म टैंक की नली. इस टैंक में तीन नई चीजें लगाई गई हैं. यह टैंक मिसाइल दाग सकता है. ऑटोमैटिक एंटी-एयरक्राफ्ट गन है. साथ ही कमांडर की फायरिंग फैसिलिटी जोड़ी गई है. ये टैंक भारतीय सेना (Indian Army) की ताकत बहुत बढ़ा देगी.

ये है भारतीय सेना का नया मुख्य युद्धक Atharva Tank. ये है भारतीय सेना का नया मुख्य युद्धक Atharva Tank.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 10 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 6:49 PM IST

भारतीय सेना (Indian Army) में बहुत जल्द नया टैंक शामिल हो जाएगा. यह एक हाइब्रिड टैंक है. भारतीय सेना के लिए बनाए गए नए टैंक का नाम है अथर्व (Atharva). इसमें T-72 टैंक की ताकत और बॉडी है. जबकि T-90 Bhisma टैंक की नली (Turret). यह टैंक टी-72 से बड़ा लेकिन भीष्म से छोटा है. लेकिन कई नई ताकतों से लैस है. 

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इस टैंक का पिछले साल से ट्रायल चल रहा था. अब इस टैंक में भयानक ताकत, फायर पावर और अत्याधुनिक तकनीक का मिश्रण किया गया है. यह टैंक की इंजन की ताकत 780 HP है, जो टी-72 की थी. अगर ताकत से वजन के दर को देखें तो यह टी-72 और टी-90 टैंक से ज्यादा बेहतर है. टी-72 में यह दर 17.8 है. टी-90 भीष्म में 17.3 है. लेकिन अथर्व में यह 21.5 है. 

टी-72 टैंक 48 किलोमीटर प्रतिघंटा और भीष्म यानी टी-90 टैंक 45 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलते थे. लेकिन अथर्व टैंक 57 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से जंग के मैदान में चलेगा. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये हैं कि इसमें मिसाइल दागने की क्षमता शामिल की गई है. इसके अलावा इसमें ऑटोमैटिक सीओआर कुपोला क्लोज्ड एंटी-एयरक्राफ्ट गन सिस्टम लगाया गया है. साथ ही कमांडर को फायरिंग फैसिलिटी भी दी गई है. 

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अब जानिए भारत के अन्य टैंकों के बारे में... 

अर्जुन 

भारतीय सेना के पास 2004 से सर्विस दे रहा है. यह देश का मुख्य युद्धक टैंक है. इन 120 mm बैरल वाले टैंकों की संख्या 141 है. इसके दो वैरिएंट्स हैं- पहला एमके-1 और एमके-1ए. दोनों ही टैंकों में चार क्रू बैठते हैं. दोनों टैंक एक मिनट में 6 से 8 गोला दागते हैं. एक टैंक में 42 गोले स्टोर कर सकते हैं. अर्जुन टैंक की रेंज 450 km है. 

टी-90 भीष्म 

टी-90 टैंक रूस का मुख्य युद्धक टैंक है, जिसे भारत ने अपने हिसाब से बदलकर उसका नाम भीष्म रख दिया है. 2078 टैंक सेवा में है. 464 का ऑर्डर है. भारत ने रूस के साथ डील किया है कि वह 2025 तक 1657 भीष्म तैनात कर देगा. इस टैंक में तीन लोग बैठते हैं. यह 125 mm स्मूथबोर गन है. इस टैंक पर 43 गोले स्टोर होते हैं. इसकी ऑपरेशनल रेंज 550 km है. 

टी-72 अजेय 

2410 टैंक भारतीय सेना में सेवाएं दे रहे हैं. 1000 टी-72 अजेय टैंक्स को अपग्रेड करने के लिए रूस, पोलैंड और फ्रांस के पास भेजना पड़ता है. जंग के लिए नया अजेय तैयार है. उसका उत्पादन भारत में होगा. इसकी ऑपरेशनल रेंज 460 km है. इसमें भी 125 mm स्मूथबोर गन लगी है. इसकी अधिकतम गति सतह और वैरिएंट के हिसाब से 60 से 75 km/hr है. 

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के9-वज्र टी 

155 mm की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी. ऐसे 100 तोप भारतीय सेना में तैनात हैं. 200 तोप और आएंगे. इसके गोले की रेंज 18 से 54 km तक है. मतलब इतनी दूर बैठा दुश्मन बच नहीं सकता. इसका उपयोग चीन के साथ हुए संघर्ष के दौरान हुआ था. इसमें 48 राउंड गोले स्टोर होते हैं. ऑपरेशनल रेंज 360 km और अधिकतम गति 67 km/hr है. 

विजयंत

भारत में ऐसे 200 तोप हैं. इसे एलओसी के पास तैनात किया गया है. इस टैंक ने 1965 और 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे. इसे चार लोग चलाते हैं. इसकी ऑपरेशनल रेंज 530 किलोमीटर है. टैंक की अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रतिघंटा है. 

टी-55 एमबीटी 

भारतीय सेना के पास ऐसे करीब 700 टैंक हैं. इसकी ऑपरेशनल रेंज 325 किलोमीटर है. अधिकतम गति 51 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसे चार लोग मिलकर चलाते हैं. पाकिस्तान के साथ नैनाकोट के युद्ध में इस टैंक ने पाक सेना की हालत खराब कर दी थी. बसंतर के युद्ध में भी पाकिस्तान के छ्क्के छुड़ा दिए थे. यह टैंक 40 से ज्यादा युद्धों में पूरी दुनिया में उपयोग हो चुका है. 

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