
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बहुत जल्दी तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर को बनाने का काम शुरू होने वाला है. यह पूरी तरह से स्वदेशी होगा. यह विक्रांत क्लास का दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर होगा. इसे बनने कम समय लगेगा. एयरक्राफ्ट कैरियर का डिस्प्लेसमेंट 45 हजार टन होगा. यह अपने ऊपर 28 फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टर तैनात कर सकेगा.
इससे INS Vikrant से पहले रूस से 2013 में आईएनएस विक्रमादित्य मंगवाया गया था. दोनों फिलहाल नौसेना की सेवा में लगे हैं. पिछले साल जनवरी में संसदीय स्टैंडिंग कमेटी ने तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर की जरूरत बताई थी. लेकिन भारत का मकसद है चीन की बराबरी में एयरक्राफ्ट कैरियर खड़े करना. ताकि टक्कर दी जा सके.
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कैसे होगा तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर?
IAC-II यानी दूसरे स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत का डिस्प्लेसमेंट 45 हजार टन रहेगा. लंबाई 860 फीट, बीम 203 फीट, ऊंचाई 194 फीट और ड्रॉट 28 फीट होगी. इसमें 14 डेक होंगे. इसे चार जनरल इलेक्ट्रिक इंजन और दो इलेकॉन कोगैग गीयरबॉक्स से ताकत मिलेगी. प्रोपल्शन के लिए दो शाफ्ट होंगे.
यह अधिकतम 56 km/hr की रफ्तार से समंदर में चल सकेगा. इसकी रेंज 15 हजार km होगी. इसपर एक बार में 196 ऑफिसर औऱ 1449 नौसैनिक एक बार में तैनात हो सकेंगे. बचाव के लिए इस पर कवच एंटी-मिसाइल सिस्टम और मारीच एंडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम लगे होंगे.
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इसके अलावा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल बराक 8 के 32 सेल होंगे. 4 ओटोब्रेड ड्यूअल परपज गन और 4 AK 630 CIWS गन लगी होगी. इस पर राफेल एम, मिग-29के, तेजस फाइटर जेट, टेडबीएफ फाइटर जेट या एएमसीए फाइटर जेट तैनात हो सकते हैं. इसके अलावा कामोव, अपाचे, प्रचंड, एमएच-60आर या ध्रुव हेलिकॉप्टर तैनात हो सकता है.
चीन के पास फिलहाल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हैं
शैनडोंग एयरक्राफ्ट कैरियर
चीन का दूसरा स्वदेशी एयरक्राफ्ट करियर जो STOBAR यानी शॉर्ट टेकऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी सिस्टम पर काम करता है. यह बेहद अत्याधुनिक है. यह 305 मीटर लंबा है. इसकी बीम 75 मीटर की है. इसका डिस्प्लेसमेंट 70 हजार टन है. यह अधिकतम 44 लड़ाकू विमान अपने ऊपर लेकर चल सकता है. कहा जाता है कि इस विमानवाहक पोत वर्तमान दुनिया के सबसे घातक हथियार लगाए गए हैं. लेकिन चीन ने इसकी जानकारी साझा नहीं की है.
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लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर
चीन की पीपुल्स लिबरेशन ऑर्मी नेवी का यह टाइप 001 एयरक्राफ्ट करियर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पोत है. पहले इसे कुजनेतसोव क्लास एयरक्राफ्ट के रूप में विकसित करने की योजना थी लेकिन बाद में इसे चीन ने अपने हिसाब से बनाया. यह 304.5 मीटर लंबा है. इसकी बीम 75 मीटर की है. इसका डिस्प्लेसमेंट 58 हजार टन है. यह अपने ऊपर 50 एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर्स लेकर समुद्र में चल सकता है.
फुजियान सुपरएयरक्राफ्ट कैरियर
चीन के लेटेस्ट सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर पर सेल्फ डिफेंस हथियारों के लिए HQ-10 शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम और 30 mm के H/PJ-11 ऑटोकैनन लगे होंगे. इसका राडार सिस्टम भी आयताकार है, यानी लंबी दूरी से आनी वाली मिसाइलों और फाइटर जेट्स को ट्रैक कर सकता है. साथ ही टारगेट लॉक कर सकता है.
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इसके अलावा यह माना जा रहा है कि इस पर चीन अपने J-15B फाइटर जेट तैनात करेगा. इसके अलावा नेक्स्ट जेनरेशन फाइटर J-35 भी तैनात किया जाएगा. J-15D इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर फाइटर जेट भी जरूरत पड़ने पर तैनात होगा. चीन इस युद्धपोत पर KJ-600 AEWC विमान भी तैनात करेगा, ताकि समंदर में जासूसी कर सके. सिर्फ इतना ही नहीं, फुजिया एयरक्राफ्ट कैरियर पर Z-8/18 यूटिलिटी और ASW हेलिकॉप्टर्स तैनात होंगे. साथ ही नया Z-20 मीडियम हेलिकॉप्टर भी तैनात किया जाएगा.
भारत के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर से कितना और कैसा फायदा
रक्षा एक्सपर्ट मानते हैं कि भारत के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर का सबसे बड़ा फायदा जापान को होगा. आसपास के समुद्री इलाकों में भी शांति का माहौल बनेगा. जानिए कैसे...
1. भारतीय नौसेना मजबूत होगी तो चीन की PLA नेवी को भारत की तरफ ध्यान देना होगा. इससे जापान की तरफ से उसका ध्यान थोड़ा कम होगा. जापान का स्ट्रैटेजिक प्रेशर कम होगा.
2. जैसे ही भारतीय समुद्री इलाके में भारतीय नौसेना की मजबूती बढ़ेगी. आसपास के इलाकों की सुरक्षा बढ़ेगी. इससे जापान, थाईलैंड, म्यांमार जैसे समुद्री तटों वाले देशों के आसपास स्थिरता आएगी. रणनीतिक संतुलन बनेगा.
3. दूसरे एयरक्राफ्ट कैरियर के लॉन्च होते ही भारतीय और जापानी नौसेना ज्यादा नजदीकी से मिलकर युद्धाभ्यास कर सकेंगे. ज्यादा तकनीकी समझौते कर पाएंगे. मैरीटाइम पेट्रोलिंग भी आसान होगी.
4. समुद्री इलाकों में जहां तक जापान नहीं पहुंच पाता, वहां भारतीय नौसेना जा पाएगी. इससे दोनों ही देशों का तनाव कम होगा और समुद्री सुरक्षा बढ़ेगी.