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LCH Prachand: थल और वायुसेना को मिलेंगे 156 प्रचंड अटैक हेलिकॉप्टर, रक्षा मंत्रालय का बड़ा फैसला

भारत के रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को RFP जारी करते हुए भारतीय थल सेना के लिए 90 और वायु सेना के लिए 66 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की मांग की है. यानी प्रचंड अटैक हेलिकॉप्टर्स की. आइए जानते हैं कि इन हेलिकॉप्टरों से देश की सेनाओं को कितना फायदा होगा?

रक्षा मंत्रालय ने कुल मिलाकर 156 प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की HAL से मांग की है. रक्षा मंत्रालय ने कुल मिलाकर 156 प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की HAL से मांग की है.
ऋचीक मिश्रा
  • नई दिल्ली,
  • 17 जून 2024,
  • अपडेटेड 4:38 PM IST

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय थल सेना (Indian Army) के लिए 90 और भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के लिए 66 लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर प्रचंड (LCH Prachand) की हिदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से मांग की है. इसे लेकर रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) भी जारी किया है. 

माना जा रहा है कि ये 156 प्रचंड हेलिकॉप्टर्स को चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर तैनात किया जाएगा. हमने पिछले साल आपको बताया था कि यह डील होने वाली है. दोनों सेनाओं को भरपूर ताकत मिलेगी. इन दोनों ही सेनाओं के पास फिलहाल 15 हेलिकॉप्टर्स हैं. 10 वायुसेना के पास. पांच थल सेना के पास. 

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इन हेलिकॉप्टरों को चीन और PAK की सीमाओं के पास तैनात किया गया है. इसके अलावा जो नए हेलिकॉप्टर्स आएंगे, उन्हें भी चीन और पाकिस्तान की स्ट्रैटेजिक प्वाइंट्स पर तैनात किया जाएगा. वायुसेना ने इन हेलिकॉप्टर्स के साथ सेना का युद्धाभ्यास भी किया था. 

PAK सीमा के पास तैनात है पहला स्क्वॉड्रन

पाकिस्तान की सीमा के पास पहला स्क्वॉड्रन तैनात है. जिससे पाकिस्तान सीमा के आसपास निगरानी करना ज्यादा बेहतर हो गया है. साथ ही आतंकी और घुसपैठियों पर लगाम लगाने में मदद मिल रही है. प्रचंड हेलिकॉप्टर्स से कॉम्बैट सर्च एंड रेस्क्यू (CSAR), डिस्ट्रक्शन ऑफ एनेमी एयर डिफेंस (DEAD), काउंटर इनसर्जेंसी (CI) ऑपरेशन, रिमोटली पायलेटेड एयरक्राफ्ट (RPA's) को मार गिराने में आसानी होगी और हाई एल्टीट्यूड बंकर बस्टिंग ऑपरेशंस में मदद मिलेगी. 

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इन हेलिकॉप्टरों को सात यूनिटों में सात अलग-अलग पहाड़ी इलाकों में तैनात किया जाएगा. LCH में दो लोग बैठ सकते हैं. यह 51.10 फीट लंबा, 15.5 फीट ऊंचा है. पूरे साजो सामान के साथ इसका वजन 5800 kg होता है. इसपर 700 KG के हथियार लग सकते हैं. अधिकतम गति 268 किमी प्रतिघंटा है.

लगातार तीन घंटे उड़ान क्षमता, हथियारों से लैस

रेंज 550 किमी है. लगातार 3 घंटे 10 मिनट की उड़ान भरने की क्षमता है. यह पर्याप्त मात्रा में हथियारों और जरूरी चीजों के साथ 16,400 फीट की ऊंचाई पर भी टेकऑफ कर सकता है. LCH में 20 मिमी की एक तोप है. चार हार्डप्वाइंट्स होते हैं यानी रॉकेट्स, मिसाइल और बम लग सकते हैं. या फिर इनका मिश्रण. इस हेलिकॉप्टर का कॉकपिट ग्लास का है. साथ ही फ्रेम कंपोजिट है. भविष्य में इसके वर्जन को और भी ज्यादा अपग्रेड किया जाएगा. 

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करगिल युद्ध के समय पड़ी थी जरूरत इसकी

ध्रुव हेलिकॉप्टरों को विकसित करके ही LCH बनया गया है. इस हेलिकॉप्टर की जरुरत तब पड़ी थी, जब करगिल युद्ध हो रहा था. तब से इसे लेकर काम चल रहा था. ट्रायल्स के दौरान इसने भारत के हर तरह के इलाकों में उड़ान भरने की क्षमता को प्रदर्शित किया था. चाहे वह सियाचिन हो या फिर 13 हजार से लेकर 16 हजार फीट ऊंचे हिमालय के पहाड़ हों. या फिर रेगिस्तान या जंगल. 

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प्रचंड की तैनाती से हटेंगे ये पुराने हेलिकॉप्टर

एलसीएच हेलिकॉप्टरों की यूनिट जोधपुर में इसलिए तैयार की जा रही है ताकि पुराने Mi-35 और Mi-25 हेलिकॉप्टरों को हटाया जा सके. ये दोनों ही हेलिकॉप्टर रूस ने बनाए थे. इनका उपयोग वायु सेना बहुत पहले से करती आ रही है. इनके एक स्क्वॉड्रन तो खत्म कर दिया गया है. उनकी जगह क्योंकि इनकी जगह पर बोईंग कंपनी का एएच-64ई (AH-64E) अपाचे हेलिकॉप्टर तैनात किए गए है.

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