इस बार बजट भले ही अंतरिम था लेकिन रियल एस्टेट के लिए सौगातों की पोटली इस बार के बजट में सबसे भारी थी. घर खरीदारों और घर बेचने वालों को तो वित्त मंत्री ने सहूलियत देने का एलान किया ही, साथ ही डेवलपर्स की कई पुरानी मांगें एक झटके में मान ली गईं. घर खरीदार बरसों से पजेशन की आस में आंसू बहाने को मजबूर हैं. साफ नीयत वाले डेवलपर्स टैक्स का बोझ घटाने की मांग को लेकर सरकार से उम्मीदें लगाए बैठे थे. पजेशन के मोर्चे पर तो सरकार से ग्राहकों की नए फंड बनाने की उम्मीद पूरी नहीं हुई, लेकिन टैक्स के मामले में जरूर राहतों का पिटारा खोल दिया गया.