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बन रहा है भारतीय नौसेना का सीक्रेट अंडरग्राउंड सबमरीन बंकर, जानिए INS Varsha के बारे में

भारतीय नौसेना (Indian Navy) एक नया बेस बना रही है. जिसका नाम है आईएनएस वर्षा (INS Varsha). यहां पर भारत की परमाणु पनडुब्बियां रहेंगी. खास बात ये है कि इस बेस पर रखी न्यूक्लियर सबमरीन को कोई देख नहीं पाएगा. क्योंकि इसे अंडरग्राउंड बेस बताया जा रहा है.

कुछ इसी तरह की सुरंगों से लैस होगा INS Varsha Naval Base. इनके अंदर छिपी रहेंगी परमाणु पनडुब्बियां. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी) कुछ इसी तरह की सुरंगों से लैस होगा INS Varsha Naval Base. इनके अंदर छिपी रहेंगी परमाणु पनडुब्बियां. (प्रतीकात्मक फोटोः गेटी)
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 20 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 1:47 PM IST

INS Varsha भारत का सीक्रेट नौसैनिक बेस, जहां पर परमाणु पनडुब्बियां रखी जाएंगी. इसे संचालित करेगा ईस्टर्न नेवल कमांड. जिसका मुख्यालय विशाखापट्टनम में हैं. पहले यह बेस गंगावरम में बनने वाला था. लेकिन बाद में इस विशाखापट्टनम से 50 km दूर रामबिली में बनाया जा रहा है.  

विशाखापट्टनम बंदरगाह पर नौसैनिक और जहाजरानी मंत्रालय के जहाजों का आना जाना रहता है. विजाग में सभी जहाजों के खड़ा होने की जगह नहीं बचती. यहां साल 2006 में 15 युद्धपोत खड़े होते थे. लेकिन अब ये बढ़कर 46 हो चुके हैं. संख्या लगातार बढ़ती भी जा रही है. आईएनएस वर्षा नौसैनिक बेस में कम से कम 8 से 12 पनडुब्बियां रह पाएंगी. 

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INS Varsha को प्रोजेक्ट वर्षा के तहत बनाया जा रहा है. यह नेवल अल्टरनेटिव ऑपरेशन बेस (NAOB) होगा. माना जा रहा है कि अगले साल तक इसका काम पूरा हो जाएगा. इस बेस को बनाने का क्लियरेंस 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया था. तब से इसका काम तेजी से हो रहा है. ताकि नौसैनिक ताकत को बढ़ाया जा सके. 

बेस होगा अंडरग्राउंड, छिपी रहेंगी पनडुब्बियां

रामबिली नौसैनिक बेस आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ले जिले में आता है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि भारतीय नौसेना पूर्वी और पश्चिमी तट दोनों की सुरक्षा आसानी से कर सकती है. ओपन सोर्स सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पहले फेज में ही दर्जनों सुरंगें बना ली गई हैं. यानी ये बेस अंडरग्राउंड होगा. जमीन पर नही दिखेगा. 

परमाणु केंद्र से नजदीक है नौसैनिक अड्डा

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इन सुरंगों के अंदर 8 से 12 परमाणु संचालित बैलिस्टिक सबमरीन और असॉल्ट सबमरीन रखी जाएंगी. यह बेस भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) की फैसिलिटी के नजदीक है. इसकी वजह से यह फैसिलिटी भी ज्यादा सुरक्षित रहेगी. NAOB में अंडरवाटर सुरंगें होंगी, जिसके अंदर पनडुब्बियों को रखा जाएगा. 

चीन और पाकिस्तान की हालत खराब

इसके अलाव यहां पर कई तरह के नौसैनिक युद्धपोत भी खड़े हो सकेंगे. भारत जिस तरह से अपनी नौसैनिक ताकत को बढ़ा रहा है, उससे चीन और पाकिस्तान की हालत खराब है. इस बेस के ऊपर का हिस्सा पहाड़ी है. जिसके ऊपर जंगल है. यह करीब 670 हेक्टेयर में फैला है. बार्क की दूरी यहां से मात्र 20 किलोमीटर है. 

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