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ताइवान पर चीन का कब्जा जल्द... क्या कोल्ड वॉर मोड से बाहर निकल पाएगा अमेरिका?

अमेरिका को चीन के आसपास परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों, युद्धपोतों, पनडुब्बियों को तैनात करना चाहिए. क्योंकि ऐसी आशंका है कि चीन तीन साल के अंदर ताइवान पर कब्जा करने का प्रयास करेगा. इससे अमेरिका के मित्र देशों को नुकसान होगा. अमेरिका और पूरी दुनिया को भारी क्षति पहुंचेगी. जानिए क्या करना चाहिए अमेरिका को...

रक्षा एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन की हरकतों पर विराम लगाने के लिए अमेरिका को समंदर में कम ताकत वाले परमाणु हथियार तैनात करने चाहिए. (फोटोः गेटी) रक्षा एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन की हरकतों पर विराम लगाने के लिए अमेरिका को समंदर में कम ताकत वाले परमाणु हथियार तैनात करने चाहिए. (फोटोः गेटी)
aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2024,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

दुनिया भर के रक्षा एक्सपर्ट ये मानते हैं कि China साल 2027 तक Taiwan पर कब्जा करने की कोशिश करेगा. शायद कर भी ले. क्योंकि चीन लगातार ताइवान के फ्रंट पोजिशन और चीनी तट के आसपास मौजूद ताइवानी पोस्ट पर हमले करता रहता है. उसपर कब्जा करने की धमकी देता रहता है. तो क्या ये मानकर चलें कि तीन साल बाद अमेरिका और चीन की वजह से विश्व युद्ध 3 हो सकता है? 

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अब यह चर्चा हो रही है कि क्या हिंद-प्रशांत इलाके (Indo-Pacific Region) में शांति बहाली के लिए अमेरिका को कम ताकत और तीव्रता वाले परमाणु हथियारों को समंदर में तैनात करना चाहिए. क्योंकि इस इलाके में अमेरिका अपने मित्र देशों यानी दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान और फिलिपींस का ही साथ देगा. 

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रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि अमेरिका को शीत-युद्ध के समय अपनाए गए रवैये से अब बाहर आना होगा. युद्ध की डॉक्टरीन को फॉलो करना होगा. चीन के आसपास अपने मित्र देशों की सुरक्षा के लिए थियेटर लेवल और टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन तैनात करने होंगे. भले ही वह कम तीव्रता और ताकत के क्यों ने हों.

छोटे आकार के देशों पर कब्जा करना चाहता है चीन

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इसके पीछे मकसद सिर्फ इतना है कि हिंद-प्रशांत इलाके में चीन की हरकतों से शांति भंग न हो. क्योंकि पिछले एक दशक में चीन लगातार अपने आसपास के छोटे द्वीपीय देशों को धमका रहा है. उकसाने वाली हरकतें कर रहा है. इसके कई उदाहरण सामने हैं. चीन लगातार जापान को सेनकाकू द्वीप को लेकर उकसाता है. 

जापान के ओकिनावा द्वीप को लेकर चीन पुराने समय से अपना दावा ठोक रहा है. इतना ही नहीं पिछले कुछ वर्षों से फिलिपींस के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन में कब्जा जमाने की कोशिश कर रहा है. फिलिपीनी नागरिकों वाले द्वीप थिटू पर कब्जा करने का प्रयास करता रहता है. 

चीन की मिलिट्री ताकत जल्द होगी अमेरिका के बराबर

चीन की बढ़ती मिलिट्री ताकत को देखते हुए अमेरिका और उसके मित्र देशों की चिंता बढ़ती जा रही है. अमेरिका के पास चीन से कई गुना ज्यादा परमाणु हथियार हैं. लेकिन चीन ने भी अपनी ताकत लगातार बढ़ाई है. चीन की नौसेना के पास 355 जंगी जहाज हैं. जल्द ही वह अमेरिका फाइटर एयरक्राफ्ट को भी टक्कर देगा. 

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अमेरिका इस बात से परेशान है कि चीन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लगातार अपनी मिलिट्री ताकत की धमक दिखाता रहता है. चीन की ड्यूल-कैपेबल क्रूज, बैलिस्टिक और हाइपरसोनिक मिसाइलों को देख कर अमेरिका और उसके मित्र देश परेशान होते रहते हैं. बीजिंग का आक्रामक रवैया इस परेशानी को और बढ़ाता है. 

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अमेरिका के पास बचे हैं सिर्फ दो रास्ते, जो बचाएगा इन्हें

चीन की मिसाइल फोर्स ऐसी जगहों पर तैनात है कि उससे अमेरिका और उसके साथी देशों को खतरा है. इससे दक्षिण चीन सागर में किसी भी समय तनाव की स्थिति हो सकती है. यहां तक कि बीजिंग के पास उत्तरी अमेरिका के कई शहरों को निशाना बनाने लायक मिसाइलें हैं. 

अब अमेरिका के पास दो रास्ते हैं. पहला ये कि वह अपने फॉरवर्ड पोस्ट को और मजबूत बनाए. आधुनिक और खतरनाक हथियारों से लैस करे. दूसरा ये कि कम खतरे वाली जगह पर चला जाए. इससे अमेरिका के दोस्तों की हालत खराब हो जाएगी. वो सीधे चीन के निशाने पर आ जाएंगे. इससे अमेरिका का भरोसा टूट जाएगा. 

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फिलिपींस में टोमाहॉक मिसाइल तैनात करने से नाखुश चीन

फिलिपींस में टोमहॉक मिसाइल से लैस टाइफून सिस्टम से चीन नाखुश है. जबकि अमेरिका ने इस सिस्टम को अस्थाई तौर पर तैनात किया है. वह एक युद्धाभ्यास का हिस्सा था. इसमें अमेरिका ने पारंपरिक हथियारों से लैस क्रूज मिसाइलों को भी फिलिपींस में तैनात किया था. 

अगर चीन परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों को जापान, ताइवान, फिलिपींस और दक्षिण कोरिया में तैनात करता है तो इससे चीन की हालत पस्त हो जाएगी. वह सीधे तौर पर धमकाने या हमला करने की कोशिश नहीं करेगा. हालांकि चीन के सपोर्ट में रूस, उत्तरी कोरिया और ईरान आ जाएंगे. लेकिन किसी तरह का प्रतिक्रियात्मक कदम नहीं उठा पाएंगे. 

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चीन के वादे पर कतई भरोसा नहीं करती दुनिया

अमेरिका को चाहिए कि वह इस इलाके में थियेटर लेवल न्यूक्लियर वेपन (Theatre Level Nuclear Weapon) की तैनाती करे. इससे चीन के साथ चल रही गहमागहमी कम हो जाएगी. अमेरिका और चीन दोनों ने यह फैसला कर रखा है कि दोनों परमाणु हथियारों का इस्तेमाल पहले नहीं करेंगे. 

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हमला करने से पहले दोनों ही देशों को पहले परमाणु हमले की धमकी देनी होगी. अगर इस पर कोई प्रतिक्रिया होती है, तब जाकर पूरी तरह से परमाणु युद्ध होगा. लेकिन सिर्फ परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों की तैनाती की जाए, तो चीन भी ज्यादातर यही काम करेगा. लेकिन चीन पर दुनिया भरोसा नहीं करती. 

चीन का परमाणु डॉक्ट्रीन ही पहले हमला करने के लिए बना है

चीन का ये कहना कि वह परमाणु हमला पहले नहीं करेगा, ये भरोसे लायक नहीं है. लेकिन चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की जो युद्ध रणनीति है, उसमें स्पष्ट तौर पर यह बात दिखती है कि वह किसी भी समय ताकतवर, अचानक और हैरान करने वाला हमला कर सकते हैं. उकसाने वाला हमला भी कर सकते हैं. 

चीन लगातार अपनी परमाणु सेना को तेजी से बढ़ा रहा है. दुनिया भर के रक्षा एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन साल 2030 तक अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों के बराबर पहुंच जाएगा. कम से कम वह 1000 परमाणु हथियार बना लेगा. अमेरिका इसे रोकने के लिए परमाणु हथियारों से लैस मिसाइलों वाले युद्धपोतों को तैनात करक सकता है. इससे मामला तूल नहीं पकड़ेगा. 

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इस बारे में Canada's Asia-Pacific Dilemma लेख लिया गया है. यह लेख जो वॉर्नर ने लिखा है. जो हार्पर सरकार में मिनिस्टिर ऑफ नेशनल डिफेंस पीटर मैक्के के पूर्व पॉलिसी डायरेक्टर थे. इसके अलावा वेस्ट प्वाइंट्स मॉडर्न वॉर इंस्टीट्यूट के पूर्व एडजंक्ट स्कॉलर थे. यह लेख रीयल क्लियर डिफेंस में प्रकाशित हुआ है. 

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